परसो एग्जाम देने ट्रेन से लखनऊ जा रहा था और पूरी slipper (S1-S8) और जनरल डिब्बे में सब कोई भैया अखिलेश यादव का ही राम मंदिर का चढ़ावा चोरी का सुन रहे थे यहां तक कि सेंटर पर जो इनविलेटर थे वो भी सब राम मंदिर पर ही चर्चा कर रहे थे और सिर्फ एक नाम अखिलेश भैया का ही है चर्चा में।
आज बलिया में प्रखर समाजवादी चिंतक एवं वाक् योद्धा स्व. श्री राम गोविन्द चौधरी जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उमड़ा जन समूह इस बात का प्रतीक है कि चौधरी जी ने हर ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ के लिए ‘सामाजिक न्याय’ लाने का जो संघर्ष किया उसे पूरा करने के लिए सिर्फ़ हम ही नहीं उप्र की लाखों-करोड़ों जनता साथ है। हम सब पीडीए मिलकर ‘सामाजिक न्याय का राज’ लाएंगे जिससे भेद मिटेंगे, सौहार्द आएगा और हमारा देश ‘बंधु-राष्ट्र’ बन पाएगा।
आज मुझे बलिया से नया बल मिला है।
बागी बलिया की हुंकार
परिवर्तन होगा इस बार
@Kam40_ लिंकन साहब ये न बोल दे एलन मस्क को की हमको बराबरी का हिस्सा चाहिए हम देश की पुरानी पार्टी है 😂 नहीं तो लगा के देख लो starlink को कोई नहीं पूछेगा 😂😂
उस दिन 6 अक्टूबर को दिल्ली में जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव इंडिया गठबंधन के धरना प्रदर्शन में शामिल हुए थे,
तब ना सिर्फ उनकी खुद की तबीयत खराब थी, बल्कि उनकी बेटी अदिति यादव भी अस्पताल में एडमिट थीं,
लेकिन उसके बावज़ूद वो धरना प्रदर्शन में शामिल हुए, जो काबिल-ए-तारीफ है।
🔥 चेहरे पर संघर्ष, माथे पर विश्वास और दिल में जनता के लिए सम्मान… ❤️🚩
जो सत्ता से नहीं, जनता के दिलों से जुड़ता है, वही इतिहास के पन्नों में अपनी पहचान छोड़ता है।✊
लक्ष्य सामाजिक न्याय, संकल्प PDA और विश्वास जनता पर! ♥️
जय संविधान | जय समाजवाद | जय अखिलेश यादव 🚩
🔥 हमारी लड़ाई कुर्सी के लिए नहीं, हर चेहरे की मुस्कान और सम्मान के लिए है! ❤️✊
नफ़रत नहीं, भाईचारा चाहिए।
भेदभाव नहीं, अधिकार चाहिए।
हर वर्ग को सम्मान, हर युवा को अवसर चाहिए! 🚩
❤️ PDA की उम्मीद, सामाजिक न्याय का संकल्प ❤️
जय संविधान | जय समाजवाद | जय अखिलेश यादव 🚲
🔥 हमारी लड़ाई कुर्सी के लिए नहीं, हर चेहरे की मुस्कान और सम्मान के लिए है! ❤️✊
नफ़रत नहीं, भाईचारा चाहिए।
भेदभाव नहीं, अधिकार चाहिए।
हर वर्ग को सम्मान, हर युवा को अवसर चाहिए! 🚩
❤️ PDA की उम्मीद, सामाजिक न्याय का संकल्प ❤️
जय संविधान | जय समाजवाद | जय अखिलेश यादव 🚲
🔥 चेहरे पर संघर्ष, माथे पर विश्वास और दिल में जनता के लिए सम्मान… ❤️🚩
जो सत्ता से नहीं, जनता के दिलों से जुड़ता है, वही इतिहास के पन्नों में अपनी पहचान छोड़ता है।✊
लक्ष्य सामाजिक न्याय, संकल्प PDA और विश्वास जनता पर! ♥️
जय संविधान | जय समाजवाद | जय अखिलेश यादव 🚩
मानवता की रक्षा है सामूहिक ज़िम्मेदारी
जब भेदभाव के शूल का चुभना रहे जारी
अपमानों का बने निशाना दुखी माँ-नारी
युवाओं के सपनों पर तलवार चले दुधारी
जब सत्ता करे अत्याचार वंचितों पर भारी
तब तू उठा त्रिशूल और बन सुदर्शनधारी!
आज अयोध्या की पावन धरती पर कलियुग के ताप को हरकर इहलोक को संवारने वाली और परलोक को सुधारने वाली ‘भागवतकथा’ का अमृतपान करने के सौभाग्यशाली क्षण।
बचपन में किसी ने बताया था कि ‘जो भव के बंधन से मुक्त कराए वही भागवत।’ और ‘जो व्यथा हरे, वही कथा’। आज का समय क्योंकि बंधनों और व्यथाओं से भरा है - अहंकार के बंधन, सत्ता के बंधन, जाति के बंधन, भेदभाव के बंधन, वैमनस्य के बंधन, ऊँच-नीच के बंधन, छुआछूत के बंधन, शुद्धि-अशुद्धि के बंधन और भी अनेक प्रकार के सामाजिक और मानसिक बंधन, इसीलिए भागवतकथा का महत्व और प्रासंगिकता आज और भी बढ़ गई है।
कथा सिर्फ कहानी नहीं होती जो मनोरंजन करती है, कथा तो ‘मनोवर्द्धन’ करती है। कहानी मन को बहलाती है, कथा मन और मनोबल को बड़ा बनाती है। कहानी के अंत होने पर आनंद का क्षणिक अनुभव होता है, जबकि कथा खत्म होने पर उत्तरदायित्व की अमिट गहरी अनुभूति होती है। कथा के मूल संदेश को जीवन में उतारने से ही कथा सुनने का पुण्य प्राप्त होता है।
भागवतकथा इसीलिए कथा है, कहानी नहीं। वो सिर्फ कृष्ण जी के बारे में नहीं बताती, वो हमें कृष्ण जी जैसा बनने के लिए हमें प्रेरित करती है।
भागवतकथा वाचन-श्रवण से बढ़कर, व्यक्तिगत प्रेम और सामाजिक समानता का संविधान है।
भागवतकथा सिखाती है - प्रेम ही सबसे बड़ा परमार्थ है।
भागवतकथा दया और करुणा का पाठ पढ़ाती है।
भागवतकथा भेदभाव मिटाकर समानता सिखाती है।
भागवत कथा की अनंत सीखों में से एक विशेष सीख ये भी मिलती है कि ‘प्रेम, दया, अपनापन’ ही सबसे बड़ा मानव-धर्म है।
मेरे लिए व्यक्तिगत रूप से, भागवतकथा का सबसे बड़ा सबक यही है कि ‘भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ’।
कृष्ण जी ने सिखाया कि सत्ता आती-जाती
आज के समय में, प्रेम और समानता के महाकाव्य को हम ‘संविधान’ कहते हैं। इसीलिए हमें संविधान की रक्षा करनी है।
मुझे लगता है भागवतकथा ‘शोषित, पीड़ित, वंचित के उद्धार’ का सबसे बड़ा स्रोत है। इसमें 'राज' का मतलब शासन नहीं, सबको साथ लेकर चलना है।
मेरे लिए भागवतकथा ‘सामाजिक न्याय के राज’ के उदाहरणों का एक संकलन है, जिसमें विदुर जी भी हैं, सुदामा जी भी हैं और कुब्जा भी। इन चरित्रों के माध्यम से मैंने तो यही सीखा कि किसी भी उपेक्षित, विपन्न व उपेक्षित को उसके तिरस्कृत होने या वंचित होने के भाव से मुक्त करना ही सामाजिक न्याय है।
साथ ही जिस ‘बंधु-राष्ट्र’ बनाने का संकल्प हम लेकर चले हैं, भागवतकथा उसका प्रकाश स्तंभ बनकर हमें राह दिखाती है।
भागवत कथा सदियों से चलती चली आ रही है और सदियों तक चलेगी क्योंकि नफ़रत और भेदभाव हर युग में होंगे, तो कृष्ण जी की चेतना भी प्रेम, दया और अपनापन से उनका अंत करने के लिए विविध रूप में सक्रिय होती रहेगी व मानवता को चिरायु होने का वरदान देती रहेगी।
‘भागवतकथा’ का यही है सार
’प्रेम’ ही है सबसे बड़ा संस्कार
’दया’ से ही पूर्ण होता ये संसार
’अपनापन’ जीवन का आधार
‘भागवतकथा’ का यही है सार
’सामाजिक-न्याय’ हो आधार!
’मिटें भेद सब, हो सबका उद्धार
निर्मूल हो ‘पीड़ा, दुख, अपमान’
’शोषित-वंचितों’ का हो उत्थान
बनके ‘बंधु-राष्ट्र’ करें कल्याण
‘भागवतकथा’ का यही है सार
अमर नहीं होता किसी का राज
अंत में मारा ही जाता ‘अहंकार’
और होता है पापियों का संहार
‘भागवतकथा’ का यही है सार
नाथवानी के नाम पर भाई लोग छाती पीट रहे हैं, जैसे राजनीति का पूरा हिसाब-किताब बस एक टिकट से तय होता हो
अरे भाई अखिलेश यादव राजनीति में नए खिलाड़ी नहीं हैं कि बिना सोचे कोई चाल चल देंगे
फैसला पसंद नहीं है तो सवाल करो खुलकर करोलेकिन हर फैसले को समाजवादी विचारधारा से गद्दारी’ बताना कौन सा न्याय है?
राजनीति में कभी मोहरा आगे चलता है, कभी निशाना पीछे होता है हर चाल का मतलब उसी दिन समझ आ जाए, जरूरी नहीं
अखिलेश जी ने फैसला लिया है तो उसकी जिम्मेदारी भी वही उठाएंगे।
हम सवाल करने वालों से भी कहेंगे पहले पूरी बिसात देखो, फिर चाल पर फैसला सुनाओ
सपा की लड़ाई लंबी हैइसलिए हर कदम को सिर्फ आज के चश्मे से मत देखिए
अखिलेश @yadavakhilesh जी पर भरोसा रखिएसवाल भी रखिए लेकिन अफवाहों के सहारे फैसला मत सुनाइए