प्रीमियम बिजली देने के नाम पर जनता को प्रीपेड मीटर का झटका… और अब जैसे ही भीषण गर्मी से लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली, बिजली विभाग फिर लोड बढाकर नया बवाल खड़ा कर दिया
सवाल यह है कि हर बार बोझ उपभोक्ता पर ही क्यों?
न इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, न मैनपावर बढ़ेगी। एक-एक संविदा कर्मी 12–16 घंटे तक काम कर र���ा है, लेकिन उनकी संख्या बढ़ाने की बजाय विभाग केवल लोड बढ़ाने में व्यस्त है। नतीजा फॉल्ट बढ़ेंगे, कटौती बढ़ेगी, ट्रिपिंग बढ़ेगी और जनता का गुस्सा सीधे सरकार के खाते में जाएगा।
किसी ने बड़ी सटीक बात कही....यूपीपीसीएल का इंफ्रास्ट्रक्चर 1984 की एम्बेसडर कार जैसा हो चुका है। जिसे अधिकारी हर बार डेंट-पेंट करके सड़क पर उतार देते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि वह 10–20 किलोमीटर चलने के बाद फिर गरम होकर खड़ी हो जाती है।
अगर सच में व्यवस्था बदलनी है तो केवल उपभोक्ताओं पर नए नियम थोपने से काम नहीं चलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश, पर्याप्त मैनपावर और जवाबदेह प्रशासन ही समाधान है।
मुख्यमंत्री जी से आग्रह है कि यूपीपीसीएल में ऐसे सक्षम और परिणाम देने वाले अधिकारी तैन��त हों जो एम्बेसडर को घसीटने की बजाय पूरे सिस्टम को "फॉर्च्यूनर" बनाने की सोच रखें।
और हाँ… शायद अभी विपक्ष की नज़र इस फैसले पर नहीं पड़ी है। वरना यह मुद्दा सड़कों से लेकर विधानसभा तक गूंज रहा होता। 😊
(यह पूरी तरह एक काल्पनिक व्यंग्य कथा है। इसका किसी वास्तविक व्यक्ति, संस्था या घटना से कोई संबंध नहीं है।)
प्रेस कुमार हमारे करीब 18 साल पुराने मित्र हैं। आज उन्होंने हमको एक ऐसा किस्सा सुनाया कि सुनकर मनवा बड़ा प्रफुल्लित हो गया।
वो किसी काम से एक विभाग के बड़े साहब के ��ास गए थे। साहब भी उनकी कलम तोड़ मेहनत की वजह से उनको अच्छी तरह जानते-पहचानते थे। इतने में हर महीने करीब 2 से 3 करोड़ रुपये के मानदेय वाली पत्रिकाओं की सूची अनुमोदन के लिए उनके सामने आ गई। आम तौर पर साहब उस सूची पर बिना देखे ही हस्ताक्षर कर दिया करते थे, लेकिन पता नहीं आज क्या सूझी कि उन्होंने पूरी सूची पढ़नी शुरू कर दी।
पढ़ते-पढ़ते उनकी नज़र एक काल्पनिक यजमान के नाम पर जाकर अटक गई। साहब ने दोबार�� देखा... फिर तीसरी बार देखा। मामला दिलचस्प था। उस यजमान के नाम से एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं... पूरे पाँच-पाँच प्रकाशन सूची में दर्ज थे। और हर प्रकाशन पर ₹60,000 प्रति माह का मानदेय। यानी हर महीने सीधे ₹3 लाख की दक्षिणा का इंतज़ाम।
इसी दक्षिणा के दम पर काल्पनिक यजमान कभी मुंबई की हवा खा रहे थे, कभी गोवा के समुद्र किनारे तस्वीरें खिंचवा रहे थे, ��ो कभी दूसरे शहरों की सैर का आनंद ले रहे थे।
अब कहानी का सबसे मज़ेदार हिस्सा सुनिए...
