🙏 A beautiful journey of faith, devotion, and Buddhist art.
At the Mahabodhi International Meditation Centre, Choglamsar, Leh, Ladakh, renowned Nepali artist Kunsang Hyolmo and his dedicated team completed the creation of 1,000 Buddha statues with great patience, skill, and devotion.
May the merit of this noble work bring peace, wisdom, and benefit to all beings. 🙏🪷
🙏 A beautiful journey of faith, devotion, and Buddhist art.
At the Mahabodhi International Meditation Centre, Choglamsar, Leh, Ladakh, renowned Nepali artist Kunsang Hyolmo and his dedicated team completed the creation of 1,000 Buddha statues with great patience, skill, and devotion.
May the merit of this noble work bring peace, wisdom, and benefit to all beings. 🙏🪷
क्या सत्ता से सवाल पूछना अब पत्रकार के लिए खतरा बन गया है?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही 4PM की पत्रकार शाहीन ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शाहीन का आरोप है कि पुलिस उन्हें पकड़कर थाने ले गई और इस दौरान उनके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पुलिसकर्मियों को उनके नाम में ‘खान’ होने का पता चला, तो उनके प्रति व्यवहार और खराब हो गया।
ये गंभीर आरोप हैं और इनकी निष्पक्ष जांच ज��ूरी है। मामला केवल एक पत्रकार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से भी जुड़ा है।
4PM पहले भी दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पत्रकार के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई का उसकी रिपोर्टिंग या सवालों से कोई संबंध था या नहीं।
यदि शाहीन के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जवाब मिलना चाहिए—
क्या सत्ता से सवाल पूछने की कीमत एक पत्रकार को कथित पुलिस पिटाई के रूप में चुकानी पड़ेगी?
और इससे भी गंभीर सवाल—
क्या किसी पत्रकार के नाम में ‘खान’ होना उसके साथ अलग व्यवहार किए जाने की वजह बन सकता है?
लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं है। साथ ही, आरोपों की सत्यता स्थापित करने के लिए निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना भी उतना ही जरूरी है।
#Shaheen #4PMNews #DelhiPolice #RekhaGupta #PressFreedom
क्या सत्ता से सवाल पूछना अब पत्रकार के लिए खतरा बन गया है?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने की कोशिश कर रही 4PM की पत्रकार शाहीन ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
शाहीन का आरोप है कि पुलिस उन्हें पकड़कर थाने ले गई और इस दौरान उनके साथ मारपीट व दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब पुलिसकर्मियों को उनके नाम में ‘खान’ होने का पता चला, तो उनके प्रति व्यवहार और खराब हो गया।
ये गंभीर आरोप हैं और इनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। मामला केवल एक पत्रकार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता, सवाल पूछने के अधिकार और पुलिस की जवाबदेही से भी जुड़ा है।
4PM पहले भी दिल्ली सरकार और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाता रहा है। ऐसे में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पत्रकार के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई का उसकी रिपोर्टिंग या सवालों से कोई संबंध था या नहीं।
यदि शाहीन के आरोप सही पाए जाते हैं, तो जवाब मिलना चाहिए—
क्या सत्ता से सवाल पूछने की कीमत एक पत��रकार को कथित पुलिस पिटाई के रूप में चुकानी पड़ेगी?
और इससे भी गंभीर सवाल—
क्या किसी पत्रकार के नाम में ‘खान’ होना उसके साथ अलग व्यवहार किए जाने की वजह बन सकता है?
लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं है। साथ ही, आरोपों की सत्यता स्थापित करने के लिए निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना भी उतना ही जरूरी है।
#Shaheen #4PMNews #DelhiPolice #RekhaGupta #PressFreedom
✈️ अगर योग्यता के रास्ते में जाति आ जाए, तो सवाल सिर्फ एक छात्रा का नहीं—पूरे सिस्टम का है।
इस छात्रा का नाम प्रीति है। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली हैं और अनुसूचित ज���ति (SC) वर्ग से आती हैं। उन्होंने हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ सिविल एविएशन, करनाल में प्रशिक्षण लिया है।
प्रीति का आरोप है कि वह 2019 से फ्लाइंग ट्रेनिंग कर रही हैं, लेकिन लगभग सात साल बीत जाने के बावजूद उनकी ट्रेनिंग/आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि उनके बाद प्रशिक्षण शुरू करने वाले कई विद्यार्थी अपनी ट्रेनिंग पूरी करके एयरलाइंस में नौकरी तक पा च���के हैं, जबकि वह आज भी उसी संघर्ष में फँसी हुई हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि प्रीति स्वयं आरोप लगा रही हैं कि उनके साथ होने वाले इस व्यवहार के पीछे जातिगत भेदभाव एक कारण है।
यदि उनके आरोप सही हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष तथा पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। संबंधित संस्थान और अधिकारियों को भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इतने वर्षों से उनकी ट्रेनिंग पूरी क्यों नहीं हो पाई।
और यह घटना उन लोगों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है जो कहते हैं कि—
“अगर कोई दलित आर्थिक या शैक्षणिक रूप से सक्षम है, तो उसे आरक्षण की क्या जरूरत है?”
