#मैं_और_काव्याक्षरा
जब अंजुलि��र अँधेरों से निकल मुट्ठी निराशा मुझमें
आनायास ही अकारण
भीतर तक पसर जाती है...
तत्क्षण मेरी चैतन्य लेखनी दिव्यप्रभा-सी काव्यमयी 'काव्याक्षरा' आकर मुझमें शब्दों-सी बिखर जाती है... ✍️
#काव्याक्षरा
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