सरकार @BhajanlalBjp@madandilawar देख लो शिक्षकों का दर्द और कुछ करो
शिक्षा विभाग एक परिवार है तो उसको परिवार की तरह ही देखना चाहिए है , सामान्यतः परिवार के छोटे सदस्य को ज्यादा स्नेह मिलता है,शिक्षा विभाग रूपी परिवार में यह बात बिल्कुल उलट है प्रधानाचार्य व्याख्याता जिला शिक्षा अधिकारी वरिष्ठ अध्यापकों, अन्य तमाम अधिकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर निरंतर होते रहते हैं लेकिन इन अधिकारियों के संगठनों ने कभी यह नहीं कहा कि हमारे परिवार के सबसे छोटे सदस्य तृतीय श्रेणी अध्यापकों के तबादले सबसे पहले करने चाहिए हमारे बाद में करो।
सभी संगठन तृतीय श्रेणी अध्यापकों को उल्लू बना रहे हैं।
शिक्षक एवं विद्यार्थी हितों पर चोट बर्दाश्त नहीं—शैक्षणिक कैलेंडर में शीघ्र संशोधन हो : अखिल भारत���य राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) की मांग
जयपुर। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि निदेशालय, बीकानेर द्वारा जारी शिविरा पंचांग 2026-27 शिक्षक एवं छात्र हितों के प्रतिकूल है। इस संबंध में महासंघ द्वारा शिक्षा सचिव एवं निदेशक महोदय को अवगत कराते हुए संगठन की मांगों को ध्यान में रखकर शिवि���ा पंचांग जारी करने पर सहमति बनी थी। किन्तु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि जिन तीन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन सभी को नजरअंदाज कर दिया गया है।
संगठन की शिक्षा अधिकारियों से हुई वार्ता के दौरान अधिकारियों द्वारा ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून तक रखने का प्रस्ताव रखा गया था। इस पर संगठन ने राजस्थान सेवा नियमों के अनुसार विगत वर्षों से दिए जा रहे ग्रीष्मावकाश में कटौती का विरोध किया तथा आवश्यकता ��ड़ने पर आंदोलन का मार्ग अपनाने की बात कही। इसके पश्चात ग्रीष्मावकाश में किसी प्रकार की कटौती नहीं करने का आश्वासन दिया गया था। किन्तु वर्तमान शिविरा पंचांग में 17 मई से 30 जून के स्थान पर 17 मई से 20 जून तक ग्रीष्मावकाश निर्धारित कर दिया गया है। संगठन का कहना है कि वार्ता में सहमति के बाद भी मनमाने आदेश जारी करना सरकार की छवि को धूमिल करता है।
प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने कहा कि राजस्था��� सेवा नियमों के अनुसार शिक्षा विभाग, न्यायालय तथा अन्य कुछ विभाग विश्रामकालीन विभागों की श्रेणी में आते हैं, जिनमें कर्मचारियों को ग्रीष्मावकाश के दौरान वेतन दिया जाता है तथा 30 के स्थान पर केवल 15 पी.एल. (प्रिविलेज लीव) ही देय होती है। ऐसी स्थिति में यदि ग्रीष्मावकाश में कटौती की जाती है, तो कर्मचारियों को अन्य विभागों की भाँति 30 पी.एल. प्रदान की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीष्म ऋतु में भीषण गर्मी के कारण विद्यार्थी विद्यालय नहीं आते हैं, ऐसे में विद्यालय शीघ्र खोलने से विद्यार्थियों को कोई लाभ नहीं होगा। साथ ही, संगठन ने वार्ता के दौरान विद्यालयों का प्रातःकालीन समय (प्रातः 7:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक) 1 अप्रैल के स्थान पर 1 मार्च से लागू करने की मांग की थी, जिस पर आश्वासन दिया गया था, किन्तु उसमें भी कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
