@sureshkapse य��र ये बेवकूफ जज पुलिस के खिलाफ कुछ न करने के। शाम को इनके बिवि/ बच्चों को यही पुलिस की जिप्सी अवैध रूप से ट्यूशन / मार्केट में शॉपिंग / दिल्ली हाट /मंडीहा��स ले जाती है। इसलिए शांत रहो, चोर चोर मुसेरे भाई।
@ravish_journo लानत आनी चाहिए दिल्ली पुलिस को अपने ऊपर। याद करो 26/jan/2021 को लाल किले पर तिरंगे का अपमान तो ये खालिस्तानियों से बचा नहीं पाए और डर कर दीवारें कूद के ये भागे थे हीजड़ों की तरह और कल इन्होंने निहत्थे बच्चों के एक आंदोलन के अन्दर अपनी चापलूसी भरी नौकरी बजाने के लिए डंडे बरसाए??
@surinde32 सुरेन्द्र कुमार तुमने जाटों का नाम ऊंचा कर दिया ,जियो दोस्त जियो।। ये वही नपुंसक दिल्ली पुलिस के जवान हैं जो लाल किले पर भारत के तिरंगे ��ा अपमान नहीं रोक पाए थे खालिस्तानियों से, कूद कूदकर लाल किले से भागे थे जान बचाने को।,जहां पर इनको डंडे बरसाने थे वहाँ तो बरसाए नहीं गए थे
@surinde32 सुरेन्द्र कुमार तुमने जाटों का नाम ऊंचा कर दिया ,जियो दोस्त जियो।। ये वही नपुंसक दिल्ली पुलिस के जवान हैं जो लाल किले पर भारत के तिरंगे का अपमान नहीं रोक पाए थे खालिस्तानियों से, कूद कूदकर लाल किले से भागे थे जान बचाने को।,जहां पर इनको डंडे बर���ाने थे वहाँ तो बरसाए नहीं गए थे
@surinde32 सुरेन्द्र कुमार तुमने जाटों का नाम ऊंचा कर दिया ,जियो दोस्त जियो।। ये वही नपुंसक दिल्ली पुलिस के जवान हैं जो लाल किले पर भारत के तिरंगे का अपमान नहीं रोक पाए थे खालिस्तानियों से, कूद कूदकर लाल किले से भागे थे जान बचाने को।,जहां पर इनको डंडे बरसाने थे वहाँ तो बरसाए नहीं गए थे
@DineshRedBull दिनेश कुमार ,अब पता चला कोटे से जो निम्न जाति के बिना मेहनत के फ्री, शिक्षा फ्री राशन पर पले हुए हमारे टैक्स के पैसों से, इतने उच्च पदों पर पहुंचते हैं तो वो कैसे रिमार्क देते हैं? यही ये कोई प���़ा लिखा इंसान होता, मेहनत करके यदि जज बना होता तो ईमानदारी से तो ऐसा रिमार्क ना देता।
@Sachingupta सचिन चिन्ता मत करो, ये जो डंडे दूसरे के बच्चों को मार रहे हैं बेवकूफ पुलिसवाले, इनको यह नहीं पता डंडे अपने नौजवान बच्चों की किस्मत पर भी मार रहे हैं। ये सदा के लिए पुलिस वाले तो रहेंगे नहीं, इनके डिपार्टमेंट छोड़ने के बाद इनके ��च्चों का क्या हाल होगा ये समझ नहीं पा रहे।
@pbhushan1 ये लड़ाई किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं बल्कि अहंकारी/अक्खड़/ बुड्ढों से और भ्रष्ट नौकरशाही से है जिन्होंने जनता और संसद के बीच में एक दीवार खींच दी है। चुनावों के दौरान जिनकी झोपड़ियों में रोटी खाते हैं आज उसी जनता की भावनाएँ सुनने के लिए ये सफेदपोश उनके बीच बात भी नहीं कर सकते?