रह गया जो शेष है , वहीं तो विशेष है।
फिर कैसा ये कलेश है, तूने पहना किसका वेश है।
जो तू कर रहा निवेश है, व्यर्थ यह परिवेश है।
बात इतनी सी यह लेश है, जो समझ ले तो तुझमें ही वह "महेश" है।
_dish@_
ये दृश्य जयपुर के गौरव टावर का है
हम पानी बचाने की कोशिश पर तो जोर देते हैं पर हिंदुस्तान मैं हजारों पानी की टोंटिया इसी हालत में हैं
मैं सभी लोगो से निवेदन करती हूं कि अगर पानी बचाने में अपना योगदान देना चाहते हैं तो सबसे पहले पानी के इस व्यर्थ व्यय को रोकें