Case चल रहा है, फिर भी मैं Case पर टिप्पणी कर रहा हूँ। तो इससे आपको पता चलना चाहिए कि मेरी मनःस्थिति कैसी है। आपको लग रहा है कि मैं अत्यंत तनाव में हूँ, मैं कुछ नहीं करूँगा।
But मैं बैठा हुआ हूँ, live में, वही कर रहा हूँ जो प्रतिदिन करता हूँ और आपके बापों की, नए बापों की, पुराने बापों की, पिलाई मैं इसी तरह से करता रहूँगा।
हर दिन का एक ही काम है: पुलिस से उलझना, खड़े हो कर गर्दन झुकाए नाक से नाक सटाने की कोशिश करते हुए रील कटवाना और अपने समर्थकों में चैड बनना।
सत्य यह है कि यह भाजपा का ही जिन्न है, जिसे ये लोग बोतल में नहीं ला पा रहे हैं।
बेचारा चटुआ सेल! आधा दिन भी नाच न सका और ABVP ने अगले ही दिन IIT बॉम्बे के प्रोफेसर के मोदी एक्ट में फँसने पर हग दिया।
नियति देखो! हमने तो केवल UGC से आरंभ किया था, पर NEET, CBSE सब होता चला गया। मोदी एक्ट में भी अब संशोधन नहीं, इसको हटाना ही ए��मात्र विकल्प होना चाहिए।
ये लोग अवसर मिलते ही देश बेच देंगे। ये सावरकर, विवेकानंद को बेसमेंट के कोने में रख कर अम्बेडकर-फुले पर नाच रहे हैं। इनका मंत्री युवाओं को ‘चैलेंज’ दे रहा है इनोवेट करने को।
चार पैसे के लिए ये भी कुछ दिन में दलित-दलित का बाजा बजाने लगेंगे। आरक्षण पर दर्शन लिखने वाले पद पाते ही पलटी मार चुके हैं। ये शीघ्र ही अपने बिचला नाम फुले कर लेंगे। देखते जाइए।
देखिए, जब आपकी हार हो जाए तो सीधे मुँह छुपा कर पराजय स्वीकार लेनी चाहिए।
मैं स्वीकारता हूँ कि मेरी जी-तोड़ मेहनत के बाद भी, हर कॉलेज में भटकते हुए, लोगों की छोटी-छोटी जनसभाएँ करते हुए, मैंने ABVP को हराने के लिए जी-तोड़ परिश्रम किया, पर मेरे हाथ में परिणाम के दिन ठुल्लू पकड़ा दिया गया।
कोई बात नहीं, राहुल गाँधी से क्षमा चाहता हूँ कि आपकी बड़ाई में इतने लेख लिखे, लाइव किए; ने���ाजी अखिलेश भैया से क्षमा माँगता हूँ कि आपका भेजा हुआ पैसा तो समय से मिलता रहा, परंतु मैं एक नकारा इंफ्लुएंसर साबित हो गया। कृपया आप लोग मुझ पर और दाव ना लगाएँ!
तमिलनाडु में रह कर पेरियार से बैर नहीं कर सकते। चरणवंदना करनी ही होगी। हिन्दू हृदय सम्राटों के पसीने निकल जाते हैं। पर हाँ, भाजपा समर्थक कटाक्ष न करें, भाजपा इससे दे कद��� आगे है इनकी वंदना करने में।
संघ के बौद्धिको में गाए और दोहराए जाने वाले वाक्य:
१. वृत्तपत्र पर नाम छपेगा, पहनूँगा स्वागत समुहार,
छोड़ चलो ये क्षुद्र भावना, हिन्द राष्ट्र के तारणहार,
कंकड़-पत्थर-बन-बन हमको, राष्ट्र-नींव को भरना है ,
ब्रह्मतेज के क्षात्रतेज के, अमर पुजारी बनना है ...
२. संघ का स्वयंसेवक प्रसिद्धि परामुख होता है
३. मंच, माला, माया, मीडिया, माइक इन पाँचों ‘म’ से दूर
जाने कहाँ… गए वो दिनऽऽऽ
अलीगढ़ में करणी सेना जिला अध्यक्ष सचिन राघव की सड़क पर पिटाई की गई, कपड़े फाड़े गए, सड़क पर परेड निकाली गई!
"जय भीम" के नारे भी सुनाई पड़ रहे हैं!
मतलब अब यहाँ लड़का राजपूत है, और मारने वाले संवैधानिक शोषित, इसलिए कुछ नहीं होग��!
हां, अगर जाति उलट होती तो अबतक SC/ST एक्ट लग गया होता!
