वैचारिक विभिन्नता (Ideological Differences) होना समाज और राष्ट्र की जीवंतता का लक्षण है, लेकिन जब यह बहस मर्यादा की सीमा लांघकर अहंकार का रूप ले ले और हम आदर-सत्कार तथा मानवीय मूल्यों को भूल जाएँ, तो समाज और राष्ट्र पिछड़ जाता है। देश का विकास सार्थक बहस से ही हो सकती है।
कॉकरोच आंदोलन में डीप स्टेट की जीत हुई- विपक्षी पार्टियों के कारण। डीप स्टेट यह दिखाना चाहता था कि भारत में बुद्धिजीवी सीधे आंदोलन कर जीत हासिल नहीं कर सकते हैं, बल्कि कॉकरोच जैसे इन्सेक्ट जो सीवर का कीड़ा है,उसी का मास्क लगाकर जीत सकते हैं। भारतीय मेधा पर इतन��� बड़ा व्यंग्य।
अब यह स्पष्ट हो चुका है कि भारत में चल रहे वर्तमान आंदोलन के पीछे अर्बन नक्सली, कट्टरपंथी कट्टू, खालिस्तानी और टुकड़े टुकड़े गैंग है। निर्दोष छात्र-छात्राओं का ब्रेनवॉश किया गया है और अब इन सबों की समझ में इन गैंग्स का असली उद्देश्य आ गया है। कृपया सावधान होकर इनका मुकाबला करें।
जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन का चुनावी फ़ायदा किस पार्टी या गठबंधन को मिलेगा- कॉकरोच जनता पार्टी, आम आदमी पार्टी, काँग्रेस, भाजपा? CJP राजनीतिक पार्टी नहीं है, क्योंकि चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त नहीं है, इस नाम से मान्यता मिलने की संभावना भी कम है, तो बताएं कि फायदा किसको मिलेगा
र��वण लौट आया
भारत में रावण डीप स्टेट के रूप में लौट आया है। यह इतना मायावी है कि नया नया रूप धारण कर आ जाता है। यह पैसों की ताक़त पर सत्ता पर कब्ज़ा चाहता है। इसके कमांडर्स पूरे भारत में फैले हुए हैं, जो लार टपकाते हुए पैसा लेते हैं, फिर भौंकना और काटना शुरू करते हैं। जनता समझो।
भारतीय राजनीति अजीबोगरीब मोड़ पर खड़ी है। अब कॉकरोच के मास्क के साथ आंदोलन किया जा रहा है। कल मच्छर और मक्खी के मास्क के साथ भी आंदोलन किया जा सकता है।पार्टी भी कीड़ा-मकोड़ा के नाम पर बन रही है। जनता किंकर्तव्यविमूढ़ है कि वोट किसको दें- मनुष्यों को या कीड़ा-मकोड़ा को।
पलटी- मार नेता ने फिर पलटी मारी। ये पलटी- मार राजनीति के विशेषज्ञ हैं। अब देखना यह है कि इनकी पलटी- मार राजनीति कब तक चलती है? कहीं ऐसा ना हो जाये कि लालटेन की लौ से निकलने वाली कालिख़ से तीर की चमक पूरी तरह से काली पड़ जाए।
एक बड़े नेता भारत में हिटलर- शाही की बात कर रहे हैं। उनसे जाकर कोई पूछे कि य���ि देश में हिटलर- शाही है, तो वे इस तरह की बातें कैसे बोल पा रहे हैं? हिटलर- शाही में तो किसी भी व्यक्ति की इस तरह की प्रतिक्रिया देने की हिम्मत नहीं होती थी।
भारत की दुनिया में पहचान क्या ताजमहल, लाल किला और क़ुतुबमीनार को लेकर है? उत्तर है- नहीं। ��दियों से भारत की पहचान उसकी शांति, अहिंसा और सहिष्णुता की नीति, योग और अध्यात्म, शरणागत-वत्सलता, परोपकार की भावना आदि को लेकर रही है।
अप्प दीपो भव
दीपक की तरह निःस्वार्थ भाव से दूसरों के लिए प्रकाश -स्रोत बनो और स्वयं को भी सद्ज्ञान की लौ से प्रकाशित करते रहो। भगवान गौतम बुद्ध का यह महान संदेश आज भी पूरी तरह से प्रासंगिक है। यदि मनुष्य इस पथ पर चले तो संसार की बहुत -सी समस्याओं का तुरंत समाधान हो जाएगा।
इतिहास गवाह है कि समय चक्र को वही घुमा सका जिसने अन्याय और अत्याचार का पुरज़ोर विरोध किया, जो हमेशा शांति- शांति चिल्लाते रहे , उसे समय ने अपने चक्र ��ें समा लिया। यही कारण है कि गाँधी-नीति अप्रासंगिक हो चुकी है और चाणक्य- नीति का अनुसरण आज भी पूरी दुनिया कर रही है।