मेरठ, उत्तर प्रदेश
गुप्ता मिष्ठान भंडार पर ग्राहक ने मिठाई ली लेकिन दुकानदार ने दो सौ ग्राम कम दी जिसपर ग्राहक ने एतराज जताया और पूरा तौलने को कहा दुकानदार नहीं दिए, दोनों में बहस हुई।
बात आगे बढ़ी तब दुकानदार ने स्टाफ के साथ मिलकर ग्राहक को बेहरमी से लिया।
जब बैरवा समाज के लड़के को चोरी करने के चक्कर में गुर्जरों के लड़कों ने मारा,वो ग़लत था,लेकिन बदले में ज्ञापन देने मीणा समाज तीन तीन MLA कलेक्ट्रेट करौली में आये थे,क्या सपोटरा में मीणा समाज के लोगों के द्वारा घर से बैरवा समाज के परिवार को निकाल दिया,क्या तीन mla अब ज्ञापन देंगे ?
रिपोर्टर - सचिन जी आप इतनी भीड़ में गाड़ी कैसे चला लेते हैं और हाथ भी मिल लेते हैं।
सचिन पायलट - मुझे पता कहां गाड़ी चलानी कहां रोकनी है मुझे गाड़ी चलाने का शौक है मैं संतुलन बैठा लेता हूं।
रिपोर्टर~ यह संतुलन सियासत में काम आ रहा है?
सचिन पायलट - मैं वह करता हूं जो ���ुझे ठीक लगता है।
@SachinPilot
यह व्यक्ति अजयराज मिणा पिलोदा है जो दिल्ली के इंडिया गेट पर एक @DelhiPolice के जवान को साथ अपने साथ बेठा कर पूरे गुर्जर समाज को उस पुलिसकर्मी के साथ बैठकर मां बहनों कि गालियां दे रहा है और पूरे गुर्जर समाज को रंडी की औलाद बता रहा है कृपया जांच कर कार्रवाई करें @gupta_rekha
■ अल्पसंख्यक की परिभाषा और समान शिक्षा अधिकार का प्रश्न▪︎▪︎▪︎
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें देश के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर भी शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) लागू करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा महादेवन की पीठ ने 2014 के प्रसिद्ध Pramati Educational & Cultural Trust v. Union of India निर्णय का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक संस्थानों पर RTE अधिनियम लागू नहीं होगा। साथ ही याचिकाकर्ता संस्था पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया��
यह निर्णय एक बार फिर भारत में "अल्पसंख्यक" की संवैधानिक एवं कानूनी परिभाषा को लेकर चल रही बहस को केंद्र में ले आया है।
संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा, लिपि, संस्कृति तथा शिक्षण संस्थान स्थापित एवं संचालित करने का अधिकार प्रदान करते हैं, किंतु संविधान में "अल्पसंख्यक" शब्द की ��्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है।
यहीं से कई महत्वपूर्ण प्रश्न उत्पन्न होते हैं। यदि अल्पसंख्यक की कोई स्पष्ट संवैधानिक या वैधानिक परिभाषा नहीं है, तो उसकी पहचान किस आधार पर की जाती है?
क्या इसकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर होगी अथवा राज्य स्तर पर?
क्या किसी जिले में बहुसंख्यक समुदाय किसी अन्य जिले में अल्पसंख्यक माना जा सकता है?
किसी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने का प्रतिशत या मानक क्या होगा?
