सागर में एक भाजपा नेता ने एक ऑन ड्यूटी महिला डॉक्टर के साथ जबरदस्त�� की। जब बहन ने इसका विरोध किया, तो उसे धमकी दी गई, “तुम्हें गोली मार देंगे।”
प्रदेशवासियों, “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा तो नरेंद्र मोदी जी ने दिया, लेकिन वे यह बताना भूल गए कि भाजपा नेताओं से ही हमें बेटियों को बचाना है।
प्रदेशवासियों, जागो, समझो और न्याय करो।
हमीरपुर
➡दारोगा ने ट्रक ड्राइवर के 20 हजार किए चोरी
➡ट्रक ड्राइवर ने बीच रोड पर दारोगा को पीटा
➡तलाशी लेने पर 20 हजार रुपये बरामद
➡दारोगा गिरीश मिश्रा पर चोरी का आरोप
➡वर्दी पहनकर घाटमपुर से ट्रक में बैठा था
➡ट्रक से उतरकर भागने पर चालक ने दौड़ाया
➡दारोगा को चालक ने पुलिस के हवाले किया
➡सदर कोतवाली के यमुना पुल का मामला
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₹7,000 करोड़ खर्च... पहली ही बारिश में हिस्सा बह गया।
1 मई 2026 को मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक का उद्घाटन हुआ। पहली ही बारिश ने इसकी पोल खोल दी।
बारिश अच्छी सड़क या पुल नहीं तोड़ती। भ्रष्टाचार तोड़ता है।
₹7,000 करोड़ का हिसाब कौन देगा❓️
#DevendraFadnavis#Pune#Corruption
राम मंदिर तो अब लूटा है, लौह पुरुष सरदार पटेल को बेंच कर पहले ही खा गए थे..कथित राष्ट्रभक्त!
3000 करोड़ की बताई गई सरदार साहब की मूर्ति मात्र 324 करोड़ की थी और बाकी कमीशन राष्ट्रवादी पार्टी और गुजरातियों की जेब में चल गया।
बहुत बड़े बड़े चमत्कार कर रखें है इन संघियो ने!
ये है दिल्ली का इंजीनियरिंग मार्वल द्वारका एक्सप्रेसवे। एक ही बारिश में अंडरपास पानी से भर गया। अंडरपास को बंद करना पड़ा।
ये वही प्रोजेक्ट है जिसमें तय क़ीमत के हिसाब से 18 करोड़ रुपया प्रति किलोमीटर खर्चा आना था लेकिन बाद में अज्ञात कारणों से ये क़ीमत बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर कर दी गई थी। अब माननीय एथेनॉल मंत्री श्री धृतराष्ट्र गडकरी ज�� बताएं कि इस प्रोजेक्ट में किस ठेकेदार ने कितना खाया और आपको कितना प्रतिशत मिला?
मुग़लों ने हमें लूटा और हमें दिया
-लाल किला, कुतब मीनार, ताजमहल
अंग्रेजो ने हमें लूटा और हमें दिया
-रेलवे,रोड,सरकारी शासन चलाने का तरीका
कांग्रेस ने हमें लूटा और हमें दिया
-इसरो, IIT, IIM, DRDO,LIC, बैंक, इकॉनमी
आधार, पैन, पासपोर्ट, वर्ल्ड लीडर्स
बीजेपी ने हमें लूटा और हमें दिया
-पेपर लीक, एथनोल, गिरते पुल, गिरता रूपया, हिन्दू मुस्लिम की राजनीती, और अंधभक्त
इसके अलावा क्या दिया है?? बताओ
वे राम को नहीं लाए थे,
राम के नाम पर सत्ता लूटने आये थे।
मंदिर बनाना आसान है ,मर्यादा बनाना कठिन
नारे लिखना आसान है, चरित्र लिखना कठिन
इसलिए आज सबसे बड़ा संकट राम का नहीं है
संकट मर्यादा का है।
'मैं अधिकृत हस्ता���्षरकर्ता नहीं हूं '
' हमारे पास कोई चेक बुक नहीं है '
'मेरे हस्ताक्षर वहां नहीं चलते हैं '
'चढ़ावा की गिनती से मेरा कभी कोई रिश्ता नहीं रहा '
'चढ़ावा गिनने का काम स्थानीय न्यासी लोग ही करते हैं '
' चढ़ावा गणना प्रक्रिया के लिए SOP उन्होंने ही बनाया है '
'मुझे पिछले महीने बैंक के साथ बने SOP को पहली बार दिखाया गया '
'चोरी कब हुई ,कैसे हुई और कितनी हुई , ये जांच का विषय है '
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरी के इस बयान के मायने को समझिए. कोषाध्यक्ष होकर उन्हें चढ़ावा के पूरे मामले से दूर रखा गया था. सारा काम चंपत राय और अनिल मिश्रा कर रहे थे .