जहाँ से हर महीने ₹3 लाख की दक्षिणा मिल रही थी, सुबह से शाम तक उसी व्यवस्था के मंत्री, नेता, अफसर और कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा वही काल्पनिक यजमान कोस रहे थे। ईमानदारी का झंडा भी सबसे ऊँचा उन्हीं के हाथ में था और प्रवचन भी सबसे ज़्यादा वही दे रहे थे।
साहब मुस्कुराए... कलम उठाई... और सूची के नीचे सिर��फ़ एक लाइन लिख दी—
"प्रति माह एक व्यक्ति को केवल एक ही मानदेय मिलेगा। व्यक्ति चाहे जितने भी प्रकाशनों या आवेदनों से जुड़ा हो, मानदेय केवल एक का ही स्वीकृत होगा।"
बस... एक लाइन ने पूरा खेल बदल दिया। जो हिसाब सालों से बिना किसी रोक-टोक के चल रहा था, वो एक नोटिंग से गड़बड़ा गया।
प्रेस कुमार बोले—"अब तो कई काल्पनिक यजमानों का महीना खराब हो जाएगा।"
ये किस्सा सुनकर मेरा भी मन ��ड़ा प्रफुल्लित हो गया।
अब तो इंतज़ार सिर्फ़ उस दिन का है, जब यही काल्पनिक महोदया फिर से अपनी ईमानदारी, संघर्ष और मुफ़लिसी पर लंबा-चौड़ा ज्ञान लिखेंगी। उस दिन मैं भी बिना एक शब्द लिखे, बस प्रेस कुमार वाला यही काल्पनिक किस्सा उनकी पोस्ट के नीचे टपका दूँगा।
बाकी... व्यंग्य की सबसे बड़ी ताकत यही है कि उसे समझाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। जिसे लग जाए, वही मुस्कुरा भी देता है... और कभी-कभी तिलमिला भी जाता है। 😊
उन्��ाव में बिजली विभाग जनता की सेवा में पूरी निष्ठा से जुटा है।
भीषण गर्मी में लोगों को “मानसिक मजबूती” देने के लिए रातभर बिजली की आंख मिचौली जारी है।
अब तक लगभग आधा सैकड़ा बार बिजली आ-जा चुकी है…
यानि नींद लेना अब आम आदमी की आदत नहीं, चुनौती बन चुकी है।
#धन्यवाद_बिजली_विभाग
रात के साढ़े चार बज चुके हैं…
जनता जाग रही है…
मच्छर जाग रहे हैं…
इन्वर्टर दम तोड़ने की कगार पर है…
लेकिन जिम्मेदारों की नींद शायद अभी भी “फुल सप्लाई” पर चल रही है।
लगता है अधिकारियों के इलाके में बिजली कटौती सिर्फ फाइलों में होती है।
जिस रात बिना बिजली क�� उनकी भी नींद उड़ेगी,
शायद उसी सुबह व्यवस्था भी जाग जाएगी।
#धन्यवाद_सरकार 🙏
यही है “उत्तम प्रदेश” का उज्ज्वल अनुभव।
#Unnao #UPPCL
#ElectricityIssue
#GroundReality
#Accountability
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@dmunnao
बस किसी तरह लंबे इंतज़ार के बाद बिजली कनेक्शन तो मिल ��या…
लेकिन साथ में लगा दिया गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर।
सवाल टेक्नोलॉजी का नहीं,
चॉइस और अधिकार का है।
जब अनिवार्यता खत्म हो चुकी,
तो विकल्प क्यों नहीं दिया गया?
माननीय ऊर्जा मंत्री जी से सीधा सवाल—
क्या उपभोक्ता की सहमति के बिना
प्रीपेड मीटर लगाना न्याय संगत है?
या फिर आपके दावे........
@CMOfficeUP @EMofficeUP @aksharmaBharat @mduppcl
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#SmartMeter #UPPower #ConsumerRights
तीन तारीखें…
तीन शिकायतें…
और सिस्टम अब भी “ध्यान” मोड पर।
21 मार्च को पैसा जमा।
26 और 29 मार्च तथा 6 apraul को शिकायत।
लेकिन abh तक न कनेक्शन… न मीटर… बस भरोसे की सप्लाई चालू है।
कागज़ों में “रामराज्य” दौड़ रहा है, ज़मीन पर फाइलें अब भी टहल रही हैं।
JE साहब का स्टीमेट भी एक “अनुभव” था,
और अब कनेक्शन — शायद “भविष्य की योजना” है।
सवाल छोटा है —
पैसा समय पर लिया गया,
तो सेवा “विचाराधीन” क्यों है?
