गो बैक के नारों से नहीं, अपनी पत्रकारिता से आहत होइए। जब कैमरा सत्ता के आगे झुक जाए और छात्रों की आवाज़ से मुंह मोड़ ले, तो विरोध स्वाभाविक है। पत्रकारिता का धर्म सत्ता की ढाल बनना नहीं, बल्कि तथ्यों के साथ जनहित की आवाज़ उठाना है।
एक दौर था जब कश्मीर में रिपोर्टिंग करने पर हम जैसे पत्रकारों को कहा जाता - इंडियन मीडिया गो बैक, हमें धमकी दी जाती , हमारा माइक तोड़ दिया जाता था. उस समय हम लाचार होकर अपनी जगह बदल लेते थे, लेकिन काम करना नहीं छोड़ा.
( मैं सभी की बात नहीं कर रही, मुट्ठीभर कुछ लोग )
आज भी एक वर्ग की मानसिकता वही है,
लेकिन उनके शब्द बदल गए हैं.
जाहिलों की उस तादाद से हम तब भी लड़े थे,
जाहिलों की इस तादाद से अब भी लड़ेंगे…
@chitraaum गो बैक के नारों से नहीं, अपनी पत्रकारिता से आहत होइए। जब कैमरा सत्ता के आगे झुक जाए और छात्रों की आवाज़ से मुंह मोड़ ले, तो विरोध स्वाभाविक है। पत्रकारिता का धर्म सत्ता की ढाल बनना नहीं, बल्कि तथ्यों के साथ जनहित की आवाज़ उठाना है।
‘लड़ो, लड़ नहीं सकते,
बोलो, बोल नहीं सकते,
लिखो, लिख नहीं सकते,
साथ दो साथ नहीं दे सकते,
काम करने वालो का मनोबल बढ़ाओ यदि वो भी नहीं कर सकते हो,
जो कर रहे हैं, उनका मनोबल मत तोड़ों क्योंकि वो तुम्हारे हिस्से की लड़ाई लड़ रहा है।’
#StudentsDemandJustice
लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही सर्वोपरि है। सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल उठाने वालों को रोकना चिंता का विषय है। शिक्षा जैसे अहम मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही अपेक्षित है। शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध पर रोक, लोकतंत्र की भावना पर आघात है।
"इंकलाब ज़िंदाबाद" भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक नारा है। इसका इतिहास जानना हर पत्रकार के लिए ज़रूरी है। पत्रकारों का घटता ज्ञान, पत्रकारिता का गिरता स्तर और तथ्यों की जगह नफरती एजेंडे को बढ़ावा देना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
पहली बार किसी रिपोर्टर को ' इंकलाब
ज़िंदाबाद ' जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.
ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंकलाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है ?
टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी ?
या बस ऐसे ही ?
आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे . आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है - इंकलाब जिंदाबाद
@ajitanjum "इंकलाब ज़िंदाबाद" भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का ऐतिहासिक नारा है। इसका इतिहास जानना हर पत्रकार के लिए ज़रूरी है। पत्रकारों का घटता ज्ञान, पत्रकारिता का गिरता स्तर और तथ्यों की जगह नफरती एजेंडे को बढ़ावा देना लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।
आवाज़ों को खामोश किया जा सकता है, विचारों को नहीं। असहमति लोकतंत्र की धड़कन है, अपराध नहीं। संविधान संवाद का पक्षधर है, दमन का नहीं—यही लोकतंत्र की असली पहचान है।
#SonamWangchuck
सोनम वांगचुक का अनशन 18वें दिन में है। नीट पेपर लीक जैसे मुद्दे पर उनका संदेश साफ़ है - युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए। जब परीक्षा व्यवस्था पर सवाल हों, तब सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता, संवाद व ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
समृद्धि, पुण्य और शुभारम्भ का पर्व...
पढ़िए आज के दैनिक जागरण ‘सबरंग’ में।
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अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🙏
#परशुराम_जयंती#अक्षय_तृतीया
नहीं रहीं भारतीय संगीत की अमूल्य धरोहर, सुरों की मल्लिका आशा भोसले जी। उनकी आवाज़ ने पीढ़ियों को मंत्रमुग्ध किया है और संगीत जगत को अनगिनत अमर गीत दिए हैं। सादर नमन।🙏
#AshaBhosle
🏆 चैंपियन 🇮🇳
T20 विश्व कप 2026 के फाइनल में न्यूज़ीलैंड को हराकर टीम इंडिया ने इतिहास रच दिया।
इस ऐतिहासिक जीत पर भारतीय क्रिकेट टीम के सभी खिलाड़ियों और सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 👏
#TeamIndia#Champions#T20WorldCup2026#T20WorldCup2026final