जिनके घर में श्राद्ध नहीं होता, उनके कुल खानदान में दीर्घ आयुष्य वाली आत्माएं पैदा नहीं होती और सद्बुद्धि वाले छोरे छोरियां जल्दी पैदा नहीं होते और उनके घर में रोग और कलह - कलेश बना रहता ��ै लेकिन जो श्राद्ध आदि सत्कर्म करते हैं तो दशरथ जी करते तो रामजी प्रगट हुए और रामजी भी करते श्राद्ध दशरथ का तो लव और कुश प्रगट हुए, हनुमान जी को भी बांध के दिखा दिया तो इससे दैवी शक्तियां विकसित होती हैं। #AsharamjiBapuQuotes #श्राद्ध_महिमा
जागृति आनी चाहिए भारत में निर्दोष महिलाओं के साथ अत्याचार बंद होना चाहिए।
अच्छे, निःस्वार्थ और जो डरा के ऑपरेशन(सिजेरियन) नहीं करते ऐसे डॉक्टरों को तो मैं बड़ा स्नेह करता हूँ - पूज्य बापूजी
अंक 406, अक्टूबर 2026, पेज 6
#HealthcareEthics#EthicalDoctors#SelflessService
श्राद्ध पक्ष विशेष - गीता अध्याय 7 का माहात्म्य
शंकुकरण की प्रेरक कथा बताती है कि सत्कर्म और गीता-पाठ का पुण्य पितरों को अर्पण करने का कितना सुंदर महत्व है
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गीता के सप्तम अध्याय का पाठ करें और उसका पुण्य पितरों को अर्प��� करें।
#balsanskarkendra
भगवन्नाम महिमा !
जैसे गंगा में गोता मारने मात्र से तन शीतल होता है, रोंगटे खड़े हो जाते हैं, चित्त उसी समय एहसास करता है कि गंगा की शीतलता है। ऐसे ही भगवान के जो प्यारे हैं.. - पूज्य बापूजी
देखे ऋषि दर्शन सितंबर 2026 पार्ट 2 अंक 177
#RishiDarshan#RishiPrasad#AsharamBapu
अगर सदुपयोग करने की कला आ जाय तो कर्म से मिली हुई चीज नश्वर होने पर भी आप शाश्वत के अधिकारी बनने लगेंगे । आधिभौतिक तन और धन का आध्यात्मिकीकरण आपको आत्मानुभूति कराने में सहायक है ।
#AsharamjiBapuQuotes
श्राद्ध करने से फायदा ये है कि जब मरने वाले मां-बाप का श्राद्ध करते हैं , तो जीते जी मां-बाप का आदर करने की भी प्रे��णा मिलती है। ऐसा नहीं कि जीते जी दंगम दंगा और मर जाए तो पहुंचाओ गंगा। औरंगजेब के बाप ने बहुत बढ़िया बात कही शाहजहां ने। औरंगजेब अपने बाप को जेल में डालकर गद्दी पर बैठ गया था। और शाहजहां को पीने तक के पानी की मटकी भी ठीक से नहीं दी। “अरे बूढ़ा पीता रहेगा उसमें टूटी फूटी मटकी में”। कई बार उसने संदेशा भेजा कि और नहीं तो केवल एक मटकी तो भिजवा दे मेरा बेटा है तू, ठंडा पानी तो पी सकूँ, लेकिन नौकरों ने कहा कि जहांपनाह का हुकुम नहीं है आपको मटकी म���ले। तब शाहजहां ने चिट्ठी लिखी कि धन भागी हैं वे हिंदू कि जीते जी बाप की तो सेवा करते हैं, मरने के बाद भी अपने बापों को, दादाओं को खीर खिलाते हैं और तू जिंदे बाप को पानी की मटकी भी नहीं भेजता है कमबख्त ! जय राम जी बोलना पड़ेगा। हिंदू धर्म हित की प्रधानता से चलता है। आने वाले पुत्र और पुत्रियों का भी हित हो और जाने वाले पिता, माता, दादा, परदादा का भी हित हो और अमावस्या के दिन भूले भटके जो प्राणी हैं जिनका कोई श्राद्ध नहीं करता है उनके लिए भी थोड़े तर्पण या दो कण अनाज के डाल दिए जाते हैं तो उनको भी तृप्ति मिले ऐसी भावना होती है।
#AsharamjiBapu
