अब तो भाजपा के कुकर्मों की दुहाई
दे रहा है ख़ुद कोई न कोई ‘भाजपाई’
अब तो भाजपा से भाजपाइयों के ही मोहभंग के वीडियो सरेआम हो रहे हैं। भाजपा ने अपना विश्वास और जनाधार पूरी तरह ��ो दिया है। जो लोग सच में अपने देश से प्यार करते हैं अब उनकी वैमनस्यपूर्ण धर्मांन्धता की काली रात गुज़र गई है और विवेकशील पुनर्जागरण का एक नया सवेरा उनके मानसिक-अंधकार को मिटा कर नयी चेतना का नया प्रकाश और सौहार्दपूर्ण नवजागरण ला रहा है।
अब तो भाजपाई भी समझ गये हैं कि भाजपा किसी की सगी नहीं है। भाजपा ��ें न सरकार का कोई मतलब है, न संगठन का। भाजपा एकाधिकारी मन और एकाकी मानसिकता से पूरी तरह ग्रसित है। इसमें किसी और के लिए कोई स्थान नहीं है। सच तो ये है कि जहाँ स्थान ही नहीं मिलेगा, वहाँ मान-सम्मान कैसे मिलेगा। भाजपा में न तो किसी मामले में किसी की सलाह ली जाती है और न ही किसी निर्णय में किसी को शामिल किया जाता है।
अपने दी दल में ही घोर उपेक्षित भाजपाई अब एक-दूसरे से दुखी होकर कह रहे हैं कि भाजपा न��� हमें बुरी तरह से निचोड़कर, इस तरह बर्बाद कर दिया है कि अब हमारी तुलना पूरी तरह रस निकाले जा चुके गन्ने की उस खोई से भी नहीं की जा सकती है, जिसे देखकर हाथी भी मुँह मोड़ लेता है। दरअसल भाजपाइयों की अपने ही दल में हो रही दुर्दशा इससे भी ज़्यादा गई-गुजरी है क्योंकि अपनी विघटनकारी दक़ियानूसी मानसिकता के कारण वो न तो बदलते हुए ��्रगतिशील समाज का सामना कर पा रहे हैं, न ही अपने घरों में प्रोग्रेसिव-पॉज़िटिव सोचवाली नई पीढ़ी का।
बेचारे भाजपाई तो किसी भी घाट के नहीं रहे। हमें ऐसे ‘बिन घाट के भाजपाइयों’ से बेहद सहानुभूति है।
सच तो ये है कि अपने अंतिम दौर में चल रहे भाजपाई भी अंदर से टूट गए हैं और भाजपा भी।
भाजपा का अंत ऐतिहासिक होगा!
India's opposition leader Rahul Gandhi is briefly detained during a march in the capital demanding the resignation of the electoral commission chief.
Al Jazeera’s Neha Poonia reports.
वीडियो गौर स�� देखिए डिटेन किए गए छात्रों को धमकाते और अभद्रता करते ये चेहरे कौन हैं?
हर आंदोलन में माहौल बिगाड़ने वाले ऐसे लोगों पर दिल्ली पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती?
छात्र संविधान के तहत अपनी बात रख रहे हैं। सवाल है पुलिस सबके लिए समान कार्रवाई कब करेगी?
@DelhiPolice @CPDelhi @RahulGandhi
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में पिछड़े वर्ग के नेताओं के लिए सवाल गंभीर है कि सत्ता में हिस्सेदारी के बावजूद पिछड़ा वर्ग छात्रावास के बच्चों को बिजली, ढंग का बिस्तर और साफ पानी जैसी न्यूनतम सुविधाएं तक क्यों उपलब्ध नहीं हैं?
सत्ता में हिस्सेदारी का मतलब सिर्फ कुर्सी तक पहुंचना नहीं, बल्कि अपने समाज के बच्चों के सम्मान, शिक्षा और बुनियादी अधिकारों के लिए जवाबदेही लेना भी है।
यह तस्वीर उन नेताओं के लिए भी आईना है, जो सत्ता में अपने समाज की नुमाइंदगी का दावा करते हैं।
सत्ता के लिए ‘सबका साथ’, लेकिन सुविधाओं के मामले में पिछड़े वर्ग के बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
बेहद शर्मनाक और चिंताजनक!
दिल्ली कनाट ��्लेस के सामने स्थित महिलाए अपने उपर हुए अत्याचार अन्याय के खिला प्रदर्शन कर रही हैं क्यो की संविधान के अनुसार कानून कहता हैं की शाम 6:00 बजे के बाद किसी महिला को डिटेन या पुलिस कास्टेडी में नहीं रख सकती है
अपना महिला ब्रोध जताती हुई