मेरी बात पर मम्मी गाउन उतारते हुए मुस्कुराकर बोलीं- बेटे का तो नहीं पता लेकिन अभी तो बेटी ही अपनी मां को नंगी देखना चाह रही है।
मम्मी भी अब खुलकर कामुक बातें कर रही थीं।
मम्मी बोलीं- और टीशर्ट के नीचे? रात भर तुम दोनों कुछ भी करो लेकिन कम से कम सुबह तो कपड़े पहन लिया कर!
मैं हंसकर बोली- अरे, तो ऐसा भाई तुम्ही ने तो पैदा किया है जो अपनी बहन को कपड़े ही नहीं पहनने देता है तो मैं क्या करूं।
मम्मी का चेहरा देखकर और इतनी बातों के बाद मैं भी समझ चुकी थी कि उनके अंदर भी इंसेस्ट फैंटेसी है और अपने बेटे का खुद की तरफ आकर्षण उन्हें अच्छा लग रहा है और वासना भी बढ़ा रहा है।
मम्मी हंसकर बोलीं- जिस – जिस के साथ मजा आ रहा है सब बता दे। मुझसे क्या छुपाना!
अभी मैं कुछ कहती तभी मम्मी थोड़ा कमेंट में मुस्कुराकर फिर बोलीं- ससुर जी के साथ?
पहले तो मैं थोड़ा हिचकी लेकिन फिर मैं भी उसी तरह मुस्कुराते हुए बोली- हां उनके साथ भी!
मम्मी नाश्ता करते हुए मेरी तरफ देखकर थोड़ा मजा लेते हुए मुस्कुराकर बोलीं- वैसे इतनी जल्दी अपने ससुर को इतना काबू में कैसे कर लिया तुमने, कौन सा रस पिलाया है ज़रा मुझे भी बताओ।
मम्मी मेरी बात पर तेजी से हसने लगीं और फिर मजे लेकर हंसते हुए बोलीं कि- अच्छा, आजकल कुछ ज्यादा ही गौर कर रहा है वो मेरे ऊपर!
मम्मी को भी मजे लेते देख कर मेरे अंदर और हिम्मत आ गयी थी।
पापा बोले- इतने दिनों बाद आज तुम्हारा दूध पीने को मिल रहा है।
मैं उनका एक हाथ पकड़कर स्कर्ट के नीचे अपनी नंगी चूत पर रखते हुए हंसकर बोली- दूध ही पीएंगे या मलाई भी चाटेंगे।
पापा चौंकते हुए बोले- पैंटी नहीं पहनी है क्या?
मैं मुस्कुराकर बोली- इतने दिनों बाद अपने पापा से मिल rahi h
मैं मुस्कुराते हुए अपना एक हाथ तौलिये के अंदर डालकर उनका लण्ड पकड़ कर धीरे से आंख मारते हुए बोली- मम्मी किचन में आपका लंच तैयार कर रही हैं… तब तक कुछ मजा दे दूं आपको!
पापा हल्का सा हड़बड़ा गये और मुस्कुराते हुए बोले- मम्मी आ गयीं तो?
मैंने पूछा- कहां हैं पापा?
मम्मी बोलीं- बाथरूम में घुसे हैं नहाने के लिए… देख, हो सकता है निकल आए हों।
मैं बोली- ठीक है… मैं जा रही हूं… तुम आओगी।
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं- तू शुरू कर अपना काम मैं बीच में अचानक पहुंचूँगी तभी तो मजा आएगा।
फिर आंख मारते हुए बोली- वैसे भी एनर्जी बचाकर रख सुबह फिर मम्मी के साथ लिए। वैसे भी बहन के साथ बहुत मजे लिए हैं अब जितने दिन छुट्टी पर है यहां थोड़ा मम्मी के मजे ले।
मैं चल लेकिन तेरी तो लॉटरी लग गयी. अब तो जब तक यहां पर है बस मम्मी ही नज़र आएंगी तुझे… बहन को तो भूल ही जाएगा।सोनू बोला- अरे ऐसा कैसे हो सकता है दीदी… तुम्हीं तो हो जिसकी वजह से मुझे ये सारे सुख मिल रहे हैं.फिर वह आँख मारते हुए बोला- और आगे कुछ नये सुख भी मिलने वाले हैं.
दरअसल मम्मी और सोनू के बीच छुपाछिपी का खेल मेरी शादी के बाद से ही शुरु हो गया था।मैंने पहले ही बताया था कि सोनू मम्मी की चूची और गांड चोरी-चोरी देखता था।मम्मी भी इस बात को जानती थीं।सोनू ने बताया कि धीरे-धीरे मम्मी भी अकसर उसे उकसाने वाली हरकतें करने लगी थीं।
जैसी ही मेरी निगाह मिली मैं हल्का सा मुस्कुरा दी।
शायद मैं आँखों ही में मम्मी से कह रही थी कि देख लो कितना बड़ा है तुम्हारे बेटे का लंड… मैं तो चूस रही हूं… तुम्हें चूसना हो तो बताओ।
मैं और मम्मी अपने कपड़े पहनने के लिए कमरे में जाने लगीं तो सोनू भी हमारे पीछे-पीछे कमरे में घुसते हुए मम्मी की गांड पर को हाथ से सहलाते हुए हंसकर कमेंट में मुझसे बोला- यार, पीछे से तो मम्मी तुमसे भी ज्यादा सेक्सी लग रही हैं।
मैं हंसकर बोली- हां… ज्यादा चापलूसी मत कर मम्मी की…
तभी सोनू चूचियों से मुंह हटाकर पीछे हो गया और सीधा होते हुए धीरे से मम्मी से बोला- ये गाउन उतारो ना मम्मी!
मम्मी जिस कदर हवस की आग में जल रही थीं उस स्थिति में वो सब कुछ करने को तैयार थीं।
मम्मी चेयर से खड़ी हो गयीं और दोनों हाथों को पीछे ले जाकर एक झटके गाउन को निकाल दिया
तभी सोनू मम्मी की चेयर के सामने नीचे घुटनों के बल खड़ा हो और बिना किसी से कुछ बोले मम्मी की दोनों चूचियों को पहले हल्का-हल्का दोनों हाथों से सहलाया और दबाया फिर झुककर एक चूची को मुंह में लेकर चूसने लगा।
अब मम्मी खुद को रोक नहीं पायीं और उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर अपने बेटे के मोटे लण्ड को पकड़ लिया और धीरे-धीरे उसे सहलाने लगीं।
मैंने देखा कि कामुकता में मम्मी के हाथ हल्के-हल्के कांप रहे थे।
मम्मी एक दम अपने मुंह के पास लहरा रहे अपने बेटे के विशाल लंड को लार टपकाए देखने लगीं।
तभी सोनू अपना लण्ड एकदम मम्मी के होंठ के पास करते हुए उनके सिर पर हाथ रखते हुए धीरे से बोला- प्लीज, एक बार मुंह में तो लो ना मम्मी!
मम्मी अपनी चूत सहलाते हुए ललचायी निगाह से मुझे सोनू के लण्ड को चूसते देख रही थीं।
उनकी निगाह से साफ पता चल रहा था कि वो अपने बेटे के लण्ड को चूसना चाह रही थीं बस कह नहीं पा रही थीं।