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इस्लाम पर मेलोनी के बयान से खलबली !
पूरे यूरोप का इस्लामीकरण हो रहा है।
हमारी संस्कृति और इस्लाम में कोई समानता नहीं है।
इटली में सऊदी द्वारा इस्लाम को फैलाया जा रहा है।
सऊदी में शरिया कानून है, जिसे हम इटली में लागू नहीं होने देंगे।
: जॉर्जिया मेलोनी, PM, इटली
Religious expressions and activities ought to be prohibited within the confines of a sports arena. @JayShah
It is crucial to maintaining a neutral and inclusive environment, ensuring that sports focus on competition and unity, rather than potential controversies or distractions arising from religious expressions.
क्या है तारा शाहदेव लव-जिहाद केस ?
आपको हिलाकर रख देगी यह जानकारी।
नेशनल शूटर तारा को कैसे बनाया गया था लव जिहाद का शिकार ?
2014 में शूटर तारा से मोहम्मद रकीबुल हसन ने असली न��म छुपाकर की शादी।
रकीबुल ने तारा को अपना नाम रंजीत कोहली ��ताया था।
इस साजिश में रकीबुल की अम्मी कौशर और मैरेज रजिस्ट्रार मोहम्मद मुश्ताक अहमद भी शामिल थे।
शादी के 2 दिन बाद तारा को मोहम्मद रकीबुल की असलियत का पता चला।
रकीबुल की सच्चाई जानने के बाद तारा ने विरोध किया।
इसपर रकीबुल के परिवार वालों ने तारा को काफी टॉर्चर किया और तारा पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगे।
लेकिन तारा शाहदेव ने इस्लाम कबूलने से मना कर दिया और केस दर्ज करा दिया।
9 वर्ष बाद इस केस में CBI अदालत ने फैसला सुनाया और मोहम्मद रकीबुल को उम्रकैद की सजा सुनाई।
मैरेज रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को 15 साल कैद और रकीबुल की अम्मी कौशर को भी 2 साल की सजा सुनाई है।
जब मृत्यु का समय निकट आया I
तो पिता ने अपने एकमात्र पुत्र धर्मपाल को बुलाकर कहा कि,
बेटा मेरे पास धन-संपत्ति नहीं है कि मैं तुम्हें विरासत में दूं। पर मैंने जीवनभर सच्चाई और प्रामाणिकता से काम किया है।
तो मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी।
बेटे ने सिर झुकाकर पिताजी के पैर छुए। पिता ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और संतोष से अपने प्राण त्याग कर दिए।
अब घर का खर्च बेटे धर्मपाल को संभालना था। उसने एक छोटी सी ठेला गाड़ी पर अपना व्यापार शुरू ��िया।
धीरे धीरे व्यापार बढ़ने लगा। एक छोटी सी दुकान ले ली। व्यापार और बढ़ा।
अब नगर के संपन्न लोगों में उसकी गिनती होने लगी। उसको विश्वास था कि यह सब मेरे पिता के आशीर्वाद का ही फल है।
क्योंकि, उन्होंने जीवन में दु:ख उठाया, पर कभी धैर्य नहीं छोड़ा, श्रद्धा नहीं छोड़ी, प्रामाणिकता नहीं छोड़ी इसलिए उनकी वाणी में बल था। और उनके आशीर्वाद फलीभूत हुए। और मैं सुखी हुआ। उसके मुंह से बारबार यह बात निकल��ी थी।
एक दिन एक मित्र ने पूछा: तुम्हारे पिता में इतना बल था, तो वह स्वयं संपन्न क्यों नहीं हुए? सुखी क्यों नहीं हुए?