श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी की महिमा बड़ी भा���ी है। श्राद्ध में कुशा, काले तिल और तुलसी का उपयोग पितरों को तृप्त करता है। श्राद्ध में भोजन आदि से तो पितरों की बाह्य तृप्ति होती है लेकिन प्रीतिपूर्वक भगवन्नाम कीर्तन, भगवद स्मृति उनको मानसिक तृप्ति देती है।
तुलसी में पिडार्चन होता है, विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। धन - धान्य जिनके पास है वो उस ढंग से करें और जिनके पास नहीं है तो कम से कम साधन से भी श्राद्ध हो सकता है। कोई पितर अथवा कोई सुह्रद रह गया हो तो अमावस्या को उनकी तृप्ति के लिए श्राद्ध किया जा सकता है।
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#श्राद्ध_महिमा
समझो श्राद्ध करने की क्षमता, शक्ति, रुपया-पैसा नहीं है। मेरे पास धन नहीं विधि नहीं, दौलत नहीं है, सामग्री नहीं है। घर में कोई करने-कराने वाला नहीं। लेकिन आपके लिए मेरा सद्भाव है, श्रद्धा है। आप मेरे सद्भाव और श्रद्धा से भी ���ृप्त हो सकते हैं।
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#PitruPaksha
मान लो मैं किसी जंगल में हूँ अथवा मैं कंगाल हूँ , ग��ीब हूँ और श्राद्ध के दिन हैं तो अब मैं क्या करूं ? जो कुछ कंद मूल हैं राम जी की नाईं… राम जी ने कंद मूलों से श्राद्ध किया था। अयोध्या में आए तब व्यवस्थित श्राद्ध किया था लेकिन कंद मूल भी नहीं हैं तो हमारा धर्म कहता है चिंता ना करो! पानी का एक लोटा सूर्यनारायण को चढ़ा दो और दोनों हाथ ऊंचे कर दो, आपकी बगल दिखे ऐसे हाथ ऊंचे कर दो, आप हार मान लो कि मेरे पास देने के लिए श्राद्ध की सामग्री नहीं है। देने के लिए मेरे पास अन्न, धन, दक्षिणा नहीं है। फिर भी सूर्य नारायण की साक्षी में हे यमराज! मेरे पिता फलाने भाई, फलाने भाई और उनका यह गोत��र है, आप उनको सुख दीजिए, उनको शांति दीजिए और उनका आशीर्वाद मुझे मिले। आप इतना भी करते हैं तो आपकी प्रार्थना से आपके पितरों को संतोष होता है।
#AsharamjiBapu
आदमी मर जाने के बाद सवा मुहूर्त, सवा दो घंटा, मरा हुआ जीव मूर्छा में रहता है, सूक्ष्म शरीर में। फिर वो जागता है। फिर सोचता है कि क्या हुआ ? कैसे हुआ ? फिर वो मरा हुआ, ये शरीर मरा है और खुद सूक्ष्म शरीर से अपने शरीर को देखता है। घर वाले ��ोते हैं तो देखता है ,कि कौन आया ? कौन गया ? तीसरा होता है तो कुटुंबी आ जाते हैं, दूर दूर के आ जाते हैं, फलाना कैसे मरा ? ऐसा हो गया सिर में दर्द था, ऐसा हुआ, फलाना हुआ, जो भी निमित हुआ, हार्ट अटैक हो गया, ये हो गया, वो भाई आदमी तो अच्छे थे, भले थे, चलो भगवान उसकी सद्गति करें। वो सब अपने संबंध की जो तातें हैं, वो तोड़ के चले जाते हैं , ताकि ये कहीं भटके नहीं, आगे जाए! उसमें भी रह जाए तो फिर बारहवां किया जाता है। उस��ें भी कहीं उसका रह जाए तो बारह महीने में एक दिन उसका श्राद्ध कर देते । ये हिंदू धर्म की बहुत सुंदर व्यवस्था।
#AsharamjiBapu
अच्छा विचार आ जाए और अच्छा कर्म करने का भाव आ जाए तो जल्दी करो, हिम्मत करो, उसमें विघ्न पड़ता है, भगवान और बल बढ़ाते हैं। बुरा भाव आ जाए तो बोले अभी नहीं।
सौ-सौ बातें आयेगी मन में, 100 की कर दो साठ, आधा कर दो काट। 10 करेंगे, 10 करवाएंगे, 10 के जोड़ेंगे हाथ।
#AsharamjiBapuQuotes
अगर ब्रह्म विचार नहीं है तो त्याग का फल जो है वो उसमें नहीं है।तो महान फल किसने पाया?
