#Doctor#तेरा वैभव अमर रहें ‘माँ’ हम दिन चार रहे ना रहें❤️ #Devotee Of Swami Vivekananda #Patriotic/Bhagat Singh/ Atal Bihari Vajpayee/APJ Abdul Kalam #Nature
कोरोना मरीज़ के संपर्क में आने के कारण स्वयं ही सेल्फ़आइसोलेसन में चला गयाथा जाँच कीरिपोर्ट निगेटिव आयी अब 14 दिन पूर्ण होने के पश्चात् एकबार पुनः माँ भारती के सेवा में उपस्थित हुआ हूँ।
इस पथ का उद्देश नही है
शांत भवन में टिक रहना
किंतु पहुँचना उस मंज़िल तक
जिसके आंगे राह नही
Hello Generals,
In telagana, our brother from SC community will get 90% subsidy on EV.
But why not Generals?
Why current system making policy based on caste ?
It should stop, and it will happen when we will have leader who don't put caste while building policy.
Join GJP, Join the movement
https://t.co/BTvfVucgT3
EWS वर्ग की प्रमुख मांगें।🙏🏻
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को आरक्षण मिलने के बावजूद आज भी इस वर्ग के अभ्यर्थियों को अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
1. EWS प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाया जाए। वर्तमान में OBC की तुलना में EWS प्रमाण-पत्र बनवाना अधिक जटिल है।
2. EWS प्रमाण-पत्र की वैधता केवल एक वर्ष होने के स्थान पर कम से कम 3 से 5 वर्ष की जाए, ताकि प्रत्येक वर्ष नया प्रमाण-पत्र बनवाने की आवश्यकता न पड़े।
3. EWS के लिए निर्धारित ₹8 लाख वार्षिक आय सीमा को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए ₹12–15 लाख तक बढ़ाया जाए।
4. EWS प्रमाण-पत्र के लिए आय सीमा के अतिरिक्त लागू अन्य शर्तों को हटाया जाए।
5.सभी परीक्षाओं में Exam Fee सभी के लिए समान होना चाहिए। किसी वर्ग के लिए ₹0 और किसी अन्य वर्ग के लिए ₹1000 शुल्क जैसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।
6.सभी अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा Age Limit समान होनी चाहिए। प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा में सभी वर्गों के लिए एक समान आयु सीमा लागू की जाए।
7. आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी SC/ST ओबीसी की तरह छात्रवृत्ति Scholarship और शैक्षणिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
8. कक्षा, विद्यालय या कॉलेज में किसी भी छात्र का उसकी जाति, वर्ग या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर मज़ाक उड़ाने, अपमान करने या भेदभाव करने पर सख्त कार्रवाई के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान होने चाहिए।
9. विवाहित महिलाओं के EWS प्रमाण-पत्र हेतु वर्तमान में पिता, पति, स्वयं तथा ससुराल पक्ष की आय को आधार बनाने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल एवं अव्यावहारिक है। इस व्यवस्था को सरल और व्यावहारिक बनाया जाए।
10. भूमि संबंधी पात्रता को हटाया जाए। राजस्थान जैसे रेगिस्तानी एवं बंजर क्षेत्रों में केवल भूमि के आधार पर आर्थिक स्थिति का आकलन करना उचित नहीं है।
11. EWS आरक्षण को 10% से बढ़ाकर 30% किया जाए। यह मांग सभी EWS वर्गों के लिए है
12. आर्मी पब्लिक स्कूल, सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय तथा अन्य समान सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में भी EWS आरक्षण का प्रावधान किया जाए।
13. पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी निकायों में भी EWS आरक्षण प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
14. EWS अभ्यर्थियों को भी निम्न सुविधाएँ प्रदान की जाएँ।
- आवेदन शुल्क में छूट।
- भर्ती परीक्षाओं में आयु सीमा में छूट।
- प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयास (Attempts) में छूट।
- जहाँ उपयुक्त हो, वहाँ कटऑफ अथवा अर्हता अंकों में उचित रियायत।
- छात्रवृत्ति एवं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ।
15. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति, कोचिंग सहायता, शिक्षा एवं रोजगार संबंधी कल्याणकारी योजनाएँ प्रारंभ की जाएँ, जिससे उन्हें समान अवसर प्राप्त हो सकें।
16. EWS प्रमाण-पत्र हेतु आय की गणना Obc की तरह केवल माता-पिता की आय के आधार पर की जाए। इसमें स्वयं, भाई-बहन अथवा अन्य पारिवारिक सदस्यों की आय को शामिल न किया जाए। साथ ही, OBC की तरह कृषि से होने वाली आय तथा सरकारी नौकरी में कार्यरत माता-पिता की वेतन आय को भी आय गणना में शामिल न किया जाए।
17. EWS विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों हेतु विशेष छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण पर ब्याज अनुदान तथा निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जाए।
18. यदि किसी भर्ती या प्रवेश प्रक्रिया के दौरान EWS की आरक्षित सीटें रिक्त रह जाएँ, तो उन्हें उसी भर्ती चक्र में पात्र EWS अभ्यर्थियों से भरने का प्रयास किया जाए।
19. EWS विद्यार्थियों के लिए मेडिकल, इंजीनियरिंग, विधि (Law), प्रबंधन तथा अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति (Fee Reimbursement) की विशेष व्यवस्था की जाए।
20. सरकारी आवास, स्वरोजगार, स्टार्टअप, कौशल विकास एवं स्वरोजगार ऋण योजनाओं में EWS वर्ग को प्राथमिकता एवं विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
21. EWS वर्ग के लिए एक समर्पित शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) स्थापित किया जाए, जिससे प्रमाण-पत्र, आरक्षण अथवा अन्य लाभों से संबंधित समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
22. सभी सरकारी छात्रावासों (Hostels) विद्यालयों एवं सरकारी आवास योजनाओं में EWS वर्ग के लिए पृथक आरक्षण या प्राथमिकता प्रदान की जाए।
23. केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित सभी नई कल्याणकारी योजनाओं में EWS वर्ग को भी समान अवसर एवं प्राथमिकता प्रदान की जाए।
24.EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, शोध (Research) विदेश अध्ययन तथा व्यावसायिक पाठ्यक्रमों हेतु विशेष छात्रवृत्ति एवं वित्तीय सहायता योजनाएँ प्रारंभ की जाएँ।
हर आंदोलन अपनी माँगों से नहीं, बल्कि अपने आचरण से भी पहचाना जाता है। इतिहास गवाह है कि जिन आंदोलनों ने संयम, अनुशासन और तर्क का साथ नहीं छोड़ा, उनकी बात समाज ने अधिक गंभीरता से सुनी।
CJP प्रदर्शन में हमने देखा ही कि मूल मुद्दा पीछे छूट गया और राजनीतिक नारेबाज़ी, व्यक्तिगत टिप्पणियाँ तथा अपमानजनक भाषा चर्चा का केंद्र बन गई। ऐसे माहौल में आंदोलन की वास्तविक माँगें अक्सर शोर-शराबे में दब जाती हैं और जनसमर्थन, पुलिस प्रसाशन भी प्रभावित होता है।
इसके बिल्कुल विपरीत, झारखंड में परीक्षा संबंधी कथित धांधली के विरुद्ध आंदोलन कर रहे छात्रों की एक अलग तस्वीर सामने आती है। कई दिनों से सड़क पर होने के बावजूद वे बार-बार इस बात पर ज़ोर देते हैं कि उनका आंदोलन छात्रों का है, इसे धार्मिक या राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। वे अपनी लड़ाई को मुद्दों तक सीमित रखने, लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने और किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग न करने की बात करते हैं।
यही अंतर किसी भी छात्र आंदोलन की परिपक्वता को दर्शाता है। जब आंदोलन का केंद्र व्यक्तिगत कटुता नहीं, बल्कि अपने अधिकार, न्याय और पारदर्शिता की माँग हो, तब उसकी नैतिक शक्ति भी कहीं अधिक मज़बूत दिखाई देती है।
मैं इन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हूँ।
छात्रों की पीड़ा और उनकी बेबस आवाज़ सुनकर देश के किसी भी कोने में बैठा संवेदनशील नागरिक अपनी आँखें नम होने से नहीं रोक पा रहा। सवाल यही है, जब पूरा देश इन बच्चों का दर्द महसूस कर रहा है, तो सरकारों का कलेजा क्यों नहीं पसीज रहा?
