सुन्नेले सुनाइदिए,
उनले पत्याइन्, केही समयको झगड़ा
बर्ष लगाएर गरेको मायाको खेति
शंकाको बाढ़ीले तहसनहस् बनाईदियो
म हेरिरहे, सयौं जुनिको सपना आँखा अघी जलेको।
एक बार फिर मिले हम, कयीं शदियों के बाद
तुम बेज़ुबा थीं, मुझें बोलने को कोही लफ़्ज़ नहीं था
हम तुमको देख़ रहे, अचानक सें नमी छा गई
पर इस बार बारिश तो नहीं था…