मैंने पहले ही लिखा था ये सरासर गलत है पर अज्ञानी लोग बिना धर्म को समझे किसी भी जगह की मान्यता रीति रिवाजों को बदल देते हैं। पहाड�� समाधी स्थल हैं देवताओं के इसलिए यहां बड़े मंदिर, मूर्ति सिस्टम और हो हल्ला नही होता। यही देवता ने बोला यहां मेरा समाधि स्थल इसको साउथ की तरह मत बनाओ।
मित्रों, विग�� दिनों मैंने गोपेश्वर में अत्याधुनिक डायलिसिस सेंटर की स्थापना हेतु अपनी प्रतिबद्धता आप सभी के साथ साझा की थी।
उसी संकल्प को आगे बढ़ाते ह��ए आज मैंने अपनी सांसद निधि से इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रथम किस्त के रूप में ₹50 लाख की धनराशि जारी कर दी है।
यह डायलिसिस सेंटर गोपेश्वर एवं आसपास के क्षेत्रों के किडनी रोगियों के लिए वरदान सिद्ध होगा। इसके स्थापित होने से मरीजों को डायलिसिस जैसी महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधा के लिए दूर-दराज़ के शहरों की ओर नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि उन्हें अपने ही क्षेत्र में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो सकेगा।
I second that.
Most IPS officers do not serve in active anti Naxal operations on the ground, yet eventually end up commanding those who do. When CAPFs already have their own UPSC based officer entry system, leadership positions; including DIG level appointments; should primarily come from within the force itself.
The shepherd from Kanol narrates that the forest department demolished the hut (chhani )he had built in the high-altitude bugyals (alpine meadows). Through this song, he expresses his grief, pain, and sense of loss.
जब शोध का उद्देश्य ज्ञान नहीं, बल्कि केवल प्रकाशन की गिनती बन जाए, तब विश्वविद्यालय प्रयोगशाला नहीं, उत्पादन केंद्र बन जाते हैं।BHU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के शोधपत्रों पर लगे ये आरोप केवल कुछ प्रोफेसरों की चूक नही��, बल्कि उस पूरी अकादमिक संस्कृति पर प्रश्न हैं जहाँ Publish or Perish की अंधी दौड़ ने नैतिकता, मौलिकता और बौद्धिक ईमानदारी को पीछे धकेल दिया है।
AI का उपयोग अपराध नहीं है, लेकिन यदि AI शोधकर्ता की बुद्धि का सहायक बनने के बजाय उसकी जगह लेने लगे, डेटा और तस्वीरों में हेरफेर होने लगे, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, ज्ञान के साथ विश्वासघात है।
एक शोधपत्र केवल कागज़ नहीं होता उस पर समाज का विश्वास, छात्रों का भविष्य और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा टिकी होती है।
विडंबना यह है कि जिन स��स्थानों को सत्य की खोज का केंद्र होना चाहिए, वहीं यदि कट-कॉपी-पेस्ट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे प्रतिष्ठा अर्जित की जाएगी, तो आने वाली पीढ़ी शोध को तपस्या नहीं, शॉर्टकट समझेगी।
75 शोधपत्रों का वापस होना केवल तकनीकी घटना नहीं; यह भारतीय उच्च शिक्षा के सामने खड़ा एक नैतिक दर्पण है।
यह बताता है कि डिग्रियाँ बढ़ सकती हैं, रैंकिंग चमक सकती है, लेकिन यदि शोध की आत्मा मर जाए तो विश्वविद्यालय केवल इमारत बनकर रह जाते हैं।
शोध का अर्थ केवल प्रकाशित होना नहीं, बल्कि सत्य के प्रति उत्तरदायित्व भी है। खैर नाम उजागर करना चाहिए थे,ताकि विद्वानों की सूची जगजगा जाती।
@PinxhuNegi Can you also explain this vigrah. May be Bhiravnath ji. Gopinath temple “The idol of Lord Akash Bhairav is situated in the first right pillar of the sanctum sanctorum of the Gopinath ji temple”.