अब ऐसे ही सवर्णों के साथ खुलेआम सामाजिक न्याय हो रहा है! हिंदू एकता बन रही है!
और हां,
Before I forget,
Happy Birthday to Priest King 💐💐
भीम आर्मी के गुंडों ने अलीगढ़ में सचिन राघव को पीटा, हत्या का प्रयास किया, अपमानित किया। और अब पुलिस स्टेशन भी घेर कर बैठ गए हैं। क्या सवर्णों की यही स्थिति बनी रहेगी? क्या सवर्ण होना और सड़क पर निकलना भी अपराध हो गया है?
हमारी बहन-बेटियों पर हर दिन टिप्पणी होती है, सरकार सोई रहती है। अब भीड़ बना कर घेरा और पीटा जा रहा है। ध्यान रहे, जिस दिन सवर्ण ने इन्हीं गुंडों की तरह कानून से डरना बंद कर ��िया, वह दिन बहुत विकट होगा समाज के लिए।
मोदी जी का भस्मासुर! पुलिस बहुत कुछ कर सकती है पर मोदी एक्ट की शक्ति और मोदी की भीम भक्ति ने उन्हें नपुंसक बना कर रख दिया है।
इन्हीं गुंडों के समक्ष दिल्ली पुलिस को झुकना पड़ा, इन्हीं के समक्ष बाराबंकी प��लिस को असहाय होना पड़ रहा है। ‘बहुजन समाज के आक्रोश’ के नाम पर देश में आप सवर्णों की बहन-बेटियों पर भद्दे कमेंट करो, गीत बनाओ, दंगे करो, सचिन राघव को लिंच करने का प्रयास करो… सब स्वीकार्य है।
कुरान की नृशंसता से ध्यान हटाने के लिए मनुस्मृति जलाई गयी।
मुसलमानों की क्रूरता से ध्यान हटाने के लिए ब्राह्मण और क्षत��रियों को विलेन बनाया गया।
मोहम्मद की अमानुषता छिपाने के लिए शंबूक जोड दिया गया।
और इस्लामिक आक्रांताओं का नरसंहार छिपाने को आर्यन इनवेजन थ्योरी गढ दी गयी।
अभी कांग्रेस को 2020 गलवान का हिसाब चाहिए, लेकिन नेहरू के गंजे सर पर बाल और सियाचिन में घास ना उगने वाली बात पर इन्हें कोई हिसाब नहीं देना।
और इस फोटो में राहुल गांधी ���ाचा जिनपिंग के साथ पॉकेट बिलियर्ड्स खेल रहे थे या MoU साइन कर रहे थे? नेहरू के समय जो 38000 वर्ग किलोमीटर दिया उसका हिसाब कौन देगा?
डोकलाम के समय में चीनी राजनयिकों से क्या इमरजेंसी लाइट की डील करने गए थे कि 2008 के ओलंपिक में एक दर्जन ख़रीदे थे, 7 ख़राब हो गए, पैसा वापस करो? और ओलंपिक में सोनिया गाँधी के परिवार को क्यों आमंत्रित किया गया था? किस कैपेसिटी में?
2G स्पेक्ट्रम किसको बेच दिया ? कोयला घोटाला कहाँ हो गया ? पर आजकल बेचारों को इसमें भी इंटरेस्ट रहता है कि इस बार ब्रिक्स के मेनू में क्या है।
वो क्या है ना कि जो मनमोहन को साइड में बिठा कर ख़ुद डील किया करते थे, सोनिया जी कैसे रिसीव करती थी और मनमोहन को दूर किया जाता था कि आपको क्या पता है, NAC चेयरमैन तो मैं हूँ, उनको अब भारत मंडपम क�� लाइटिंग देख कर, वह भी सोशल मीडिया पर, काम चलाना पड़ रहा है तो दर्द तो स्थान विशेष में उठेगा ही ना!
बेचारे को वहाँ घुसने भी दिया तो मिले किससे, अनवर इब्राहिम से। फिर वही परिवारवाद दिखा कि खड़गे कहीं रह गए, LoP तो राहुल हैं, पर प्रियंका किस हैसियत से वहाँ गई?
वो दलित हैं तो क्या उनको भारत मंडपम में राहुल जी साथ ले कर नहीं जाएँगे? क्या ये अनुचित नहीं है? ठीक है कि वो वहाँ कुछ करते नहीं, पर वो वैसे भी कौन ���े संसद चलाने के टैलेंट के लिए चुने गए हैं! ऐसे ही ले जाते, उनको भी लगता कि महत्व देती है पार्टी।