संघर्ष ही हमारा नारा है। और संविधान हमारे साथ , संविधान ही हमारा धर्म ग्रन्थ है, सभी धर्मों का सम्मान हैं, लेकिन पाखंडवाद एवं अंधविश्वास का कट्टर विरोधी हूं।
यदि आप गरीबी,भुखमरी पर बोलोगे,आपको अर्बन नक्सल कहा जायेगा!यदि आप अल्पसंख्यकों के दमन पर बोलोगे तो आतंकवादी कहेंगे!दलित उत्पीड़न,छुआछूत पर बोलेंगे तो भीमटे कहेंगे!जल,जंगल,जमीन की बात करोगे तो माओवादी कहेंगे और यदि इनमें से आपको कुछ नहीं कहा जा रहा तो यकीनन आप एक मुर्दा इंसान हो!
राहत की कतार में खड़े बाढ़ पीड़ितों पर पिस्टल तानकर बिहार पुलिस के ध्येय वाक्य “सेवा, सुरक्षा और न्याय” को थानाध्यक्ष ने सवालों के घेरे में ला दिया।
शर्मनाक!
दिल्ली पुलिस द्वारा "पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा" को इस प्रकार जबरन हिरासत में लिया जाना बेहद निंदनीय है।
क्या अब देश में स्वतंत्र पत्रकारिता करना अपराध बन गया है? पुलिस द्वारा किया गया बर्ताव बेहद घटिया है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर यह सीधा प्रहार है। सरकार की इतनी भी दलाली ��हीं करनी चाहिए, प्रशासन को शर्म आनी चाहिए। @PragyaLive
माननीय @DelhiPolice आपसे जनता का विश्वास उठ रहा हैं आप ही के क्षेत्र में छात्र वोट चोरी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं उनके साथ इन गुंडों द्वारा ऐसा बर्ताव किया जा रहा है. क्या आप संविधान का पालन करते हुए इन लोगों पर कड़ी कार्रवाई करोगे
या इस देश में लोकतंत्र खत्म हो गया ��ै.
चंद्रशेखर आज़ाद के ये 2 वादे 2027 के उत्तर प्रदेश चुनाव में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।
1️⃣ MP-MLA से लेकर सरकारी कर्मचारी, कांस्टेबल से लेकर IG-DIG के बच्चे भी गरीबों के बच्चों के साथ सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे।
जिससे सरकारी स्कूलों की हालत भी सुधरेगी और सभी को समान शिक्षा मिलेगी।
2️⃣ दूसरा वादा है नशामुक्त प्रदेश का। शराबबंदी, शराब से कई परिवार परेशान हैं और कई युवा नशे की लत से अपना जीवन बर्बाद कर रहे हैं।
ये दोनों वादे जनता के दिल को छू सकते हैं। अगर चन्द्रशेखर आजाद जी को इन्हें लागू करने की ताकत मिलती है, तो प्रदेश की दिशा दसा देखने लायक होगी।
@priyanshu__63 #azadsamajparty
#ASP_K_Mission2027
छह साल पहले आज ही की सुबह जब देश-दुनिया सोकर उठ रही थी, तब हाथरस से आई उस खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था। रात के अंधेरे में 2:45 बजे हाथरस की बेटी बहिन मनीषा वाल्मीकि के शव का भारी पुलिस बल द्वारा परिवार की इच्छा के विरुद्ध अमानवीय ढंग से जबरन अंतिम संस्कार करा दिया गया। जिस परिवार को अपनी बेटी को अंतिम विदाई देने का अधिकार था, उसे ही उससे वंचित कर दिया गया। यह उनके सम्मान और मौलिक अधिकारों का ग���भीर उल्लंघन था।
छह साल बाद भी मनीषा का परिवार न्याय, सुरक्षित आवास और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है। 2022 के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर अगस्त 2026 में हाईकोर्ट को फिर हस्तक्षेप करते हुए सरकार को तीन महीने के भीतर परिवार को गाजियाबाद ��ा नोएडा में पुनर्वासित करने और एक सदस्य को रोजगार देने का निर्देश देना पड़ा।
छह साल पहले मनीषा को न्याय नहीं मिला और माननीय उच्च न्यायालय के बार-बार आदेश के बावजूद छह साल बाद भी उनका परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। जिस परिवार ने अपनी बेटी खोई, उसे न्याय और सम्मान के लिए भी वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, इससे बड़ा सवाल सरकार की जवाबदेही पर और क्या हो सकता है?
