गोंडा इस 7 वर्षीय बच्चे अर्पित को और उसकी विवशता का क्रूरतम स्तर देखिये?
वो अपनीं मां के साथ लुधियाना से आया,
बस अड्डे पर मां की तबियत बिगड़ी तो,अस्पताल
में भर्ती कराया!
4 दिन इलाज के बाद अर्पित के मां की मौत हो
गई,रिश्तेदारों को फोन लगाया,कोई भी आनें को
तैयार नही,
न ससुराल पक्ष से न ही मायके के पक्ष से कोई..
ऐसा नहीं कि अर्पित कि मां का किसी से विवाद था,
लोग इस लिए नहीं आए कि अब इसके खर्च कौन उठाएगा?
आंसुओं और आस से भरी आंखों से अर्पित,
किसी अपनों का इंतजार करता रहा लेकिन,
कोई नही आया मतलब कोई भी...
मेडीकल कालेज के अनुरोध पर,एक संगठन नें
अर्पित की मां का अंतिम संस्कार कराया..
अर्पित के पिता और मां 2 साल पहले अलग हो
गये थे,दूसरी शादी की लेकिन आखिर वक्त वह
भी धोखा दे गया?यह दुनियां फरेबों से भरी पड़ी
है...
यहां सराहना के पात्र केवल जिलाधिकारी जी हैं,
जिन्होंनें इस मासूम के पढ़ाई-लिखाई पालन-पोषण का जिम्मा लिया है..अंतिम संस्कार करनें के बाद
बच्चे को बाल शिशु गृह भेज दिया गया..
अब कल ये बच्चा बड़ा हो कर अगर कुछ बड़ा नाम कमा लिया तो,देखना दूर दूर तक के परिवार,रिश्तेदार सगे संबंधी निकलने लगेंगे 💔✍️
दो जगह, दो हत्याएं... लेकिन पैटर्न एक।
तरुण की लिंचिंग के बाद 'बुआ छेड़ी' और सूर्या की हत्या के बाद 'असद की बहन छेड़ी' हर बार वही हवा-हवाई विक्टिम कार्ड।
खोड़ा के स्थानीय लोगों ने इसे फेक नैरेटिव बताकर सिरे से खारिज किया और कहा, यह हत्या के असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
पूरी ग्राउंड रिपोर्ट देखिए @Keshavmalan93 के साथ।