@dsssbofficial Dsssb इतना देर से result क्यूँ देता है ? जबकि सबसे कम विद्यार्थी DSSSB का परीक्षा देते हैं। 6 महीने में पहले चरण का भी रिजल्ट नहीं निकाल पाए हैं आप? जबकि 6 महीने में Railway ने PT और MAINS दोनों पर��क्षा का रिजल्ट निकाल दिया , जबकि 50 लाख छात्र ने फॉर्म भरा l
कैसे घटिया लोग हैं ये सब, अतिक्रमण का सपोर्ट करते हैं l फिर जाम में फंस जाने के बाद गाली गलौज भी करते हैं l
एक तो सरकार हिम्मत करके अतिक्रमण मुक्त करवाने आगे आयी, इस कार्य में सभी सभ्य समाज के लोगों का सपोर्ट मिल रहा है l इस कार्य की प्रशंसा होनी चाहिए l
लेकिन कुछ है ��पके जैसे लोग जो वोट के लिए किसी के साथ सो जाते है, वो राज धर्म क्या जाने ?
यह कुंदन है, कट्टर सनातनी और नरेंद्र मोदी गिरिराज सिंह और नीतीश कुमार का भक्त था।
भाजपा के खिलाफ कोई भी कुछ कहता था तो कुंदन लड़ने लगता था।
लेकिन बिहार के बेगूसराय में कुंदन का घर और दुकान बुलडोज कर दिया गया।
कुंदन ने अपनी चुटिया काट दिया और अपना गमछा कुत्ते को पहना दिया। ज��� मेरा घर ही चला गया तो गमछा-चोटी रखकर क्या करूंगा।
कल से मैं देख रहा हूं, हमारी पार्टी के निर्णय को लेकर पक्ष और विपक्ष में आ रही प्रतिक्रियाएं....उत्साहवर्धक भी, आलोचनात्मक भी..! आलोचनाएं स्वस्थ भी हैं, कुछ दूषित और पूर्वाग्रह से ग्रसित भी।
स्वस्थ आलोचना��ं का मैं हृदय से सम्मान करता हूं। ऐसी आलोचनाएं हमें बहुत कुछ सिखाती हैं, संभालती हैं। क्योंकि ऐसे आलोचकों का मकसद पवित्र होता है।
दूषित आलोचनाएं सिर्फ आलोचकों की नियत का चित्रण करती हैं। दोनों प्रकार के आलोचकों से कुछ कहना चाहता हूं।
पहले स्वस्थ आलोचकों से:- आपने मेरे उपर परिवारवाद का आरोप लगाया है।
मेरा पक्ष है कि अगर आपने हमारे निर्णय को परिवारवाद की श्रेणी में रखा है, तो जरा समझिए मेरी विवशता को। पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम जरुरी ही नहीं अपरिहार्य था। मैं तमाम कारणों का सार्वजनिक विश्लेषण नहीं कर सकता, लेकिन आप सभी जानते हैं कि पूर्व में पार्टी के विलय जैसा भी अलोकप्रिय और एक तरह से लगभग आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा था। जिसकी तीखी आलोचना बिहार भर में हुई। उस वक्त भी बड़े संघर्ष के बाद आप सभी के आशीर्वाद से पार्टी ने सां��द, विधायक सब बनाए। लोग जीते और निकल लिए। झोली खाली की खाली रही। शुन्य पर पहूंच गए। पुनः ऐसी स्थिति न आए, सोचना ज़रूरी था।
सवाल उठाइए, लेकिन जानिए। आज के हमारे निर्णय की जितनी आलोचना हो, लेकिन इसके बिना फिलहाल कोई दूसरा विकल्प फिर से शुन्य तक पहुंचा सकता था। भविष्य में जनता का आशीर्वाद कितना मिलेगा, मालूम नहीं। परन्तु खुद के स्टेप से शुन्य तक पहुंचने का विकल्प खोलना उचित नहीं था। इतिहास की घटनाओं से यही मैंने सबक ली है। समुद्र मंथन से अमृत और ज़हर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को तो ज़हर पीना ही पड़ता है। वर्तमान के निर्णय से परिवारवाद का आरोप मेरे उपर लगेगा। यह जानते/समझते हुए भी निर्णय लेना पड़ा, जो मेरे लिए ज़हर पीने के बराबर था। फिर भी मैंने ऐसा निर्णय लिया। पार्टी को बनाए/बचाए रखने की जिद्द को मैंने प्राथमिकता दी। अपनी लोकप्रियता को कई बार जोखिम में डाले बिना कड़ा/बड़ा निर्णय लेना संभव नहीं होता। सो मैंने लिया।
पूर्वाग्रह से ग्रसित आलोचकों के लिए बस इतना ही:-
"सवाल ज़हर का नहीं था, वो तो मैं पी गया ।
तकलीफ़ उन्हें तो बस इस बात से है कि मैं फिर से जी गया ।।"
अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए - विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने। इंतजार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे। अपने को साबित करने का। करके दिखाएगा। अवश्य दिखाएगा। आपकी उम्मीदों और भरोसा पर खरा उतरेगा।
वैसे भी किसी भी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या उसके परिवार से नहीं, उसकी काबिलियत और योग्यता से होना चाहिए।
आप सबों का आभार 🙏
@IndiaPostOffice How to redeliver this Post ?
