दिल्��ी का आनन्दविहार अन्तरराज्यीय बस अड्डा अराजकता का अड्डा बना हुआ है ।
रेखा गुप्ता के CM बनने से पहले भी केजरीवाल ने कभी यहां लगने वाले जाम के लिए कुछ नही किया , अप रेखा गुप्ता सरकार अभी तक इसपर ध्यान नही दिया गया ।
1 . फुट ओवर ब्रिज पर दुकानों का कब्जा
2 . सड़क के दोनों ओर डग्गामार बसों , टैक्सी का कब्जा
3 . सवारियां बस अड्डे के अन्दर से नहीं बाहर रोड पर ब्स खड़ी करके भरी जाती हैं
4 . जेब कतरे , लुटरें ए���्टिव , पुलिस की मिलीभगत के आरोप
5 . ट्रेफिक पुलिस गायब या सैटिंग में व्यस्त
6 . एक्सेलेटर पिछले 10 वर्ष से खराब
कृपया ध्यान दें
@gupta_rekha @CMODelhi @mssirsa @LtGovDelhi @CPDelhi @DelhiPolice
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A Congress Bhai Sahab posted a status : After eating with wife in a restaurant the bill was of Rs.1000.But I paid Rs. 180 GST. I felt that Modiji also ate with us in an invisible way.
😂😂😂😂😂😂
I commented : Bhai Sahab, there is GST on condoms too So do you feel the same about that too? 😁
The Rascal Blocked Me.
ये भीड़ जो आप देख रहे हैं बांग्लादेश भारत बॉर्डर की है...
पश्चिम बंगाल से लगी सीमा की...
जहाँ से झुण्ड के झुण्ड घुसपैठिये बीजेपी की जीत के बाद वापस भाग रहे हैं
और अभी तो खदेड़ा शुरू हुआ है बस!!
कुछ लोग आयुर्वेदिक होते हैं..
मतलब बोल चाल में एकदम उम्दा, लेकिन emergency में काम नहीं आते...
😳
कुछ लोग allopathic होते हैं..
मतलब emergency में काम यही आते हैं, पर कब क्या side effect दिखा दें, भरोसा नहीं..
🤪
कुछ लोग होम्योपैथिक होते हैं..
मतलब वैसे तो कि��ी काम के नहीं होते, पर साथ हो तो अच्छा लगता है..
🤭😄😄
🚨🚨🚨
A Geneva-Based Secret Ruler of Pakistan
Controls India’s Banking Roots
The unpaid Serena Hotel bill wasn’t just Pakistan’s humiliation — it was India’s wake-up call.
Inside story only in @BWBusinessworld@anuragbatrayo
https://t.co/e6aGRmhkMR
🚨 एक बेटा अपनी मां के इलाज के लिए हर साल ₹50,000 प्रीमियम भरता रहा भरोसा था कि जरूरत पर साथ मिलेगा।
मां बीमार हुई तो वह स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के लखनऊ ऑफिस पहुंचा।
घंटों इंतजार कराया गया।
फिर क्लेम से इनकार।
ऊपर से एजेंट का जवाब “हमसे पूछकर पॉलिसी थोड़ी ली थी।”
सवाल सीधा है कि 👇
प्रीमियम समय पर चाहिए , लेकिन क्लेम के समय बहाने क्यों?
क्या बीमा कंपनियां सिर्फ पैसा इकट्ठा करने के लिए ह��ं?
क्या पॉलिसी धारक का हक मांगना अपराध है?
अगर नियमों के नाम पर क्लेम रोके जाएंगे,
तो यह सुरक्षा नहीं, सीधी लूट है।
हर ग्राहक को लिखित कारण, पारदर्शिता और जवाबदेही मिलनी चाहिए।
वरना “हेल्थ इंश्योरेंस” भरोसा नहीं , सिर्फ कागज़ी वादा बनकर रह जाएगा।
"मां के हेल्थ इंश्योरेंस के लिए 50 हजार भरता हूं.
जरूरत आई तो Star Health ने पैसे देने से मना कर दिया!"
"बोल रहे- हमसे पूछकर ली थी पॉलिसी?"
क्या देश में Health insurance के नाम पर भी घोटाला चल रहा है?
ये लखनऊ का वीडियो है. मां के इलाज के लिए एक आदमी, Star Health के दफ्तर में बैठा है.
पहले प्रीमियर भरो, फिर बीमारी हो तो धरना दो. ये कौन सा सिस्टम है?
और स्टाफ का attitude देखिए, क्या ये लोग सिर्फ पॉलिसी बेचने के लिए रखे गए हैं या फिर ग्राहकों की मदद करना भी इनके काम में शामिल है?
