जब एक नया राष्ट्र दासता त्याग, स्वतंत्र और संप्रभु अस्तित्व में आता है, तब उसे अपनी आकांक्षाओं, संस्कृति और सभ्यता के मूर्त रूप में एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता होती है, जो उसकी जनसंख्या एवम् भौगोलिक, सांस्कृतिक तथा पारंपरिक विविधता का प्रतिनिधित्व करे। चुनी हुई संसद के जनप्रतिनिधि उसका वैयक्तिक रूप हैं परंतु यह जो संसद आप देख रहे हैं, वह अपने दासत्व को पीछे छोड़, पचहत्तरवें वर्ष में उन्हीं मूल्यों का स्थूल रूप है, जिसकी सूक्ष्मता से हम सब अवगत हैं।
यह केवल लाल रंग की शिला, हरे रंग के कार्पेट और राष्ट्रीय पक्षी मोर के पंखों को प्रतिबिम्बित करता एक भवन मात्र नहीं, इसमें सम्राट अशोक के धर्म चक्र से ले कर चोल राज��ओं के सेंगोल और राजपूत राजाओं के भवन निर्माण शैली की झलक दिखती है। जहाँ से विदेशी हमारी दासता के लिए कानून रचते थे, वहीं से बैठ कर सत्ता चलाना हमारी विवशता रही होगी, पर आज उभरते भारत की वैश्विक स्थिति नए संसद की छत पर विराजमान चार गरजते सिंहों की भाँति है कि हमारी दृष्टि चहुँदिस है, हम तैयार हैं इसकी रक्षा हेतु।
यह हमारी स्वतंत्रता की क्रांति और उसके परिणाम का एक संग्रहालय भी है और प्रत्यक्�� अभिलेखागार भी। यह हमारी राष्ट्रीयता की घनी, विस्तृत जड़ भी है और भविष्य के भारत का नवपल्लवन भी। यह हमारा आत्मबोध भी है, इतिहासबोध भी।
आधुनिकता और परंपरा के समायोजन को चिह्नित करता यह भवन भविष्योन्मुख है क्योंकि आज के नए भारत को पुराने संसद की सीमाएँ सँभालने में अक्षम हैं। यह भवन भव्य है, उत्कृष्ट है और भारतीय स्थापत्य कला का एक अप्रतिम नमूना है।
ना मैं कभी मनीष कश्यप से मिला हूँ और ना ही मैं मनीष को जानता हूँ
लेकिन मनीष के ये आँसू जो एक अंगार है उन्होंने अंदर तक हिला दिया है।
मनीष का गुनाह ये है उसने एक सत्ता को हिलाया है
मनीष जब तक बाहर नही आता हम बिहार के जंगल राज की दिल्ली में बैठ कर पोल खोलेंगे लेकिन छोड़ेंगे नही
मेरे बिहारवासियों मैं जा रहा हूँ, तुम मेरी माँ की आंखों में आँशु मत आने देना ।।
आत्मसमर्पण करने से पहले मनीष कश्यप ने अपनी माँ के साथ बिहार के लोगों से की भावुक अपील ।।
@Mksonofbihar
#ManishKasyap#ManishKashyap#ISupportManishKasyap
वो क�� बागेश्वर धाम के खिलाफ थे , आज मनीष कश्यप के खिलाफ है
सच तो ये है कि जो धर्म एवम संस्कृति को आगे बढ़ाए वो गद्दार उसके खिलाफ है
#ReleaseManishKasyap
Remembering our valorous heroes who we lost on this day in Pulwama. We will never forget their supreme sacrifice. Their courage motivates us to build a strong and developed India.