इन प्रश्नों पर आज भी व्यापक राष्ट्रीय विमर्श की आवश्यकता महसूस की जाती है।
वर्तमान में National Commission for Minorities द्वारा अधिसूचित समुदायों को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। इनके लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं, वित्तीय सहायता कार्यक्रम, शैक्षणिक संस्थानों को विशेष अधिकार तथा अन्य कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जाती हैं।
परंतु आलोचकों का तर्क है कि इतने व्यापक अधिकारों एवं व्यवस्थाओं के बावजूद अल्पसंख्यक की ��वधारणा के निर्धारण हेतु कोई स्पष्ट, सार्वभौमिक और वस्तुनिष्ठ मानक स्थापित नहीं किया गया है।
समानता के संवैधानिक सिद्धांत की दृष्टि से भी यह विषय महत्वपूर्ण है। जब शिक्षा का अधिकार प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार माना गया है, तब यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या सभी शिक्षण संस्थानों पर समान नियम लागू होने चाहिए, अथवा सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक अधिकारों की रक्षा हेतु कुछ विशेष अपवाद आवश्��क हैं। यह एक जटिल संवैधानिक संतुलन का विषय है, जिस पर विभिन्न पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं।
आज आवश्यकता इस बात की है कि इस विषय पर भावनात्मक या राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि संवैधानिक, कानूनी और तथ्यपरक आधार पर गंभीर राष्ट्रीय चर्चा हो।
अल्पसंख्यक की पहचान, उसके मानदंड, उसकी इकाई तथा उससे जुड़े अधिकारों एवं दायित्वों पर स्पष्टता आने से न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि संविधान की मूल भावना — समानता, न्याय और सामाजिक समरसता — को भी अधिक सुदृढ़ आधार मिलेगा।
📧 akawasthi.official@gmail.com
@AshwiniUpadhyay
#MinorityDefinition #EqualLaw #RTE #Constitution #Article30 #EqualRights #OneNationOneLaw @HMOIndia @PMOIndia
पुत्र “मोह”
में धृतराष्ट्र “मानसिक”
रूप से भी अंधा हो गया था,
किंतु सत्ता के सिंहासन के स्वार्थ में आप इतना गिर जाओगे ये कल्पना से भी परे है,
आप “अतीत” हैं और @SachinPilot “भविष्य” है,
षड्यंत्र करके “नियति” के “निर्णय”
को बदलने की चेष्टा व्यर्थ है @ashokgehlot51 जी.
एक तरफ गहलोत कहते हैं भाजपा ने सरकार गिराने की साजिश रची, तो दूसरी तरफ गहलोत ये भी कहते हैं कि वसुंधरा जी ने सरकार बचाई। दोनों तो नहीं ही हो सकते- या तो गिराने की योजना थी या फिर बचाने की।
अब बात साफ है- अशोक गहलोत @ashokgehlot51 की नेता सोनिया गांधी @INCIndia नहीं रहकर वसुंधरा राजे सिंधिया @VasundharaBJP बन चुकी हैं।
@SachinPilot
दिखावे की चमक और सच का अँधेरा: जब “मेक इन इंडिया” सिर्फ नारा बनकर रह जाए
पिछले दिनों जो हुआ, वह किसी एक विश्वविद्यालय की गलती भर नहीं थी — वह उस मानसिकता का आईना था, जिसमें हम प्रगति का अभिनय तो कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक विकास से अभी भी दूर खड़े हैं। एआई समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर जब एक विदेशी तकनीक को भारतीय नवाचार बताकर पेश किया जाता है और बाद में स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि पवेलियन तक बंद कराना पड़ता है, तो सवाल केवल शर्मिंदगी का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ईमानदारी का बन जाता है।
सच यह है कि हम आज “तकनीकी महाशक्ति” बनने की बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन असलियत में हमारी बड़ी आबादी असेंबली को मैन्युफैक्चरिंग और जुगाड़ को इनोवेशन समझ बैठी है। ब��हर से मशीन आती है, यहाँ स्क्रू कसे जाते हैं, और फिर उसे राष्ट्रवाद की पैकेजिंग में लपेटकर दुनिया के सामने पेश कर दिया जाता है। कुछ समय तक तालियाँ मिल जाती हैं, लेकिन सच्चाई सामने आते ही वही तालियाँ ताने बन जाती हैं।