या फिर…
“जांच जारी है” नाम की चादर इतनी लंबी हो गई है कि
हर लापरवाही उसमें आराम से ढक जाती है।
मंत्री जी,
आपके आदेश फाइलों में अच्छे लगते हैं…
ज़मीन पर उनका नेटवर्क शायद अभी नहीं आया।
#Unnao #UPPCL #ElectricityIssue #GroundReality #Accountability
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चार शिकायतें…
और सिस्टम अब भी “ध्यान” म��द्रा में।
21 मार्च — पैसा जमा।
26, 29 मार्च… और 6 अप्रैल और 16 अप्रैल — शिकायत पर शिकायत।
लेकिन न कनेक्शन…
न मीटर…
बस “मैसेज” का निस्तारण जारी।
कागज़ों में “रामराज्य” दौड़ रहा है,
ज़मीन पर फाइलें अब भी टहल रही हैं।
JE साहब का स्टीमेट — एक अनुभव,
और कनेक्शन — शायद “भविष्य की योजना”।
सवाल सीधा है —
जब पैसा समय पर ले लिया गया,
तो सेवा “लंबित” क्यों है?
या फिर…
यह वही सिस्टम है,
जहां काम नहीं,
सिर्फ “निस��तारण का मैसेज” मिलता है।
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लंबे इंतज़ार के बाद बिजली कनेक्शन मिला…
लेकिन साथ में लगा दिया गया स्मार्ट प्रीपेड मीटर।
सवाल टेक्नोलॉजी का नहीं,
चॉइस और अधिकार का है।
जब अनिवार्यता खत्म हो चुकी,
तो विकल्प क्यों नहीं दिया गया?
माननीय ऊर्जा मंत्री जी से सीधा सवाल—
क्या उपभोक्ता की सहमति के बिना
प्रीपेड मीटर लगाना न्यायसंगत है?
या फिर दावे........
#SmartMeter #UPPower #ConsumerRights
@MVVNLHQ@MVVNLUNNAO अगर स्टीमेट जमा करने के बाद
मीटर लगाने और कनेक्शन जोड़ने में
एक माह से अधिक का समय लगना ही “मानक प्रक्रिया” है,
तो सच में…
आपको, आपके विभाग को
और इस व्यवस्था की — जय हो!
क्योंकि यहां सेवा नहीं,
सब्र की परीक्षा ली जा��ी है।
#Unnao #UPPCL #ElectricityIssue #GroundReality
तीन तारीखें…
तीन शिकायतें…
और सिस्टम अब भी “ध्यान” मोड पर।
21 मार्च को पैसा जमा।
26 और 29 मार्च तथा 6 अप्रैल को शिकायत के साथ कनेक्शन की मांग...
लेकिन अभी तक न कनेक्शन… न मीटर… बस भरोसे की सप्लाई चालू है।
कागज़ों में “रामराज्य” दौड़ रहा है, ज़मीन पर फाइलें अब भी टहल रही हैं।
JE साहब का स्टीमेट भी एक “अनुभव” था,
और अब कनेक्शन — शायद “भविष्य की योजना” है।
सवाल छोटा है —
पैसा समय पर लिया गया,
तो सेवा “विचाराधीन” क्यों है?
या फिर…
“जांच जारी है” नाम की चादर इतनी लंबी हो गई है कि
हर लापरवाही उसमें आराम से ढक जाती है।
मंत्री जी,
आपके आदेश फाइलों में अच्छे लगते हैं…
ज़मीन पर उनका नेटवर्क शायद अभी नहीं आया।
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“सरकार दावे कर रही है, लेकिन हकीकत कुछ और है।
विद्युत विभाग के अधिकारी निर्देशों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
तारीख तय होने के बावजूद कनेक्शन नहीं हुआ।
अब सवाल यह है — जिम्मेदारी किसकी तय होगी?”