“प्रभु राम प्रजाहित दक्ष राजा थे,
जिन प्रभु राम का नाम लेकर राजनीति में आए
वो प्रज्वल रेवन्ना के लिए वोट मांगते है,
जिसने 3000 महिलाओं का बलात्कार किया।
21 बच्चों के आत्महत्या के बाद भी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं लेते।”
— INC प्रवक्ता अतुल लोंढे
Super Exclusive-
‘मंदिर का गर्भगृह बहुकोण बनाया!
ये तो मंदिर ‘राक्षस कोण’ बनाया!’
राम मंदिर बनाने वाली कंपनी को नहीं था, मंदिर बनाने का कोई अनुभव।
राजस्थान के बंसी पहाड़पुर में पत्थर खदान मालिक दिलीप सिंह राठौड़ ‘टॉप सीक्रेट’ पर।
दिलीप सिंह राठौड़ के मुताबिक उन्हों���े सबसे पहले राम मंदिर के लिए बिना मूल्य लिए पत्थर देने की बात की थी,
मगर उनका आरोप है कि उन्हें खारिज कर 5 गुना क़ीमत पर मंदिर के लिए पत्थर ख़रीदे गए।
(पूरा इंटरव्यू टॉप सीक्रेट के YouTube channel पर)
भारत के पूर्व केंद्रीय ग्रह सचिव लक्ष्मीनारायण जी चंदा चोरी 24 घंटे पहले बड़ा खुलासा किया – राजीव रंजन
लक्ष्मीनारायण जी अपनी मां की जमा पूंजी से 5 करोड़ की लागत से रामचरितमानस का निर्माण कराया..!
जिसका 150 किलो वजन था, जिसमें 1000 पेज थे, तांबे के पते पर 24 कैरेट सोने की परत लगाई गई..!
उस रामचरितमानस को अप्रैल 2024 को राम जन्मभूमि ट्��स्ट को सौंपा गया, जिसको हजार निवेदन करके गर्भ ग्रह में रखवाया गया..।
उसके बाद में दोबारा दिसंबर 2024 को राम जन्मभूमि आया तो गर्भ ग्रह से रामचरित मानस गायब थी...!
मैने ट्रस्ट के सचिव जी पूछा कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिला, मेने चंपत राय से मिलने की कोशिश की मुझे घंटों इंतजार करवाया, और कहा मेरे पास बहुत आते किसका डिस्प्ले करू.....।
गज़नवी और गौरी भी आज होते तो शर्म से सिर झुका लेते। वो कहते कि हमसे बड़े डकैत तो ये RSS वाले निकले।
अब यह पूरी तरह साबित हो चुका है, कि RSS का चरित्र अंग्रेज़ों के समय जैसा था, वैसा ही आज भी है, डकैती का, माफ़ीनामे का और मुखबरी का। जिस सोच और तरीके से तब काम ��िया जाता था, वही मानसिकता आज भी साफ़ दिखाई दे रही है।