@abhijeet_dipke थोड़ा बहुत भी बुद्धि का इस्तेमा��� किया होता तो एक सकारात्मक माहौल बनता लोग जंतर मंतर आते खुद चला कर लेकिन नहीं भाई साहब तो खुद चल कर जा रहे हैं आंदोलन के लिए केंद्र होता है उसे केंद्र बिंदु के हिसाब से लोग आते हैं आपके साथ शामिल होते हैं लेकिन आपका तरीका बेकार
@khuchrep@abhinaymaths माना कि देश का 90% मीडिया ���हुत ही निम्न स्तर का हो गया है लेकिन यह जो आप लोग कर रहे हैं इसका भी कुछ खास मतलब नहीं है क्योंकि समस्या का समाधान आपके पास भी नहीं है!
और अगर है तो समाधान धरातल पर लागू नहीं होता है !
ओवरऑल तो दोनों तरफ से बकवास ही हो रही है!
पेट्रोल डीजल और सोना कम खरीदने की अपील से पहले आपको ये सब करना था -
1- आप कोई भी रैली नहीं करते
2- सभी राज���यों के मुख्यमंत्री विधायक को रैली के लिए नहीं बुलाते
3- सांसदों के फ्री विदेश यात्रा में रोक लगा देते
4- गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन वर्चुअल करते, 3000 बसे नहीं बुलवाते
5- जेवर एयरपोर्ट का उद्घाटन वर्चुअल करते
6- विधायकों सांसदों को फ्री पानी बिजली सब बंद करते
7- सुधीर चौधरी का 14 करोड़ वाला पैकेज बंद करते
8- चुनाव में फ्रीबीज का वादा न करते
9-मुख्यमंत्रियों को हेलिकॉप्टर में उड़ने पर प्रतिबंध लगाते।
��ेकिन नहीं, आप सोचते हैं कि बस जनता ही सारी कुर्बानी दे, नेता मौज काटें।
@jitendrajain घर घराने कुछ नहीं होते बसंत भाई जब तक सरकार का साथ है तब तक ही सब कुछ है आज सरकार अडानी के साथ है! कल सरकार कांग्रेस की बनेगी तो कोई और चमकेगा!
@BasantBaheti3 भाई साहब किसी कंपनी को खत्म होते टाइम नहीं लगता हमेशा लीडरशिप अच्छी नहीं रहती किसी कंपनी का आप अच्छा था तो उसका बेटा अच्छा होगा यह जरूरी नहीं है धीरूभाई कंपनी के मालिक थे मुकेश अंबानी ने अच्छी तरह संभाल लिया लेकिन अनिल अंबानी नहीं संभाल पाए तो कुछ भी प्रेडिक्शन करना संभव नहीं है