आरक्षण की बहस केवल गरीबी की बहस नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण आधार उस ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव तथा प्रतिनिधित्व की कमी से जुड़ा है जिसका सामना जाति के आधार पर लोगों को करना पड़ा है।
अगर समान योग्यता और मेहनत के ��ावजूद किसी व्यक्ति को उसकी जाति के कारण पीछे रखा जाता है, तो केवल आर्थिक स्थिति समान अवसर की गारंटी कैसे दे सकती है?
प्रीति के आरोपों की सच्चाई जाँच से सामने आनी चाहिए। यदि उनके साथ अन्याय हुआ है, तो उन्हें न्याय और अपनी ट्रेनिंग पूरी करने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
सवाल यह नहीं कि प्रीति किस जाति से आती हैं। सवाल यह है कि क्या हर योग्य विद्यार्थी को बिना भेदभाव के आगे बढ़ने का समान अवसर ���िल रहा है?
#JusticeForPreeti #EqualOpportunity #StopCasteDiscrimination #SocialJustice #EducationForAll
✈️ अगर योग्यता के रास्ते में जाति आ जाए, तो सवाल सिर्फ एक छात्रा का नहीं—पूरे सिस्टम का है।
इस ���ात्रा का नाम प्रीति है। वह हरियाणा के महेंद्रगढ़ की रहने वाली हैं और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से आती हैं। उन्होंने हरियाणा इंस्टिट्यूट ऑफ सिविल एविएशन, करनाल में प्रशिक्षण लिया है।
प्रीति का आरोप है कि वह 2019 से फ्लाइंग ट्रेनिंग कर रही हैं, लेकिन लगभग सात साल बीत जाने के बावजूद उनकी ट्रेनिंग/आवश्यक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। उनका कहना है कि उनके बाद प्रशिक्षण शुरू करने वाले कई विद्यार्थी ��पनी ट्रेनिंग पूरी करके एयरलाइंस में नौकरी तक पा चुके हैं, जबकि वह आज भी उसी संघर्ष में फँसी हुई हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि प्रीति स्वयं आरोप लगा रही हैं कि उनके साथ होने वाले इस व्यवहार के पीछे जातिगत भेदभाव एक कारण है।
यदि उनके आरोप सही हैं, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष तथा पारदर्शी जाँच होनी चाहिए। संबंधित संस्थान और अधिकारियों को भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इतने वर्षों से उनकी ट्रेनिंग पूरी क्यों नहीं हो पाई।
और यह घटना उन लोगों के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती है जो कहते हैं कि—
“अगर कोई दलित आर्थिक या शैक्षणिक रूप से सक्षम है, तो उसे आरक्षण की क्या जरूरत है?”
आरक्षण की बहस केवल गरीबी की बहस नहीं है। इसका एक महत्वपूर्ण आधार उस ऐतिहासिक और सामाजिक भेदभाव तथा प्रतिनिधित्व की कमी से जुड़ा है जिसका सामना जाति के आधार पर लोगों को करना पड़ा है।
अगर समान योग्यता और मेहनत के बावजूद किसी व्यक्ति को उसकी जाति के कारण पीछे रखा जाता है, तो केवल आर्थिक स्थिति समान अवसर की गारंटी कैसे दे सकती है?
प्रीति के आरोपों की सच्चाई जाँच से सामने आनी चाहिए। यदि उनके साथ अन्याय हुआ है, तो उन्हें न्याय और अपनी ट्रेनिंग पूरी करने का निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए।
सवाल यह नहीं कि प्रीति किस जाति से आती हैं। सवाल यह है कि क्या हर योग्य विद्यार्थी को बिना भेदभाव के आगे बढ़ने का समान अवसर मिल रहा है?
#JusticeForPreeti #EqualOpportunity #StopCasteDiscrimination #SocialJustice #EducationForAll