इसके अतिरिक्त, स्थानीय मेलों, त्योहारों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य द्वारा वर्ष में 2 अधिकृत अवकाश घोषित किए जाते थे, जिन्हें घटाकर 1 कर दिया गया है। यह भी अनुचित है।
संगठन क�� प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा, प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा, प्रदेश सभा अध्यक्ष संपत सिंह, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष रवि आचार्य, प्रदेश मंत्री अमरजीत सिंह, प्रदेश अतिरिक्त महामंत्री बसंत जिंदल, प्रदेश महिला उपाध्यक्ष सुषमा बिश्नोई, प्रदेश महिला मंत्री गीता जैलिया, प्रदेश कोषाध्यक्ष कैलाश कच्छावा सहित संपूर्ण प्रदेश कार्यकारिणी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षा विभाग के अधिका��ियों की मनमानी के कारण संगठन की उचित मांगों को सहमति के बाद भी दरकिनार किया गया है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
संगठन ने आग्रह किया है कि वार्ता के दौरान बनी सहमति के अनुसार—
ग्रीष्मावकाश 17 मई से 30 जून तक यथावत रखा ��ाए अथवा पी.एल. प्रदान की जाए, प्रातःकालीन विद्यालय समय 1 अप्रैल के स्थान पर 1 मार्च से लागू किया जाए, तथा प्रधानाध्यापक द्वारा घोषित अवकाश पुनः 2 किए जाएँ।
शिक्षक एवं छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए इन आदेशों में शीघ्र संशोधन किया जाना आवश्यक है। अन्यथा संगठन विवश होकर आंदोलन का मार्ग अपनाएगा, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होगी।
महेंद्र कुमार लखारा
प्रदेश महामंत्री
एबीआरएसएम, ���ाजस्थान (विद्यालय शिक्षा)
ग्रीष्मकालीन अवकाश कैटोती का विरोध.... अगर शिविरा पंचांग में अवकाश में कैटोती की गई तो उपार्जित अवकाश के हकदार हैं शिक्षक जिससे 270 करोड़ का भुगतान मिलेगा..... भीष्ण गर्मी में विद्यालय संचालन करना न्याय संगत निर्णय नहीं....राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ
सफलता साधनों की मोहताज नहीं होती....
#राजस्थान के बहरोड़ थाने में बंद #पपला गुर्जर को थाने पर फायरिंग कर ले जाने के बाद पपला और उसकी गैंग के लोगों की चर्चा चारों तरफ होने लगी थी, उसी में एक नाम था #दीक्षांत का, वह #महेंद्रगढ़ के गांव #खैरोली का रहने वाला है, 3 साल जेल में रहने के बाद दीक्��ांत ने अपनी पढ़ाई जारी रखी,उन्होंने अंग्रेजी विषय में यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा म���ं सफलता हासिल की है दीक्षांत पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक अच्छा अध्यापक बनना चाहता है।
#UGCNET #JRF #NetJRF
विधालय निरीक्षण
5 शिक्षक, 12 कक्षाएँ…
ये कोई आँकड़ा नहीं,
ये रोज़ निभाया जाने वाला संघर्ष है।
जहाँ एक शिक्षक
कई कक्षाओं का भविष्य अपने कंधों पर उठाए खड़ा है—
बिना शिकायत,
बिना शोर।
धन्य हैं हमारे अध्यापक महोदय,
जो संसाधनों की कमी में भी
संकल्प की रोशनी जलाए रखते हैं।
@MohitBharatYBP अब कोई नहीं कर रहा शोषण।
अब उल्टा दलित लोग act का दुरुपयोग करके obc को सता रहे हैं इसलिए st sc aur obc एक्ट ki डिमांड करनी चाहिए या फिर sc st एक्ट हटना चाहिए
@MohitBharatYBP OBC से दिक्कत है।
ST SC से नहीं है आपको कोई खतरा।
ST SC AND OBC एक्ट बनना चाहिए ताकि ST SC एक्ट का दुरपयोग बंद हो।।
या फिर SC ST ACT हटना चाहिए