मुसलमानों के सामने एक-दो नहीं, बल्कि कई मसले हैं।
आज़ादी के बाद सांप्रदायिक सोच को ���ौका मिला और मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाया गया।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद सबसे पहले इन ताक़तों के ख़िलाफ़ सामने आई थी।
हम सड़कों पर लड़ाई नहीं करेंगे, क्योंकि ये देश के लिए नुकसानदायक है।
हमारी लड़ाई उन लोगों से है जो सत्ता में रहकर इन सांप्रदायिक ताक़तों को खुला छोड़ रहे हैं।
"भारत में मुसलमान हज़ार साल से ज़्यादा वक़्त से रह रहे हैं।
केरल से कश्मीर तक, हर बिरादरी में हिंदू भी हैं और मुसलमान भी।
हमारा इतिहास किसी से कम नहीं है।"
इस देश की तरक़्क़ी तभी मुमकिन है जब आपसी भाईचारा और मेल-जोल बना रहे।
#ArshadMadani