इस गानीका और इसके मोहरे को
बताओ कि युद्ध होने पर,
पुरुष हो या स्त्री सैनिक उसकी सिर्फ जान नहीं जाती बल्कि सैनिक घायल भी होते हैं
घायल सैनिक मुस्लिम बंदी बनाते थे तब
तो अगर विदेशी मुस्लिमों से युद्ध के समय स्त्री लड़ने चली जाती और वह मरने की जगह घायल होकर गिर जाती है तो फिर उसे मुस्लिम सैनिक उठाकर लेकर जाते
जैसे औरंगज़ेब गोकुल जाट से युद्ध के बाद उनकी बेटी सहित 7000 स्त्रियां बच्चे उठाकर लेकर गया था
और उनको मुसलमानों में बाट दिया था
उस समय ऐसा कोई युद्ध नहीं जो जीतने के बाद मुसलमानो ने हिंदू स्त्रियों बच्चों को गुलाम बनाकर उन्हें मुसलमान में ना बाटा हो
तो राजपूत स्त्रियां यह नहीं चाहती थी कि घायल होने के बाद उनको उन ज़ालिम मुसलमानो के बच्चे पैदा करने पड़े
इसलिए वो जौहर चुनती थी
लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि श्वेता तुम ऐसी स्थिति में मुस्लिम बच्चे पैदा करना प्रेफर करती
और जिसके साथ पॉडकास्ट कर रही होअगर इसकी माता बहन इस पोजीशन पर होती और पकड़े जाने पर मुस्लिम बच्चे पैदा करना पड़ता तो
वो इस पर ताली बजाता कि चलो इनकी जान तो बच गई
पर राजपूत और राजपूतानी दोनों ऐसी स्थिति में मर जाना ज्यादा बेहतर समझते थे
That is Jwala Devi temple of Baku in Azerbaijan. It was used by medieval Punjabi Hindu traders who venerated natural fire source inside the temple as Jwala Devi. Inscriptions in Indic languages still exist.
The chanting is exactly how a medieval traveler would’ve witnessed it. They should be grateful to Hindus for giving the live experience
You are embarrassing us here. Not them.
जब ब्रह्माण समाज UGC का विरोध कर रहा था,
तब नरोत्तम मिश्रा BJP का पक्ष लेकर UGC का समर्थन कर रहे थे।
आज उसी पार्टी ने लात मारकर भाग दिया, तो उन्हें समाज की याद आ गई।
क्या ब्राह्मण समाज को ऐसे दोगले नेताओं की ज़रूरत है, जिनके लिए समाज से ज़्यादा अपना राजनीतिक भविष्य प्यारा हो?
ये बाबा ब्राह्मण हैं - 40 बीघे के जमींदार थे
जवानिया गांव बाढ़ में बह गया - लभभग सभी जातियों को जमीन मिला - इन्हें नहीं मिला क्योंकि ये ब्राह्मण समाज से थे - जब ये ब्राह्मण सुखी सम्पन्न थे तब इन्होंने कई जातियों के लोगों को बसाया था अपने जमीन पर और आज इनकी ऐसी हालत है - सामाजिक छोड़िए ब्राह्मणों के साथ सरकार के तरफ से भी भेद भाव किया जाता है
गोपालगंज में एक विधानसभा सीट है भोरे जहां लगभग 35-40% ब्राह्मण वोट है उसी तरह गोपालगंज का संसदीय सीट है जिसे आरक्षित कर दिया गया है मतलब हम बहुलता में हैं लेकिन हम सिर्फ वोट देंगे चुनाव नहीं लड़ सकते
ये भेद भाव नहीं है क्या - हम अपनी ही बहुलता वाली सीट पर चुनाव नहीं लड़ सकते तो जहां कम हैं वहां क्या होगा ?
तुम्हे आरक्षित करनी है तो उनकी बहुलता वाली सीट आरक्षित करो
देखिए ये सीधा हमें हर तरीके से पूछे धकेलने की साज़िश है - इन मूर्ख नेताओं के देश में लोगों को देने के लिए रोजगार नहीं है इसपर इनसे कोई सवाल न करे तो ये सवर्णों को टूल बना के इस्तमाल करते हैं इनसे कोई आगे नहीं लाया जाता तो बराबरी दिखाने के लिए ये सवर्णों को ही पीछे धकेलने का प्रयास करते हैं