वरिष्ठता की आड़ में ट्रांसफर रोकना बंद करे सरकार! जब द्वितीय श्रेणी के लिए नियम हैं,तो तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए रास्ता क्यों नहीं निकाला जा रहा? 1-2 इंक्रीमेंट ले लो,लेकिन ट्रांसफर करो!
#वरिष्ठता_का_नाटक_बंद_करो
#तृतीय_श्रेणी_शिक्षक_मांगे_ट्रांसफर
#Jhalawar#पिड़ावा: पिड़ावा में तृतीय श्रेणी अध्यापकों ने SDM कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन
राजस्थान शिक्षक एवं पंचायत राज कर्मचारी संघ के बैनर तले किया प्रदर्शन, सात सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री ���े नाम...
#RajasthanWithFirstIndia @DmJhalawar
माननीय शिक्षा मंत्री @madandilawar जी से विनम्र निवेदन रहेगा कि एक तरफ सबके तबादले हो रहे है त�� 2018 से इंतजार कर रहे तृतीय श्रेणी शिक्षकों के भी तबादले होने चाहिए।
शिक्षा विभाग का दोगला व्यवहार
1. द्वितीय श्रेणी : वरिष्ठता समाप्त तो ट्रांसफर उचित
2. तृतीय श्रेणी : वरिष्ठता समाप्त हो सकती है, इसलिए ट्रांसफर नहीं कर सकते
कितने तेजस्वी लोग हैं !
@madandilawar@BhajanlalBjp
एक किमी दूर उसका ट्रांसफर,
Mggs, svms उनके ट्रांसफर
प्रोबेशन में ट्रांसफर
आखिर नियम सारे थर्ड ग्रेड पर
ओर चहेतो के डेप्यूटेशन
आखिर कितना शोषण बाकी है इन राष्ट्रनिर्माताओ का
जब शिक्षा विभाग में चपरासी से लेकर प्रिंसिपल और DEO तक, सभी वर्गों के धड़ल्ले से ट्रांसफर हो रहे हैं, तो सिर्फ तृतीय श्रेणी (थर्ड ग्रेड) शिक्षकों को ही हर बार क्यों अनदेखा कर दिया जाता है? क्या उनके साथ यह खुला भेदभाव न्यायसंगत है?
क्य�� इन शिक्षकों का कोई परिवार नहीं है? क्या इनके बूढ़े माता-पिता और बच्चों को अपने करीब रखने का इन्हें कोई हक नहीं है? सरकारें आती-जाती रहती हैं, चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन इन शिक्षकों की पीड़ा पर कोई ध्यान नहीं देता। पूर्ववर्ती सरकार ने भी इन्हें ठगा और वर्तमान सरकार भी अब तक इनके तबादलों पर ब्रेक लगाकर बैठी है।
हैरानी की बात है कि अन्य पदों पर ब��ठे लोगों के 18 साल में 50-50 बार ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन थर्ड ग्रेड शिक्षकों का 18 साल में सिर्फ एक बार भी ट्रांसफर होना मुश्किल हो जाता है!
आखिर यह दोहरा मापदंड क्यों? क्या एक पूरे वर्ग को इस तरह हाशिए पर रखना ही बीजेपी की पॉलिसी है? क्या आदरणीय भजन लाल जी का तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के प्रति यही संवेदनहीन रवैया रहेगा? इस गंभीर भेदभाव पर जवाब दीजिए सरकार!
@unm_of_rajasthan
@edu_dept_raj
#ThirdGradeTeacherTransfer #RajasthanTeachers #JusticeForThirdGradeTeachers #BhajanlalSharma
#MadanDilawar
@BhajanlalBjp
@madandilawar
@madanrrathore
@SachinPilot
@PMOIndia
जब शिक्षा विभाग में चपरासी से लेकर प्रिंसिपल और DEO तक, सभी वर्गों के धड़ल्ले से ट्रांसफर हो रहे हैं, तो सिर्फ तृतीय श्रेणी (थर्ड ग्रेड) शिक्षकों को ही हर बार क्यों अनदेखा कर दिया जाता है? क्या उनके साथ यह खुला भेदभाव न्यायसंगत है?
