VIDEO | Delhi: Congress leader Udit Raj on Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav's 'BJP is finished' remark, says, "The BJP had already weakened in 2019. If the Pulwama incident had not happened, it would not have won more than 150 seats. In the 2024 elections, there was alleged rigging in around 80–81 seats. Now, the Election Commission is allegedly removing opposition voters from the electoral rolls. There are also serious doubts about the functioning of the EVMs. The Election Commission is allegedly acting in a partisan manner. Moreover, funds are being transferred to beneficiaries' bank accounts at the last minute, in violation of the Model Code of Conduct. There are also allegations of irregularities during the counting process. Otherwise, if you look at the public mood, the BJP has lost the people's trust everywhere. It is winning elections only because of the ED, CBI, Income Tax Department, money, and the Election Commission... through a combination of inducements and intimidation. Otherwise, it has already lost its mass support."
#Congress #BJP #UditRaj
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/bIyFWTfmBd)
सोनम वांगचुक की मौत हो जाए, सरकार को क्या फ़र्क़ पड़ता है?
वे ऐसे समय में भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जब सरकार में संवेदनशीलता का पूर्ण अभाव है।
NEET के 19 प्रतियोगियों की मौत हो गई, लेकिन क्या कोई प्रभाव पड़ा?
यह कांग्रेस का वह दौर नहीं है, जब अन्ना हज़ारे रामलीला मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे थे, जबकि मुद्दे ग़लत थे। उस समय जनता और सरकार, दोनों की संवेदनाएँ जीवित थीं। लोग उनके समर्थन में लगातार जुड़ते गए।
उस दौर में मंत्री जेल भी जाते थे और इस्तीफ़ा देना कोई असामान्य बात नहीं थी।
असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के राष्ट्रीय वाईस चेयरमैन श्री संजय गाबा जी के माध्यम से देशभर के ट्रेड यूनियन नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से कांग्रेस मुख्यालय, नई दिल्ली में मुलाक़ात हुई।
बैठक में देश के विभिन्न हिस्सों में मज़दूरों की स्थिति, श्रम क़ानूनों तथा उनके अधिकारों पर विस्तृत चर्चा हुई। मोदी सरकार के कार्यकाल में मज़दूरों का अभूतपूर्व शोषण हो रहा है। भाजपा और आरएसएस ने मज़दूरों के बीच हिंदू-मुस्लिम विभाजन और पाखंड की राजनीति का ज़हर घोलकर उनकी एकता को कमजोर किया है।
लेकिन यह दौर हमेशा नहीं चलेगा। हर अन्याय का अंत होता है। इसलिए मज़दूरों के अधिकारों, सम्मान और न्याय की लड़ाई पूरी मजबूती से लड़ते रहना होगा।
भ्रष्ट, अन्यायी, पक्षपाती, बेईमान - ये चार शब्द मेरे नहीं, ये देश के छात्र आज भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
और सच यही है - भारत की शिक्षा व्यवस्था अब एक बेईमान वसूली तंत्र बन चुकी है।
जो व्यवस्था बच्चों के भविष्य को तैयार करने के लिए बनी थी, वो आज उन्हें और उनके परिवार को कर्ज़, तनाव और निराशा में धकेल रही है।
इसी भ्रष्टाचार ने पेपर लीक माफ़िया को जन्म दिया - जो तैयारी कर रहे लाखों छात्रों की सालों की मेहनत एक झटके में लूट लेता है।
यहां दोषी vendors और अधिकारियों को मिलती है tender और तरक्की। और सजा किसे मिलती है? छात्रों को, जिन्हें टूटे सपनों के साथ अकेले छोड़ दिया जाता है।
मोदी सरकार और शिक्षा मंत्री यह सब देख रहे हैं। पर उन्होंने चुप्पी चुनी है - जवाबदेही से मुँह मोड़ लिया है। और मीडिया में? बस एक लंबा सन्नाटा।
अब बहुत हुआ - अब वक़्त है शिक्षा में Revolution का।
17 जुलाई, देहरादून - मेरे साथ आइए, ‘छात्रों की गूँज’ को और बुलंद करें।
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#ChhatronKiGoonj
Modi ji has made up his mind: if Indians aren't allowed to live in peace in their own country, why should they abroad? Putting anyone at stake to polish his image is in his nature.
· When he became PM, India's passport ranked 74th in strength, and now it has fallen to 125th. His effort is to drag it to the very bottom, and his devotees are working in that direction. Even Namibia's passport now holds more power than ours.