या फिर मनमानी करने वालों को जांच के नाम पर बचाने के प्रयास जारी रहेंगे।
@UPPCLLKO@MVVNLHQ@aksharmaBharat@EMofficeUP
,@dmunnao
#Unnao #UPPCL
#ElectricityIssue
दावा शिकायत निस्तारण का…
लेकिन 21 मार्च 2026 को नए बिजली कनेक्शन के लिए भुगतान जमा होने के बाद भी अब तक कार्रव��ई शून्य है।
मतलब नए कनेक्शन के लिए मीटर और अन्य औपचारिकता के लिए और प्रतीक्षा....
कई बार शिकायत (26 और 29 मार्च) की गई,
तारीखें भी बीत गईं,
लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन हैं।
मंत्री जी, आपके निर्देशों का क्या हुआ?
क्या विभागीय अफसरों के लिए आदेश सिर्फ कागज़ी औपचारिकता हैं?
या फिर
मनमानी करने वालों को “जांच” के नाम पर बचाने का सिलसिला ही जारी रहेगा?
@UPPCLLKO
@MVVNLHQ
@aksharmaBharat
दावा शिकायत निस्तारण का…
लेकिन 21 मार्च 2026 को नए बिजली कनेक्शन के लिए भुगतान जमा होने के बाद भी अब तक कार्रवाई शून्य है।
मतलब नए कनेक्शन के लिए मीटर और अन्य औपचारिकता के लिए और प्रतीक्षा....
कई बार शिकायत (26 और 29 मार्च) की गई,
तारीखें भी बीत गईं,
ल��किन जिम्मेदार अधिकारी अब भी मौन हैं।
मंत्री जी, आपके निर्देशों का क्या हुआ?
क्या विभागीय अफसरों के लिए आदेश सिर्फ कागज़ी औपचारिकता हैं?
या फिर
मनमानी करने वालों को “जांच” के नाम पर बचाने का सिलसिला ही जारी रहेगा?
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आप संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, कोई बात नहीं���आप अपना नंबर साझा कर दें, हम बात कर लेंगे।
लेकिन सवाल साफ है—संपर्क की आवश्यकता क्यों आ रही है?
प्रक्रिया पूरी होने के बाद सीधे मीटर लगाकर लाइन चालू कराना विभाग की जिम्मेदारी है।
कृपया औपचारिकता से आगे बढ़ते हुए कार्यवाही सुनिश्चित कराएं।
@UPPCLLKO@MVVNLHQ@MVVNLUNNAO आदरणीय “ऐसे औपचारिक निर्देशों से शिकायतों का निस्तारण संभव नहीं है।
यदि वास्तव में समाधान के प्रति प्रतिबद्धता है, तो पिछली तीन शिकायतों पर आपके इसी तरह दिए निर्देश पर कार्रवाई दिखनी चाहिए।”
तीन दिन… और अब भी सिर्फ इंतज़ार।
सरकार दावे कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत अलग तस्वीर दिखा रही है।
निर्धारित तारीख के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं हुआ।
विद्युत विभाग के अधिकारी निर्देशों को नजरअंदाज कर रहे हैं।
अब सवाल सीधा है — जवाबदेही कौन तय करेगा?
या फिर मनमानी करने वालों को “जांच” के नाम पर बचाया जाएगा?
शिकायत दर्ज हुए 3 दिन हो चुके हैं, लेकिन समाधान का कोई संकेत नहीं।
क्या यही है विभाग की कार्यप्रणाली?
@UPPCLLKO@MVVNLHQ@aksharmaBharat@EMofficeUP@dmunnao@MVVNLUNNAO
#Unnao #UPPCL #ElectricityIssueअगर
@UPPCLLKO@MVVNLHQ@MVVNLUNNAO क्या जो निर्देश आप लोग देते है उसकी समीक्षा नहीं करते है?
कारण आज तक तो X पर कोई सूचना न तो दी गई है और न ही किसी सक्षम अधिकारी स्तर से संपर्क किया गया है।
जय हो