आखिर ये किस मिट्टी के बने हैं, जिन्हें विद्यार्थियों के आँसू, उनका संघर्ष और उनके टूटते सपने भी दिखाई नहीं दे रहे? सत्ता में बैठे लोगों को याद रखना चाहिए कि ये केवल छात्र नहीं, देश का भविष्य हैं; और जब भविष्य सड़कों पर न्याय की गुहार लगाए, तो सत्ता की चुप्पी सबसे बड़ा अन्याय बन जाती है।
वैसे तो करणी सेना नाम से 21 संगठन बताये जाते हैं किन्तु जो महेन्द्र सिंह मकराना का संगठन है वह वास्तव में सबको लेकर चलने वाला जमीनी संगठन है।
वर्तमान में वे कई लाख लोगों को यूजीसी के विरोध में बीजेपी को किसी चुनाव में वोट न देने की शपथ दिला चुके हैं। निरंतर उनके सहयोगियों की संख्या बढ़ रही है। विरोध यात्रा को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है।
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
झारखंड की खबर आपको मीडिया में नहीं दिखेगी।
भारी बारिश के बीच झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों ने निकाला तिरंगा यात्रा।
कई दिनों से आंधी तूफान बारिश के बीच भी रांची में आंदोलन कर रहे हैं छात्र।
JPSC और JSSC परीक्षा में धांधली के कारण झारखंड के छात्र कर रहे आंदोलन।
कल करणी सेना के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन, जिससे एक भी हिंसा का समाचार नहीं आया, पुलिस का लाठीचार्ज हुआ और जैसा कि अपेक्षित था एक व्यक्ति की बलि के साथ सरकार ने इस यज्ञ की पहली आहुति ले ली है!
ईश्वर देवराज सिंह पलाड़ा को सद्गति दें और इस घमंडी पार्टी को सद्बुद्धि!
देवराज स्वयं ओबीसी समाज से थे पर सामान्य वर्ग के विषय के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। मैं जाति का नाम नहीं लिखता पर हर पार्टी जाति-जाति करती है, इस कारण लिख रहा हूँ।
Two male and two female students have begun an indefinite hunger strike, demanding fairness and transparency in JPSC and JSSC recruitment exams.
=> Mainstream media: Silent. Opposition: Missing. CJP: Nowhere to be seen.
Reservation will end or reform , and the UGC issue will be reversed too----
everything will happen. 🙏
Just asking :- how many people are going to vote for Karni Sena if they contest the UP Assembly election ? 🙏 @mahipalmakrana_#EndReservation#ReservationReform
#UGC_RollBack
"अब आरक्षण की समीक्षा की जानी चाहिए। SC, ST और OBC मिलकर बहुमत में हैं। वे देश चला रहे हैं और फैसले लेने वाले भी वही हैं। जनरल कैटेगरी अब अल्पसंख्यक हो गई है।"
आरक्षण को सामाजिक न्याय के एक साधन के तौर पर लागू किया गया था, न कि ऐसी नीति के तौर पर जिस पर कभी सवाल न उठाया जा सके।
अगर नीतियां बदलती हुई हकीकत के साथ बदलनी चाहिए, तो आरक्षण नीति की भी समय-समय पर मौजूदा डेटा, प्रतिनिधित्व और नतीजों के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए, न कि इसे ऐसी चीज़ माना जाए जिस पर चर्चा ही न हो सके।"
-ये कहना है विकास सिंह, पूर्व Additional Solicitor General of Indian का
सवर्णों का एक ही मुद्दा होना चाहिए, reservation खत्म करो। BJP हो, Congress हो, AAP, SP या BSP, जो manifesto में reservation abolish करने का वादा करेगा, वोट उसी को। GC का वोट चाहिए तो manifesto में लिखकर दो।
रात के 2 बजे हुए हैं...
11 दिन... अनगिनत गुहार... और अब भूख हड़ताल! 💔
#JPSC और #JSSC परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता मांगने की यह सजा है कि झारखंड के 2 छात्र और 2 छात्राएं आज आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हैं!
लोकतंत्र में जब युवा को अपने हक और रोजगार के लिए अन्न-जल छोड़ना पड़े, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता।
@HemantSorenJMM जी, ये CJP की तरह किसी राजनीतिक दल के एजेंट नहीं, हमारे देश और झारखंड का भविष्य हैं!
क्या झारखंड के छात्रों को न्याय मिलेगा?