· After becoming PM, Modi ji held a rally at Madison Square Garden in America. Would Americans have liked that? If Trump or any other country's head of state came to India and gathered a crowd, would we like it? After that, reactions slowly built up in America, and several Indians have been shot at so far, with hatred only growing. They were sent out in chains and shackles—something that hasn't happened to citizens of any other country.
· By holding a rally in Melbourne, Australia, he created trouble for Indians living there. When a country's leader goes abroad, human rights activists might protest occasionally, but in Melbourne, a large number of white people protested and chanted slogans like "Modi, go back" and "Indians, leave Australia." Now, Indians there will have to pay the price. The country's leading newspaper wrote that Indians gathered in large numbers for roti and curry. What a shameful thing!
· Now, Indian applications for Schengen visas are being rejected the most.
· Previously, 23% of Indian students' US visa applications were rejected; now it's 63%.
· Thailand used to offer visa-on-arrival before, but now applications are required.
· Now, when Modi ji travels abroad, the godi media tags along, and as soon as local journalists ask questions, they jump in with easy ones—like "Don't you get tired?" or "How do you eat mangoes?" and so on.
· Crimes from India's jails are happening abroad, and the governments of America and Canada are taking action against them.
मोदी जी ने ठान लिया है कि जब भारतीयों को देश में चैन से नहीं रहने दिया तो विदेश में क्यों रहें? अपनी छवि को चमकाने के लिए किसी को भी दाँव पर लगा देना इनके स्वभाव में है।
· जब ये पीएम बने थे, तो भारत के पासपोर्ट की ताकत 74वें स्थान पर थी और अब गिरकर 125वें पर आ गई है। इनकी कोशिश है कि यह सबसे नीचे पहुँचे और भक्त इस दिशा में लगे हैं। नामीबिया के पासपोर्ट की ताकत भी हमसे ज़्यादा हो गई है।
· पीएम बनने के बाद अमेरिका के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में मोदी जी ने रैली की। क्या अमेरिकियों को यह अच्छा लगा होगा? अगर ट्रंप या कोई अन्य देश का राष्ट्राध्यक्ष भारत में आकर भीड़ जुटाए, तो क्या हमें अच्छा लगेगा? उसके बाद धीरे-धीरे अमेरिका में प्रतिक्रिया हुई और कई भारतीयों को अब तक गोली मारी जा चुकी है, और नफरत बढ़ती जा रही है। बेड़ियाँ-कथकड़ियाँ लगाकर भेजा गया, जो किसी अन्य देश के नागरिक के साथ नहीं हुआ।
· ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रैली करके वहाँ रह रहे भारतीयों के लिए मुसीबत पैदा कर दी। अगर कोई देश का प्रमुख विदेश में जाता है, तो कभी-कभार मानवाधिकार कार्यकर्ता विरोध करते हैं, लेकिन मेलबर्न में बड़ी संख्या में गोरों ने विरोध किया और नारे लगाए—"मोदी वापस जाओ", "भारतीयों, ऑस्ट्रेलिया छोड़ो"। अब वहाँ भारतीयों को कीमत चुकानी पड़ेगी। वहाँ के प्रमुख अखबार ने लिखा कि रोटी और करी के लिए भारतीय बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए। कितनी शर्म की बात है!
· अब शेंगेन वीज़ा के लिए भारतीयों के आवेदन सबसे अधिक रिजेक्ट हो रहे हैं।
· पहले भारतीय छात्रों के अमेरिकी वीज़ा आवेदन 23% रिजेक्ट होते थे, और अब 63% हो गए हैं।
· पहले थाईलैंड के लिए वीज़ा-ऑन-अराइवल था, और अब आवेदन करना पड़ रहा है।
· अब मोदी जी विदेश जाएँ तो गोदी मीडिया साथ रहे और जैसे ही वहाँ के पत्रकार सवाल पूछें, ये बीच में कूदकर आसान सवाल पूछें- जैसे कि "आप थकते नहीं?", "आम कैसे खाते हैं?" वगैरह-वगैरह।
· भारत की जेलों से विदेशों में अपराध हो रहे हैं, और कार्रवाई उनके ख़िलाफ़ अमेरिका और कनाडा की सरकारें कर रही हैं।
The internal factionalism within the Congress is not only a major reason for losing elections, but also the primary cause of the party's weakening at the organizational level. It's incomprehensible how infighting benefits anyone.