धर्मपाल ने कहा: मैं पिता की ताकत की बात नहीं कर रहा हूं। मैं उनके आशीर्वाद की ताकत की बात कर रहा हूं।
इस प्रकार वह बारबार अपने पिता के आशीर्वाद की बात करता, तो लोगों ने उसका नाम ही रख दिया बाप का आशीर्वाद! धर्मपाल को इससे बुरा नहीं लगता, वह कहता कि मैं अपने पिता के आशीर्वाद के काबिल न��कलूं, यही चाहता हूं।
ऐसा करते हुए कई साल बीत गए। ��ह विदेशों में व्यापार करने लगा। जहां भी व्यापार करता, उससे बहुत लाभ होता। एक बार उसके मन में आया, कि मुझे लाभ ही लाभ होता है !! तो मैं एक बार नुकसान का अनुभव करूं।
तो उसने अपने एक मित्र से पूछा, कि ऐसा व्यापार बताओ कि जिसमें मुझे नुकसान हो।
मित्र को लगा कि इसको अपनी सफलता का और पैसों का घमंड आ गया है। इसका घमंड दूर करने के लिए इसको ऐसा धंधा बताऊं कि इसको नुकसान ही नुकसान हो।
तो उसने उसको बताया कि तुम भारत में लौंग खरीदो और जहाज में भरकर अफ्रीका के जंजीबार में जाकर बेचो। धर्मपाल को यह बात ठीक लगी।
जंजीबार तो लौंग का देश है। वहां से लौंग भारत में लाते हैं और यहां 10-12 गुना भाव पर बेचते हैं।
भारत में खरीद करके जंजीबार में बेचें, तो साफ नुकसान सामने दिख रहा है।परंतु धर्मपाल ने तय किया कि मैं भारत में लौंग खरीद कर, जंजीबार खुद लेकर जाऊंगा। देखूं कि पिता के आशीर्वाद कितना साथ देते हैं।
नुकसान का अनुभव लेने के लिए उसने भारत में लौंग खरीदे और जहाज में भरकर खुद उनके साथ जंजीबार द्वीप पहुंचा।जंजीबार में सुल्तान का राज्य था। धर्मपाल जहाज से उतरकर के और लंबे रेतीले रास्ते पर जा रहा था ! वहां के व्यापारियों से मिलने को।
उसे सामने से सुल्तान जैसा व्यक्ति पैदल सिपाहियों के साथ आता हुआ दिखाई दिया।
उसने किसी से पूछा कि, यह कौन है?
उन्होंने कहा: यह सुल्तान हैं।
सुल्तान ने उसको सामने देखकर उसका परिचय पूछा। उसने कहा: मैं भारत के गुजरात के खंभात का व्यापारी हूं। और यहां पर व्यापार करने आया ���ूं।
सुल्तान ने उसको व्यापारी समझ कर उसका आदर किया और उससे बात करने लगा।
धर्मपाल ने देखा कि सुल्तान के साथ सैकड़ों सिपाही हैं। परंतु उनके हाथ में तलवार, बंदूक आदि कुछ भी न होकर बड़ी-बड़ी छलनियां है।
उसको आश्चर्य हुआ। उसने विनम्रता पूर्वक सुल्तान से पूछा: आपके सैनिक इतनी छलनी लेकर के क्यों जा रहे हैं।
सुल्तान ने हंसकर कहा: बात यह है, कि आज सवेरे मैं समुद्र तट पर घूमने आया था। तब मेरी उंगली में ���े एक अंगूठी यहां कहीं निकल कर गिर गई।
अब रेत में अंगूठी कहां ��िरी, पता नहीं। तो इसलिए मैं इन सैनिकों को साथ लेकर आया हूं। यह रेत छानकर मेरी अंगूठी उसमें से तलाश करेंगे।
धर्मपाल ने कहा: अंगूठी बहुत महंगी होगी।
सुल्तान ने कहा: नहीं! उससे बहुत अधिक कीमत वाली अनगिनत अंगूठी मेरे पास हैं। पर वह अंगूठी एक फकीर का आशीर्वाद है।
मैं मानता हूं कि मेरी सल्तनत इतनी मजबूत और सुखी उस फकीर के आशीर्वाद से है। इसलिए मेरे मन में उस अंगूठी का मूल्य सल्तनत से भी ज्यादा है।
��तना कह कर के सुल्तान ने फिर पूछा: बोलो सेठ,आप क्या माल ले कर आये हो।
धर्मपाल ने कहा कि: लौंग!
सुल्तान के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। यह तो लौंग का ही देश है सेठ। यहां लौंग बेचने आये हो? किसने आपको ऐसी सलाह दी।
जरूर वह कोई आपका दुश्मन होगा। यहां तो एक पैसे में मुट्ठी भर लोंग मिलते हैं। यहां लोंग को कौन खरीदेगा? और तुम क्या कमाओगे?