सबसे खतरनाक बात यह है कि यह धोखा केवल दूसरों को नहीं, हम खुद को दे रहे हैं।
हम अपने छात्रों को यह सिखा रहे हैं कि रिसर्च से ज्यादा जरूरी प्रेजेंटेशन है, मेहनत से ज्यादा जरूरी मार्केटिंग है, और मौलिकता से ज्यादा जरूरी है वायरल होना। जब विश्वविद्यालय प्रयोगशाला की जगह शो-रूम बन जाएँ, तो फिर वैज्ञानिक नहीं, इवेंट मैनेजर पैदा होते हैं।
और जिम्मेदारी केवल संस्थानों की भी नहीं है। पूरा सिस्टम इस भ्रम को पोषित करता है। फंडिंग घोषणाओं पर मिलती है, रैंकिंग प्रचार से तय होती है, और सवाल पूछने वालों को नकारात्मक कहकर चुप करा दिया जाता है। परिणाम यह होता है कि सच बोलने वाला हाशिये पर चला जाता है और दिखावा मुख्यधारा बन जाता है।
विडंबना देखिए — हम आत्मनिर्भरता की बात करते हैं, लेकिन तकनीक, चिप्स, मशीनें और कोर इनोवेशन सब बाहर से लेते हैं। आत्मनिर्भरता का मतलब स्टिकर बदलना नहीं होता; इसका मतलब होता है ज्ञान पैदा करना। लेकिन ज्ञान धीमा होता है, कठिन होता है, और उसमें फोटो-ऑप नहीं मिलते — इसलिए हम शॉर्टकट चुन ल��ते हैं।
समस्या यह नहीं कि हमने गलती की। समस्या यह है कि हम गलती स्वीकार करने के बजाय उसे उपलब्धि बताने लगते हैं। यही वह बिंदु है जहाँ विकास रुक जाता है और भ्रम शुरू हो जाता है।
अगर भारत को सच में तकनीकी नेतृत्व करना है, तो सबसे पहले हमें यह साहस जुटाना होगा कि हम नकली सफलता को सफलता मानना बंद करें। क्योंकि राष्ट्र निर्माण विज्ञापन से नहीं, प्रयोगशाला से होता है।
और जब तक हम यह फर्क नहीं समझेंगे, तब तक “मेक इन इंडिया” का सपना बार-बार “फेक इट इंडिया” के आरोपों में उलझता रहेगा।
#galgotiauniversity
#AIsummit2026
"वीर" और "गुर्जर" एक दूसरे के पर्याय हैं।
निडरता, स्वाभिमान और सदैव अपनी संस्कृति की जड़ों से जुड़ा हुआ रहना गुर्जर समाज की पहचान है। भगवान देवनारायण की कृपा समस्त समाज बंधुओं पर सदैव बनी रहे।
भगवान देवनारायण की जय !!
#VeerGurjar#GopalSharma#Thankogopal#CivilLines#Jaipur
ये घटना यूपी की है इस लड़की के गांव के प्रधान ने इसकी मां के साथ मारपीट की और इस लड़की bla त्कार करने की धमकी दी।
@Uppolice@dgpup कृपया उचित कार्यवाही करो।
अभी कल ही अब्दुल के चपेटे में आने के बाद परिणाम के रूप में लड़की की बक्से में बंद नाले में डूबी ला-श निकलती विडियो देखी जा रही है
लेकिन ये नही समझने की कसम खाये बैठे है
पूज्य श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलकर ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।
उन्होंने म��नवता, प्रेम और निस्वार्थ कर्म को ही सबसे बड़ा धर्म बताया।
उनकी शिक्षाएँ आज भी हमें आत्मशुद्धि, सदाचार और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देती हैं।
आइए, उनकी जयंती पर हम सभी सत्य, करुणा और सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लें तथा समाज में प्रेम और सद्भाव का प्रकाश फैलाएँ।
🙏 कोटि-कोटि नमन 🙏
कानपुर नगर में भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा आयोजित
■नशामुक्ति जनजागरण सद्भावना पदयात्रा में उपस्थित नगर प्रमुख श्रीमती प्रमिला पांडे जी एवं मह��मंडलेश्वर मनोजानन्द गोल्डन गिरी महाराज जी
का हार्दिक आभार ▪︎
🙏मां भगवती और गुरुवर श्री का आशीर्वाद सदा बना रहे !
जय माता दी
खुशी का ठिकाना नहीं.... 🙏😊
आज टोंक में स्व. श्री राजेश पायलट जी की जयंती पर
श्री भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति के सहयोग से
विशाल निःशुल्क दिव्यांग सामग्री वितरण शिविर
@SachinPilot