Due to factionalism, Congress missed the opportunity to form the government in Uttarakhand. The leaders and workers of Punjab should learn from this. Punjab itself fell prey to severe factionalism during the previous assembly elections. It was as if the party president had taken a contract to oppose every decision of his own government, and the result was that we lost.
If we consider the struggle to save the Constitution and Rahul Gandhi ji's sacrifices and dedication, we must avoid factionalism. If there is any issue or disagreement within the organization, it should be raised on the party's appropriate platform.
@INCPunjab@INCIndia
आज कांग्रेस मुख्यालय, नई दिल्ली में असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) के राष्ट्रीय चेयरमैन माननीय डॉ. उदित राज जी ने विभिन्न प्रदेशों से आए समर्पित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
#KKC#Congress#RahulGandhi#AICC
कांग्रेस के अंदरूनी गुटबाज़ी न केवल चुनाव हारने का एक बड़ा कारण है, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर पार्टी के कमजोर होने की भी प्रमुख वजह है। समझ में नहीं आता कि आपसी लड़ाई से किसी को कुछ भी नही मिलने वाला है।
गुटबाज़ी के कारण कांग्रेस उत्तराखंड में सरकार बनाने से चूक गई। पंजाब के नेताओं और कार्यकर्ताओं को इससे सीख लेनी चाहिए। स्वयं पंजाब भी पिछली विधानसभा चुनाव के समय भीषण गुटबाज़ी का शिकार हुआ। पार्टी के अध्यक्ष ने मानो सुपारी ले रखी थी कि अपनी ही सरकार के हर निर्णय का विरोध करना है और परिणाम था हम हारे ।
यदि हम संविधान बचाने के संघर्ष तथा राहुल गांधी जी के त्याग और समर्पण को सामने रखकर देखें, तो हमें गुटबाज़ी से बचना होगा। संगठन में यदि कोई समस्या या मतभेद हो, तो उसे पार्टी के उचित मंच पर रखना चाहिए।
@INCPunjab@INCIndia
The Centre for the Study of Developing Societies (CSDS), founded in 1963, conducts interdisciplinary research in the social sciences and humanities. It is an autonomous institution, and its academic contribution has been immense. Such an institution ought to exist and should not face the kind of ban imposed on organizations like Amnesty International, the Ford Foundation, and Oxfam India.
For the past year, the Indian Council of Social Science Research (ICSSR) has stopped its grant on the pretext that most of its expenditure is on salaries. At present, 14 faculty members and around 16–17 staff members are working at the institution. It is an academic institution, not a shop or a factory where capital expenditure on raw materials, goods, and overheads is expected to be higher. In such an institution, intellect and knowledge matter the most; therefore, expenditure on salaries is fully justified.
The hidden agenda appears to be to cripple or ban the institution, not to save the relatively small amount of around ₹5 crore per year. An amount far greater than this is spent on tents, chairs, and other paraphernalia for a single Prime Minister’s rally. Even during the Emergency, its grant was not stopped. This proves beyond doubt that the present situation reflects an even greater emergency driven by a troubling mindset.