बड़े में बड़ा त्याग है कि जिसने आत्मपद पा लिया उसने बड़े में बड़ा त्याग कर दिया।
'देह छता जेनी दशा वर्ते देहातीत'
उसमें जो पहुँच गया उसने बड़ा त्याग कर लिया।
#RishiDarshan#SantShriAsharamjiBapu
सावधान हो जाये !! गर्भ हत्यारे !
संन्यासी की हत्या करनेवाला और गर्भ की हत्या करनेवाला महापापी कहलाता है ।
वह कुंभीपाक नर्क में 14 इंद्रों के भोगकाल तक यातनाएँ भोगता है। फिर 1000 जन्म गीध,100 जन्म सुअर,7 जन्म कौआ, 7 जन्म सर्प होता है, फिर..
#RishiPrasad#AsharamjiBapu#GarbhHatya
है जो है वो परमात्मा है। बाकी की कल्पना हमारी माया है। है तो अस्तित्व और बाकी जो नाम रख लिए वो सब माया के।
इसीलिए मुनि कहते हैं- धीरो न द्वेष्टि संसार:
ज्ञानी की नजर में अपना शत्रु कोई नहीं।
नानक साहब ने कहा-जग में वैरी कोई नहीं..
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मैं तो उन जापानियों को शाबाश देता हूं कि वो अमेरिकन अंग्रेजी जानते हुए भी अमेरिका में अपने देश की भाषा ही बोलते हैं और हम अपने देश में पराई गुलामी के गीत गाए जा रहे हैं। अंग्रेजी रहन - सहन, बोलचाल मानों अपनी संस्कृति के पीछे डंडा लेकर पड़े हैं कि नाबूत हो जाए।
#AsharamjiBapuQuotes
|| Thought of the Day ||
शुभ संकल्प व पवित्र कार्य करने से मन शुद्ध होता है और ��ोक्ष के मार्ग पर ले जाता है | यही मन पापपूर्ण आचरण से अशुद्ध होता है और बंधन में बांधता है ।
#SantShriAsharamjiBapu #YogVedantSevaSamiti
विष में और विषय में इतना ही अंतर है कि विष का चिंतन करने से मौत, पतन नहीं होता, विष जिस बोतल में रहता है उसका नाश नहीं करता लेकिन विषय जिस चित्त में रहते हैं उसको बरबाद करते हैं । उनका चिंतन करनेमात्र से बरबादी हो जाती है ।
#AsharamjiBapuQuotes
गणेश महोत्सव : 14 से 25 सितम्बर
गणेशजी की सूंड लंबी अर्थात दूर की वस्तु की बू ले लेता है हाथी। ऐसे ही गणों का, कुटुंब का जो अगुआ ���ै, उसको कहाँ,क्या हो रहा है,उसकी गंध आनी चाहिए।
सितम्बर 2023,पार्ट 3,अंक 141
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