धर्मपाल ने कहा: मुझे यही देखना है, कि यहां भी मुनाफा होता है या नहीं।
��ेरे पिता के आशीर्वाद से आज तक मैंने जो धंधा किया, उसमें मुनाफा ही मुनाफा हुआ। तो अब मैं देखना ��ाहता हूं कि उनके आशीर्वाद यहां भी फलते हैं या नहीं।
सुल्तान ने पूछा: पिता के आशीर्वाद? इसका क्या मतलब?
धर्मपाल ने कहा: मेरे पिता सारे जीवन ईमानदारी और प्रामाणिकता से काम करते रहे। परंतु धन नहीं कमा सकें।
उन्होंने मरते समय मुझे भगवान का नाम लेकर मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिए थे, कि तेरे हाथ में धूल भी सोना बन जाएगी।
ऐसा बोलते-बोलते धर्मपाल नीचे झुका और जमीन की रेत से एक मुट्ठी भरी और सम्रा�� सुल्तान के सामने मुट्ठी खोलकर उंगलियों के बीच में से रेत नीचे गिराई तो..
धर्मपाल और सुल्तान दोनों का आश्चर्य का पार नहीं रहा। उसके हाथ में एक हीरेजड़ित अंगूठी थी। यह वही सुल्तान की गुमी हुई अंगूठी थी।
अंगूठी देखकर सुल्तान बहुत प्रसन्न हो गया। बोला: वाह खुदा आप की करामात का पार नहीं। आप पिता के आशीर्वाद को सच्चा करते हो।
धर्मपाल ने कहा: फकीर के आशीर्वाद को भी वही परमात्मा सच्चा करता है।
सुल��तान और खुश हुआ। धर्मपाल को गले लगाया और कहा: मांग सेठ। आज तू जो मांगेगा मैं दूंगा।
धर्मपाल ने कहा: आप 100 वर्ष तक जीवित रहो और प्रजा का अच्छी तरह से पालन करो। प्रजा सुखी रहे। इसके अलावा मुझे कुछ नहीं चाहिए।
सुल्तान और ��धिक प्रसन्न हो गया। उसने कहा: सेठ तुम्हारा सारा माल में आज खरीदता हूं और तुम्हारी मुंह मांगी कीमत दूंगा।
इस कहानी से शिक्षा मिलती है, कि पिता के आशीर्वाद हों, तो दुनिया की कोई ताकत कहीं भी तुम्हें पराजित नहीं होने देगी।
पिता और माता की सेवा का फल निश्चित रूप से मिलता है। आशीर्वाद जैसी और कोई संपत्ति नहीं।
बालक के मन को जानने वाली मां और भविष्य को संवारने वाले पिता यही दुनिया के दो महान ज्योत��षी है।
अपने बुजुर्गों का सम्मान करें!
यही भगवान की सबसे बड़ी सेवा है।
ये मोहम्मद रियाज़ है।
इसने अपनी बहन का सर काट दिया।
बहन का कटा सर लेकर सड़क पर निकल पड़ा मोहम्मद रियाज़।
रियाज़ की बहन अपने प्रेमी के साथ भाग गई थी इसलिए काट दिया सर।
मामला उत्तर प्रदेश के बाराबंकी का।
Spain
तीन बच्चों की माँ को सुवर 🐷 ने चाकू से गोद दिया
ये वही कुत्ते शरणार्थी हैं जो भीख मांगते हुए यूरोप मे घुसे थे अब यूरोप का सत्यानाश कर रहे हैं 👇👇👇😠😠
#भारत मे #दलित नाम की #राजनीती करने वाले वामसेफ़ और मीम के साथ लगने वाले ये हालात देख ले
किस तरह पाकिस्ताN मे मुस्लिMo ने एक दलित #महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद सर काटकर खाल उतारकर बेरहमी से काट दिया गया.....
देश के बेरोजगारों से अपील है भले ही मोदी करोड़ो रोज़गार दे न दे ,,,,,
बंगाल , झारखंड , राजस्थान , आंध्रप्रदेश , पंजाब में लाखों करोड़ों रोज़गार आपका इंतजार कर रही है , बस जाइये और पैसा ही पैसा होगा 😊😊😊😊😊😊