Please 🙏 help me,
Mera DV 24 ko hai, aur ishme Degree hai, ye abhi MA,RMS Bhawan main hai, ishe Please 🙏 Redeliver karwa dijiye Krishna Nagar Head Office main. Nhi to mera Zindgi kharab ho jayega.
@anarkaliofara यही तुम नहीं समझ पाती हो, कि वो लोग personally target करते हैं और tumlog पूरा समाज को गाली देने लगते हो l Aautosh कि पत्नी चुनाव ladi थी तो 1500 वोट विधानसभा में आया था l tumlog ने गाली दे दे के नेता बना दिया l
और मैं भूमिहार होके तुमको बुद्धि दे रहा हूं l और...
इतने जो विश्लेषक बन रहे है कि हार का यह कारण है , वह कारण है l
हार का सिर्फ एक कारण है, 10000 रुपया अकाउंट में देना, और चुनाव बाद 2 लाख देना l बस और कोई कारण नहीं है, बिहार के लोग वोट बेंच दिए l
@PratikVoiceObc@Kanchanyadav000@priyanka2bharti ठीक है भाई, प्रवक्ताओं बनाये रखो l मंदबुद्धि एक इंसान को गाली देना और एक समाज पर कमेन्ट करने का अन्तर नहीं पता है l इसीलिए 25 पर आए हो, अबकी बार 5 पर आओगे l
एक तरफ मोदी जी यादव भाई बोल रहा, दूसरे तरफ भूमिहार madarchod बोल रहे हो l कुछ अंतर पता चलाता है l
मैं @PrashantKishor भैया ��पसे आग्रह करता हूँ, कि अब बिहार आपके रहने लायक नहीं रहा है l सरकार के लोग अब आपको फंसा के या जान भी ले सकते हैं ।
और बिहारी को तो आप जानते हैं, ये अपने स्वाभिमान को मार देता है, तो आपकी स्वाभिमान का रक्षा क्या ही करेगा ?
इसीलिए भैया हमलोग को गिल्ट नहीं फील करवाए, और आप बिहार से चले जाएं l क्यूंकि हम ये गिल्ट ले के नहीं रहना चाहते कि, आपको कुछ हो जाये l
हम दोनों में बहुत चीज कॉमन है, हम भी नीति आयोग के प्र��जेक्ट छोडकर और घर वालों से लड़ाई कर के जनता और अपने क्षेत्र के लिए जिला परिषद में खड़ा हुऐ l लेकिन हार गए, और घर से भी रिश्ता खराब हो गया, जिसके कारण हर टाइप का संघर्ष करना पड़ा l हर तरह का नाकामी झेलने के बाद यहां तक कि मेरा Happy level (-90) हो गया था l
और अंत में फिर घरवाले ने साथ दिया, और सरकारी नौकरी लग गया l और अब पूरा परिवार और स��ाज खुश है l इसीलिए एक जिंदगी है, खुशी पूर्वक जिंदगी जिएं l आपने कोशिश की , और आप अपने नजर में कम से कम यह तो बोल सकते हैं कि हमने अपने जन्मभूमि को बदलने का कोशिश किया l
वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन, उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा ......