‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएं मिली हैं। छठी-सातवीं सदी की बताई जा रहीं इन ताम्र पट्टिकाओं से उस समय की शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
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नई दिल्ली में आज जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधियों से मुलाकात का अवसर मिला। आदिवासी समाज के लिए इनका समर्पण भाव बहुत सराहनीय है। इस दौरान जनजातीय समुदायों के विकास और उनके सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
निरंतर प्रयास, धैर्य और दृढ़ संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। आज देशवासी इसी भावना से भारतवर्ष को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रहे हैं।
यो यमर्थं प्रार्थयते तदर्थं चेह ते क्रमात् ।
अवश्यं स तमाप्नोति न चेदर्थ��न् निवर्तते ।।
सच्चा ज्ञान देश, समाज और समस्त मानवता के कल्याण क�� मार्ग प्रशस्त करता है। इसलिए यह जरूरी है कि हमारा ज्ञान और हमारे कर्म पूरी मानवता के लिए प्रेरणा बनें।
आत्मा शुद्धः सदा नित्यः सुखरूपः स्वयम्प्रभः।
अज्ञानान्मलिनो भाति ��्ञानाच्छुद्धो भवत्ययम्।।