"E10 वाली मेरी गाड़ी का फ्यूल पंप इस महीने खराब हो गया,
क्योंकि मैं लगातार E20 पेट्रोल इस्तेमाल कर रहा था, जबकि गाड़ी सिर्फ 11,500 किलोमीटर ही चली है।
डीलरशिप ने इसे बदलने का खर्चा ₹9,608 बताया है, जिसमें नया फ्यूल पंप और फ्यूल फ़िल्टर शामिल है"
X यूजर ने शेयर किया अपना दर्द.
#E10 #E20 #Ethanol #Ethanolblending #NitinGadkari
#Live
होटल की गुणवत्ता भी अच्छी है।
बिल देखें तो पता चलता है कि यह सुबा ग्रुप की होटल का है।
अयोध्या में इस ग्रुप के तीन होटल हैं। तीनों की श्रेणी अलग-अलग है-
1. क्लिक होटल नारायण: इसका किराया लगभग ₹3,500 से ₹4,400 प्रति रात है।
यहाँ के शाकाहारी रेस्टोरेंट में दो लोगों के भोजन का खर्च ₹600–₹900 आता है।
2. क्लिक क���ेक्शन: इसका किराया ₹3,500 से ₹4,600 के बीच है।
रेस्टोरेंट में दो लोगों के खाने का अनुमानित खर्च ₹700–₹1,000 है।
3. क्वालिटी इन रामा: यह एक प्रीमियम होटल है, जिसका किराया ₹6,000 से ₹7,500 प्रति रात है।
यहाँ के बेहतरीन रेस्टोरेंट में दो लोगों के भोजन का खर्च ₹1,000–₹1,500 तक आता है।
बाक़ी बिल पर मोबाइल नंबर भी दिख रहा है।
फ़ोन कर पूछा जा सकता है कि टमाटर, खीरे, प्याज़ और गाजर के चार-पाँच टुकड़े, दो नींबू और दो हरी मिर्च के इतने पैसे क्यों लिए जा रहे हैं जिसमें जीएसटी भी शामिल है।
“इथेनॉल का माइलेज 30 फ़ीसदी कम होता है”
तेल कंपनी BPCL के बड़े अधिकारी अनुराग सरावगी का ये बयान ANI हैंडल से डिलीट करा दिया गया है!
किस लॉबी ने डिलीट कराया @nitin_gadkari जी?
(Video posted by @AjitSinghRathi)
प्रकृति के इस सूखे के संकेत को गंभीरता से लें, पानी की बरबादी रोकें 👇
जैसे कि इस साल जामुन की बंपर बहार
इस साल बाजार में दिख रहे हैं।
इतने जामुन मैंने पिछले दो तीन दशकों में कभी नहीं देखे।
जहां भी देखिए जामुन के पेड़ों के नीचे जामुन के ढेर लगे हैं।
जिन पेड़ों प�� पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से लदे हुए हैं।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते थे कि.....
"जिस गर्मी में जामुन ऐसे ढेरों गिरते हैं, उस साल सूखा पड़ता है।"
बुजुर्गों का ये पारंपरिक ज्ञान वनस्पति शास्त्र के हिसाब से बिल्कुल सटीक है। विज्ञान में इस प्रक्रिया को "Masting" या "Stress Fruiting" कहते हैं।
पेड़ों के खुद को खत्म करके ज्यादा से ज्यादा फल देने के इस आखिरी प्रयास को "Suicide Fruiting" या "Bumper Crop" भी कहा जाता है।
विज्ञान इसके बारे में कह���ा है कि....
Survival Instinct यानी अस्तित्व की लड़ाई
जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की कमी महसूस होती है, तब पेड़ "Defense Mode" में चला जाता है। अपनी प्रजाति को जिंदा रखने के लिए पेड़ अपनी सारी ताकत फल बनाने में लगा देता है।
और नए पत्ते-टहनियों पर रोक लग जाती है।
ऐसे साल में पेड़ नई कोंपल निकालना बंद कर देता है।
ऊर्जा बचाकर सिर्फ जामुन का उत्पादन बढ़ाता है।
इसीलिए पिछले साल कम फल वाले पेड़ भी इस बार लदे हैं।
इस भविष्यवाणी और सूखे से रिश्ता देखें तो हमारे बड़े बूढ़ों का अनुभव सही है, क्योंकि पेड़ मौसम के बदलाव को पहले पहचान लेते हैं।
जामुन की जड़ 'Taproot' बहुत गहराई तक जाती है।
जब भूजल स्तर बहुत नीचे जाता है, तभी जड़ों को तनाव महसूस होता है।
ये तनाव ही आने वाले सूखे का संकेत है।
सीधी बात सी बात यह है कि,
जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं कर रहा, बल्कि खुद का बलिदान देकर अगली पीढ़ी को जन्म दे रहा है।
यहां हमारे पूर्वजों ज्ञान अनेकों पीढ़ियों का अनुभव और विज्ञान यहां एक बिंदु पर मिलते हैं।
इस साल जामुन का स्वाद लें, पर प्रकृति के इस 'सूखे' के संकेत को गंभीरता से देखें।
पानी संभलकर इस्तेमाल करें।।
अयोध्या में किसान ओमप्रकाश ��िंह द्वारा उगाए गए दुनिया के सबसे महंगे जापानी मियाज़ाकी आम का पहला पका फल भगवान को भोग स्वरूप अर्पित किया गया।
करीब 2.5 से 3 लाख रुपये प���रति किलो कीमत वाले इस दुर्लभ आम को संतों के मंत्रोच्चार के बीच भगवान के चरणों में समर्पित किया गया। किसान ने दो वर्ष पहले प्रयोग के तौर पर इसका पौधा लगाया था, जो अयोध्या की जलवायु में सफलतापूर्वक फल देने लगा है। आस्था, कृषि नवाचार और दुर्लभ फल उत्पादन का यह अनोखा संगम राम नगरी में चर्चा का विषय बना हुआ है.
