Sudhir Chaudhary is discussing the political and social impact of Dimagi Naxal in India and spreading lies.
Speaking against corruption, talking about education,
accountability from the government,
asking questions for one’s own rights before religion
that is Dimagi Naxal!
The Dimagi Naxal party Instagram page has experienced a massive flood of followers, accumulating 445k followers within just two days.
Although searching on Meta’s search engine does not bring up the real page, people are still managing to locate and follow it somehow.
ये लड़ाई है cockroaches और dimagi naxal के सम्मान की।
ये लड़ाई है देश के genZ के सम्मान की।
ये लड़ाई पार्टी vs पार्टी नहीं रही है अब ये लड़ाई सिस्टम vs लोगो की हो चुकी है।
किरेन रिजिजू आलोचकों को दिमागी नक्सल कहना कोई तर्क नहीं यह असहमति की आवाज दबाने का सस्ता तरीका है
जवाब न दे पाएं तो लेबल न लगाएं आलोचना देश विरोधी नहीं बात कहना हमारा अधिका���
I CHOOSE TO BE THE VOICE OF INDIAN STUDENTS AND EVERY SUPPRESSED SOUL IN my COUNTRY.
I stand AGAINST CORRUPTION, NEGLIGENCE, ATROCITIES, BROKEN LAWS, and POLITICS in the name of religion. I am no one's slave.
I am an INTELLECTUAL rebel for my nation.
लाल किले से पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान के बाद सोशल मीडिया पर व्यंग्यात्मक अंदाज में 'दिमागी नक्सल पार्टी (DNP)' की कल्पना सामने आई।
यह काल्पनिक पार्टी राजनीतिक बयानबाजी पर तंज कसते हुए सवाल,
बहस और लोकता��त्रिक असहमति को चर्चा का विषय बनायेगी।
एक युवती और युवक का रिश्ता था।
युवक ने उनकी व्हाट्सऐप चैट/बातचीत रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर वायरल कर दी।
गांव की पंचायत ने मामला अपने हाथ में लिया और फैसला सुनाया कि सजा के तौर पर युवती खुद युवक को चप्पल से मारे।
सभा के बीच युवती चप्पल उतारकर युवक के सिर पर बार-बार मार रही है,
और युवक सिर झुकाए चुपचाप खाता रहा है।
इसे न्याय कहेंगे या अन्याय?
रील एक भयानक बीमारी है!
शॉट लेने में महिला इतनी ���दहोश है कि उसे अपना बच्चा नहीं दिख रहा है।
वह कैमरे के सामने पोज़ दे रही है लेकिन उसका बच्चा पुल के किनारे तक पहुँच गया।
जबसे पता चला है social media पैसे देता है तबसे गाँव की महिलाएँ क्रिएटर बनने के चक्कर में सठिया गई हैं।
ये बीमारी गाँव गली में कसके फ़ैल चुकी है।
अब लोग समझ गए निष्पक्ष दिखने वाला सौरभ द्���िवेदी गोदी मीडिया की श्रेणी में आता है।
ये gen z छात्र वही हैं जिन्होंने मोदी सरकार को घुटनों पर ला दिया और अब झारखंड में डटे हुए हैं।
छात्र प्रमाणपत्र नहीं देंगे तो कौन देगा सौरभ जी?