मायावती जी, डॉ. आंबेडकर का नाम बदनाम न करें।
दलितों की पिटाई, हत्या और रेप हो तो धरना-प्रदर्शन न करें बल्कि कोर्ट जाना चाहिए।
1990 से बीएसपी यही कहती रही है कि वोट डालो। लोग भावुकता और जातीय प्रेम में ऐसा करते भी रहे। आरक्षण, ज़मीन, शिक्षा, संविधान और अत्याचार जैसे मुद्दों पर न कोई चुनाव लड़ा गया, न कोई रैली निकाली गई और न ही कोई आंदोलन किया गया। एक समय बीएसपी के लगभग 40 लोकसभा और राज्यसभा सदस्य थे। यदि चाहते, तो कई अधिकार हासिल कर सकते थे, लेकिन कुछ नहीं किया।
मायावती ने कहा, “लाख दुखों का एक ही इलाज है—इन्हें वोट डालो, चंदा दो और ऊपर से ग़ुलामी भी करो।”
मेरठ में दलित बेटी ललिता गौतम की हत्या हुई। उसके न्याय के लिए यदि वे खड़ी नहीं होतीं, तो भी बर्दाश्त था, लेकिन इस हद तक चले जाना जो RSS और BJP भी न कर सकीं।
इनका काम कांग्रेस को कमज़ोर करना और बीजेपी को मज़बूत करना रहा है। देश के वर्तमान हालात के लिए बीएसपी भी ज़िम्मेदार है।
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उत्तर प्रदेश में कानून का राज है, लेकिन दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के दमन के लिए।
मेरठ में दलित की बेटी - ललिता गौतम को न्याय दिलाने की आवाज़ उठाने पर जिस तरह मेरठ के एसएसपी ने रवि गौतम को वैन में घुसकर मारा-पीटा, क्या वे किसी और के साथ भी ऐसा करते? क्या किसान आंदोलन के दौरान ऐसा करने की हिम्मत होती? कांवड़िये खुलेआम हुड़दंग और मारपीट करते हैं, क्या उनके साथ ऐसा करने की हिम्मत होती? क्या भाजपा के लोगों के साथ ऐसा व्यवहार करते? उल्टा उनके सामने नतमस्तक हो जाते।
मुख्य आरोपी को बेल मिल गई। यदि आरोपी दलित, ओबीसी या अल्पसंख्यक होता, तो अब तक उसका घर बुलडोज़र से ढहा दिया गया होता।
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वकील शमशेर यादव जगराना और एडवोकेट विजय बहादुर माधव , उप्र डोमा अध्यक्ष,ने जनहित याचिका दाखिल करके सराहनीय कार्य किया है।
उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के गठन में दो वर्ष से अधिक की देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार पर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने कहा कि यदि सरकार गंभीर है, तो आयोग का गठन तत्काल करे। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी और प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। आयोग के लंबे समय से निष्क्रिय रहने से अल्पसंख्यकों से जुड़े मामलों के निस्तारण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
पिछले सप्ताह हुई UGC-NET परीक्षा को लेकर सामने आए गंभीर आरोप बेहद चौंकाने वाले हैं।
NEET पेपर लीक के कुछ ही हफ्तों बाद अब खबरें आ रही हैं कि -
- UGC-NET परीक्षा से ठीक पहले 100 पन्नों की एक PDF प्रसारित हुई।
- यह PDF उस question paper setting की है, जो सिर्फ़ NTA के पास उपलब्ध होती है।
- PDF के लगभग 90 सवाल Sociology के असली प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं।
- वही प्रश्नपत्र ₹2.25 लाख में बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में बेचा जा रहा था।
- इसी नेटवर्क ने CSIR-NET, HTET और ADA जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया।
NEET और NET में बार-बार सामने आए घोटालों के बाद भी मोदी सरकार आंखें मूंदकर सो रही है, क्योंकि लाखों छात्रों की रात-रात जागकर की गई सालों की मेहनत उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।
सारा देश जानता है कि प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री से किसी भी तरह की जवाबदेही या कार्रवाई की उम्मीद बेकार है - न जांच होगी, न छात्रों को न्याय मिलेगा।
बदलाव का एकमात्र औज़ार हमारी सम्मिलित आवाज़ है - देश भर के छात्रों की गूंज, जो भारत में शिक्षा revolution लाकर रहेगी।
राम मंदिर में जो डकैती हुई, उसका समाधान निकाला जा सकता है। जिसकी जहाँ आस्था हो, उस पर सवाल उठाने का कोई मतलब नहीं है। आस्था के अनुसार भगवान कण-कण में हैं और वे सबको देते हैं। यदि यह सही है तो भक्त उन्हें देने वाले कौन होते हैं? वे तो स्वयं उनसे माँगने जाते हैं। फिर नगद, सोना, चाँदी आदि चढ़ाने के बजाय केवल फूल-माला ही क्यों नहीं चढ़ाते? राम मंदिर के प्रबंधन को स्वयं ऐसी अपील करनी चाहिए।
मैं बहुजनों से अपील करूँगा कि उनकी जहाँ भी आस्था हो, वे उसे मानें, लेकिन अपना पैसा और धन शिक्षा, अधिकारों की लड़ाई, सामाजिक न्याय के साहित्य तथा ज्ञान-विज्ञान पर खर्च करें। हालाँकि, बुद्ध, फुले, शाहू, पेरियार, अंबेडकर और कबीर को मानने वालों की आस्था मान-सम्मान और आत्मसम्मान की प्राप्ति में है। इससे न केवल उनका विकास होगा, बल्कि देश भी तरक्की करेगा।