#Ayodhya | #LordRam | #Ayodhya | #AajTakSocial | #ATCard
ऑटोमोबाइल सेक्टर और भारतीय सरकार ने…
भारतीय ग्राहकों के साथ बहुत बड़े बड़े छल किए है…
सबसे पहले बिना चार्जिंग सेटअप के लोगों को इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ बेच दी…
अब सारे ग्राहक पछता रहे हैं…
फिर बेहद कम CNG पंप के बावजूद ग्राहकों को CNG गाड़ियाँ बेच दी…
CNG पंपों पर घंटों लाइनें लगी रहती है…
पेट्रोल इं��न वाली जो गाड़ियाँ E20 फ़्यूल के लिए बनी ही नहीं है…
उनमें ज़बरदस्ती E20 फ़्यूल डाला जा रहा है…
जिससे गाड़ियों की मेंटेनेंस बढ़ गई, पावर और माइलेज कम हो गई…
B6 इंजन की अनिवार्यता करके दस साल पुरानी डीज़ल गाड़ियों को अवैध घोषित कर दिया…
प्रदूषण रोकने में सरकारें नाकाम रही है…
और ख़ामियाज़ा गाड़ी मालिकों को भुगतना पड़ रहा है…
अमेरिका और युरोपीय देशों में बीस बीस साल बाद भी गाड़ियाँ मज़े से ��लती है और सेकेंड हैंड बिकती भी है…!!
भारतीय ग्राहकों हर बार छले गए है…
हर तरफ़ से छले गए है…!!!
माँ के नाम पर पेड़ लगाएँ, मालिक के नाम पर पेड़ काटते चलें। इस देश की बुनियाद में फ्रॉड लोगों ने अपनी ईंटे लगा दी हैं। ख़बरें आएंगी, जाएंगी। अब हेडलाइन ऐसे लिखा कीजिए कि 6000 पेड़ों को काट दिया गया, धरती हल्की हो गई। ये पेड़ विकास का रास्ता रोक रहे थे।
राजकुमार भाटी:- मनु स्मृति कहती है कि महिला को कभी स्वतंत्र नहीं छोड़ना चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी:- श्लोक बताइए, श्लोक भाई। कुछो नहीं आता
राजकुमार भाटी:- बता दिया तो? बोल दिया तो?
सुधांशु त्रिवेदी:- बताइए तो
राजकुमार भाटी:- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता। लो बोल दिया…..
सुधांशु त्रिवेदी:- अरे इसमें कहाँ, इसमें तो पूजने की बात है!
मैं अब राजकुमार भाटी जी को क्या कहूं? हर जगह तो ये अर्थ पर अनर्थ करते रहते हैं….!
अपर्णा यादव को खुलकर रो लेना चाहिए!! आंखों में जो सूनापन है, पीड़ा है उसका बह निकलना ही उ��ित है!! मन पाषाण हो गया है तो ग्लिसरीन लगा कर रोइए..कुछ नहीं तो आंख खो�� लीजिए तब दहाड़ा मार कर रोइए अपर्णा यादव! मगर रोइए!! *खुद को रोते दिखाना* बहुत जरूरी है!!
यूं जिम्मेदारियों के आगे तन कर खड़ी रहेंगी तो लोग कहेंगे "देखो छिनाल रोई भी नहीं!! महत्वाकांक्षी कहीं की!! खा गई पति को!!निगल गई परिवार!!
लोगों को नहीं दिखेगा पीड़ा, संघर्ष, मौन! नहीं दिखेगा प्रतीक यादव ने जब सोशल मीडिया पर खुलकर अपने रिश्ते के बारे में लिखा तब भी आप अडिग खड़ी थी, रिश्ता बचाने को!! विदेशों तक प्रतीक यादव के साथ जाती थी इलाज के लिए!! कोई अखिलेश यादव या डिम्पल यादव नहीं जाते थे..उसके बाद प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पर आपके साथ खूबसूरत पिक्चर्स भी शेयर की और बताया सब ठीक है! पर उससे क्या फर्क पड़ता है? आप होंगी निशाने पर!! मुलायम सिंह ने अपनी। विरासत अखिलेश यादव को सौंप दी तब परिवार नहीं टूटा? जब अपर्णा को यथोचित स्थान समाजवादी पार्टी में नहीं मिला तब परिवार नहीं टूट रहा था? मगर जब अपर्णा यादव सपा के "तुष्टिकरण की राजनीति को लात मार" निकल गई तब परिवार टूट गया! आपको भी " या मौला या अल्लाह" करना था!! क्यों गौ सेवा करने गई?
क्या हुआ जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने किसी फाउल गेम से इंकार किया!! आप योगी जी के करीब हैं, यही गले की फांस है!! चाहे अनुजा के रूप में हों पर उसस�� क्या? यह राजनीति और समाज है अपर्णा जी, आपको रोना ही होगा!! दिखावे के लिए..या स्त्री कमजोर है, यह साबित करने के लिए!!