उस शाम शहर के सबसे बड़े गुरुद्वारे में एक बहुत बड़े लंगर का आयोजन समाप्त हुआ । हवा में देसी घी के हलवे की खुशबू अभी भी तैर रही थी । दिन भर लाउडस्पीकर से मानस की जात सबै एकै पहचानबो (समस्त मानव जाति को एक ही पहचानो) के पवित्र शबद जमकर गूंजे थे ।
रात हुई । दिन भर के थके सेवादार सोने चले गए । आधी रात में लंगर के भंडार से कुछ खटर–पटर की आवाजें आई । सेवादार जाग गए । भागकर भंडार की ओर गए । वहां देखा तो एक उन्नीस–बीस साल का पागल सा लड़का , जिसके पीठ पर लदे हुए थैले में पता नहीं क्या–क्या कबाड़ भरा हुआ है , एक कौने में दुबका बैठा था ।
उसके गंदे से हाथों में एक सूखी रोटी थी । वह कुछ मंदबुद्धि था । उसे यह समझ नहीं ��ी कि रोटी पाने के लिए लंगर में आकर पहली पंक्ति में बैठना पड़ता है । सिर को रुमाल से बांधकर ढंकना पड़ता है और फिर हाथ फैलाकर रोटी को लपकते हुए यह दिखाना पड़ता है कि वह भूखा है । उस पागल को दिन–रात का क्या पता ? उसे तो बस भूख का पता था जो पेट की दीवारों को किसी भूखे भेड़िए की तरह लगातार काट रही थी । रोटी की तलाश उसे गुरु घर में लंगर के भंडार तक खींच लाई । उसकी क्या गलती ? भूख की गलती थी । इसी गलती के चलते ��सने सुनसान पड़े भंडार में से एक रोटी उठा ली थी ।
बस उसका ये करना था कि चोर–चोर के शोर से पवित्र परिसर गूंज उठा । सेवादारों के हाथ जो कुछ देर पहले श्रद्धालुओं के पैर धो रहे थे अचानक मुट्ठियां बन गए । उसे घेर लिया गया । वह घबराया हुआ था पर थोड़ा मुस्कुरा रहा था । वह मासूम ऐसी मुस्कान बिखेर रहा था जो केवल उन लोगों के पास होती है जिनका दिमाग दुनियादारी की चालाकियों से मुक्त होता है । उसे लगा शायद यह कोई खेल है लेकिन वह खेल नहीं था । उसे पता ही नहीं था कि एक रोटी के चक्कर में वह मौत के मुंह में आकर खड़ा हो गया है ।
पहला थप्पड़ उसके गाल पर पड़ा तो रोटी का टुकड़ा उसके हाथ से छिटक कर बाहर नाली के पास जा गिरा । फिर लात-घूंसों की बौछार शुरू हुई । लाठी–डंडों से पीटा गया । उसकी हर चोट के साथ लोग धर्म रक्षा का पुण्य कमा रहे थे । वे एक ऐसे पापी को दंड दे रहे थे जिसने गुरु के घर से लेकर एक रोटी खा ली थी ।
हैरानी की बात थी कि जिस भीड़ ने उसे मारा वही भीड़ कुछ देर पहले अरदास में जोर–शोर से चिल्ला रही थी— देग तेग फतेह मतलब देग , दान और शक्ति की विजय हो । देग और दान तो वहां थे पर शायद उस रोटी के एक टुकड़े से बड़े नहीं थे ।
जब तक उसकी सांसें उखड़ नहीं गईं तब तक उस पर प्रहार जारी रहे । ��ंत में वह पानी–पानी कराहता हुआ शांत हो गया । उसकी फटी हुई कमीज के नीचे पसलियों को देखकर साफ पता चल रहा था कि शायद कई दिनों भूखा था । अगले दिन अखबारों में छोटी सी खबर छपी— गुरुद्वारे में बेअदबी करते पकड़ा गया अज्ञात व्यक्ति भीड़ के हत्थे चढ़ा । मौत ।
पूरे प्रदेश के नामचीन जत्थेदारों ने , संगत वालों , बंदे–बंदियों ने उसी शाम गुरुद्वारों में जाकर रब का शुक्रिया अदा किया कि उनका वखरा धर्म सुरक्��ित है । बेअदबी करने वाले को उसकी सजा मिल चुकी है । लंगर फिर से सजा । वही घी की खुशबू वही भोजन । वही दाल , वही हलवा । बस बाहर कोने में वह रोटी का टुकड़ा अब भी पड़ा था जिसे अब एक कुत्ता सूंघ कर आगे बढ़ गया । शायद कुत्ता उस मंदबुद्धि से ज्यादा समझदार था...............
उसे पता था कि लंगर की यह रोटी अब किसी के खून से सनी है.........!!
@SupriyaShrinate सोनिया गांधी का बेटा पप्पू है फिर भी वह कांग्रेस की तरफ से नेता विपक्ष बना हुआ है।
चुनाव जीतना तो बड़ी दूर की बात है लेकिन वह पूरी कांग्रेस को कंट्रोल करता है।