बहिन मनीषा, तुम्हारे साथ हुआ अन्याय कभी नहीं भूलेंगे।
शामली : भैशानी गांव में सांसद चंद्रशेखर आजाद की जनसभा
➡️चंद्रशेखर आजाद ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
➡️भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक को लेकर लगाए आरोप
➡️नौजवान बेरोजगार घूम रहा है
➡️मस्जिदों को तोड़ने को लेकर भी सरकार पर सवाल
➡️मैं मायावती जी का सम्मान करता हूं- चंद्रशेखर
#Shamli #ChandrashekharAzad #PoliticalNews @BhimArmyChief
जिला मुजफ्फरनगर के खतौली निवासी यश कुमार सैनी के परिजनों ने कल मुझसे मुलाकात कर अपने बेटे को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। परिजनों के अनुसार, यश कुमार 27 अप्रैल 2026 को बैंकॉक के रास्ते डिलीवर�� बॉय की नौकरी के लिए रूस गए थे और बाद में उनके वोल्गोग्राद में हिरासत में लिए जाने की जानकारी परिवार को मिली।
परिवार ने आशंका जताई है कि उन्हें रोजगार के नाम पर गुमराह किया गया हो सकता है। भाषा की बाधा के कारण यश कुमार को वर्तमान परिस्थितियों में अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में भी कठिनाई हो रही है। परिजनों ने उनकी कुशलक्षेम की तत्काल जानकारी, कांसुलर एवं कानूनी सहायता तथा दुभाषिए की सुवि��ा उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
इस संबंध में मैंने माननीय विदेश मंत्री @DrSJaishankar जी को भी पत्र लिखकर मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से यश कुमार की स्थिति की तत्काल पुष्टि कराने, आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने तथा उनकी सुरक्षित रिहाई और सकुशल भारत वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।
यश कुमार क��� मामला अकेला नहीं है। करीब एक महीने पहले कानपुर के इंजीनियर चंदन गुप्ता के संबंध में भी रूस में हिरासत और रूसी सेना में शामिल होने के दबाव की जानकारी सामने आई थी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 227 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किया गया था, जिनमें 51 की मृत्यु हुई है। आजमगढ़-मऊ के 13 युवकों के मामले में भी रिपोर्ट के मुताबिक 10 की मृत्यु हुई है। कुछ परिवारों को अपने परिजनों के शव तक नहीं मिल पाए ���र उनके पास टोपी, झंडा तथा मृत्यु प्रमाणपत्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
इन घटनाओं को देखते हुए @mygovindia को रूस के समक्ष इस मुद्दे को मजबूती से उठाना चाहिए और रोजगार के लिए विदेश गए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा तथा ऐसी परिस्थितियों में फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
यश कुमार सैनी रोजगार की तलाश में रूस गए थे। उनके परिवार को अपने बेटे की सुरक्षित वापसी ���ा इंतजार है। सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
@MEAIndia
कल थानाभवन (शामली) में अपनों के बीच पहुंचे! नगीना सांसद बड़े भाई मा० @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद जी का यह महज़ कोई दौरा नहीं, बल्कि शोषितों और वंचितों के हक-अधिकार के उस अटूट भरोसे की तस्वीर है, जो संसद से सड़क तक हर जुल्म के खिलाफ दीवार बनकर खड़ा रहता है।
��ावित्रीचा संघर्ष अजूनही सुरूच आहे..!
जवळपास १८० वर्षांपूर्वी क्रांतीज्योती सावित्रीमाई फुले यांना ज्ञानदानाचा यज्ञ सुरू करण्यासाठी शेणगोळ्यांचा मारा सहन करावा लागला. "सावित्रीबाई जोतीराव फुले" मालिकेच्या माध्यमातून हा संघर्ष घराघरात पोहोचतोय.
दुर्दैवाने त्याकाळी सावित्रीबाईंनी केलेला संघर्ष आजही एका सावित्रीला सहन करावा लागतोय. शेणगोळ्यांची जागा अंड्यांनी घेतली, पण मारा कर��ारे हात आजही तेच आहेत, सावित्रीला रोखणारी प्रवृत्ती आजही तीच आहे.
पण.. सावित्री तेव्हाही थांबली नव्हती, आजही थांबणार नाही !
“राह में खतरे भी हैं लेकिन
ठहरता कौन है।
मौत कल आती है, आज आ जाए, डरता कौन है।
तेरे लश्कर के मुकाबिल में
अकेला हूँ मगर
फैसला मैदान में होगा कि
मरता कौन है।”
“मेरा दलित साथी पैसे, पढ़ाई और संस्कारों में मुझसे आगे लेकिन उसे जाति के कारण नहीं मिलता रूम”
ब्राह्मण युवक ने वीडियो में बताया भारत के शहरों में जातिगत भेदभाव का सच!
#WATCH | Lucknow, UP | Azad Samaj Party (Kanshiram) chief and MP Chandrashekhar Azad says, "We have organized a candlelight march to dispel the darkness this government has cast over the lives of Panchayat Sahayak... Our sole objective is to highlight that Panchayat Sahayak have been struggling for their demands for the past six days, and these demands are legitimate... All their demands are significant and must be met—whether it is the demand for a salary hike, state employee status, or maternity leave... We demand that the Minister for the Panchayat Department engage with them... It is concerning how the government is ignoring them... The government must answer for this... I stand in solidarity with these people..." (12.09)