क्या इन शिक्षकों का कोई परिवार नहीं है? क्या इनके बूढ़े माता-पिता और बच्चों को अपने करीब रखने का इन्हें कोई हक नहीं है? सरकारें आती-जाती रहती हैं, चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन इन शिक्षकों की पीड़ा पर कोई ध्यान नहीं देता। पूर्ववर्ती सरकार ने भी इन्हें ठगा और व��्तमान सरकार भी अब तक इनके तबादलों पर ब्रेक लगाकर बैठी है।
हैरानी की बात है कि अन्य पदों पर बैठे लोगों के 18 साल में 50-50 बार ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन थर्ड ग्रेड शिक्षकों का 18 साल में सिर्फ एक बार भी ट्रांसफर होना मुश्किल हो जाता है!
आखिर यह दोहरा मापदंड क्यों? क्या एक पूरे वर्ग को इस तरह हाशिए पर रखना ही बीजेपी की पॉलिसी है? क्या आदरणीय भजन लाल जी का तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के प्रति यही संवेदनही��� रवैया रहेगा? इस गंभीर भेदभाव पर जवाब दीजिए सरकार!
@unm_of_rajasthan
@edu_dept_raj
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थर्ड ग्रेड स्थानांतरण को लेकर संघर्ष समिति की एक बड़ी घोषणा!!
क्या आप तैयार हैं....?
अब होगा महासंग्राम,,,एक बार फिर वही घोड़े वही मैदान!!!
अपने हक की लड़ाई के लिए तैयार है हमारे जवान!!
"अगर तुम अपने अधिकारों के लिए नहीं लडोगे,,तो उन्हें हमेशा के लिए खो दोगे"!!
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#वरिष्ठता_का_नाटक_बंद_करो
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@RatanChejara @Sanjay1singh2 @DrRanjeetMeena @VinodGarhwal001 @JaifNexus @oberai_monika @PRIMARYEDUCAT13
मंत्री महोदय ने मर्यादा तो बनाकर रखी...
संतुष्ट प्रवृत्ति के किसान हैं। खुद खेती करते हैं। खुद ही मंत्री हैं। मंत्री लोग करोड़ों के खेल करते हैं। कोई छिपा हुआ तथ्य नहीं है। मंत्री जी चाहते तो करोड़ों रुपए की सब्सिडी उठाते। उनको कौन मना करने वाला था भला? होती किसी की मना करने की हिम्मत? मोदी सरकार के मंत्री को मना करने की जुर्रत कौन ही कर सकता है भला?
फिर सोचिए, मंत्री जी ने 99 लाख की सब्सिडी ही क्यों उठाई? सी��ी सी बात है। मंत्री जी ने अपने पद की मर्यादा रखी। अगर मंत्री ही करोड़ों की सब्सिडी उठा लेते तो लोग क्या कहते? क्या इससे सीधे तौर पर मोदीजी की बदनामी नहीं होती?
लेकिन नहीं। मंत्री जी ने सबकी सोची। खुद की सबसे कम सोची। मात्र 99 लाख। सोचिए, मंत्री जी ने यह भी नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगे? केंद्र में मंत्री होकर भी सिर्फ 99 लाख रुपए उठाए।
ढाई-ढाई करोड़ तो हमारे राजस्थान में मंत्री के आजू-बाजू घूमने वाले वसूल लाते हैं। तो सोचिए एक केंद्रीय मंत्री का लेवल क्या होता होगा? सौ-पचास करोड़ उठाए होते तो कोई बात भी नहीं होती। या कोई बात भी होती।
मंत्री जी मर्यादा निभाने के चक्कर में लाखों में ही अटके रहे गए। अफ़सोस...