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राजस्थान पुलिस में यंग प्रोफेशनल्स भर्ती: आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी
जयपुर, 6 अगस्त। राजस्थान पुलिस में विशेषज्ञ युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर डेटा आधारित, तकनीक-सक्षम और आधुनिक पुलिसिंग को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा की पहल के तहत 'यंग प्रोफेशनल्स भर्ती' के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब इच्छुक अभ्यर्थी 12 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। यह भर्ती पूर्णतः संविदा आधार पर की जा रही है।
किन पदों पर होगी भर्ती?
भर्ती के अंतर्गत कुल 5 पदों पर चयन किया जाएगा। इनमें क्राइम डेटा एनालिस्ट, नवीन न्याय संहिताओं की मॉनिटरिंग, रोड सेफ्टी, ड्रग (अवैध मादक पदार्थ) कंट्रोल तथा एआई इन पुलिसिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञ युवाओं का चयन किया जाएगा।
कैसे करें आवेदन?
इच्छुक अभ्यर्थी राजस्थान पुलिस की वेबसाइट https://t.co/bK5uLGrFjV से विस्तृत जानकारी, आवेदन फॉर्म आदि प्राप्त कर अपना आवेदन ऑफलाइन माध्यम से कमरा संख्या-217, द्वितीय तल, पुलिस मुख्यालय, लालकोठी, जयपुर–302015 में जमा कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन आवेदन ई-मेल के माध्यम से [email protected] तथा [email protected] पर भेजे जा सकते हैं।
अंतिम तिथि बढ़ाने का उद्देश्य:
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) श्री बिपिन कुमार पांडे द्वारा जारी आदेश के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 12 अगस्त 2026 तक बढ़ाई गई है, ताकि अधिक से अधिक योग्य एवं प्रतिभाशाली युवा इस भर्ती प्रक्रिया में भाग लेकर राजस्थान पुलिस के आधुनिकीकरण और नवाचार आधारित पुलिसिंग अभियान का हिस्सा बन सकें।
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साइबर सुरक्षा सलाह: असली और फर्जी कॉल की पहचान करें!
खुद को साइबर ठगों से सुरक्षित रखने के लिए ये तीन बातें ध्यान रखें:
. असली बैंक कॉल 1600 प्रीफिक्स से ही आती हैं!
. वैध बैंकिंग वेबसाइट का डोमेन .bank.in या .fin.in होता है!
. कभी भी अपना OTP या PIN किसी के साथ साझा न करें।
धोखाधड़ी का संदेह होते ही कॉल काटें और बिना देरी किए साइबर हेल्प-लाइन 1930 पर संपर्क करें।अथवा https://t.co/rXsEeqY0uF पर रिपोर्ट दर्ज करें।
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सावधान! आपकी एक लापरवाही साइबर ठगों का अवसर बन सकती है।
बैंक KYC या सरकारी योजनाओं के नाम पर आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
किसी भी अनजान WhatsApp या SMS लिंक पर क्लिक करने से बचें।
अपना OTP, PIN या बैंक विवरण किसी के भी साथ साझा न करें।
बैंक के नाम पर आए 'KYC अपडेट' वाले संदेशों पर बिना जांच किए भरोसा न करें।
सरकारी योजना या लॉटरी का झांसा देने वाले संदेशों से दूर रहें।
हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से ही जानकारी जांचें।
यदि साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तुरंत हेल्पलाइन 1930 या https://t.co/DlzOGY02R9 पर शिकायत करें।
@RajCMO@Rajeev_ips@svoruganti1466
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कानून-व्यवस्था और आपकी सुरक्षा — राजस्थान पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता!
श्री राजीव कुमार शर्मा, महानिदेशक पुलिस, राजस्थान ने उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की एवं निम्न मुख्य निर्देश दिए:
त्वरित पुलिसिंग: आमजन में सुरक्षा और विश्वास बढ़ाने के लिए संवेदनशील व त्वरित कार्रवाई।
डिजिटल निगरानी: सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों पर पैनी नज़र।
सतर्कता: अफवाहों के खंडन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे निगरानी।
आमजन से अपील है कि ज़रूरी सूचना व सहायता के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही विश्वास करें। किसी भी भ्रामक खबर की पुष्टि के बिना उसे शेयर न करें।
जिम्मेदार नागरिक बनें, सुरक्षित समाज का निर्माण करें।
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प्रशिक्षण की गुणवत्ता को नई दिशा: राजस्थान पुलिस अकादमी एवं राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का संयुक्त तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न
जयपुर, 31 जुलाई। राजस्थान पुलिस में प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और अधिक प्रभावी, आधुनिक एवं परिणामोन्मुख बनाने के उद्देश्य से राजस्थान पुलिस अकादमी (आरपीए), जयपुर तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में 'ट्रेनिंग नीड एनालिसिस' विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 29 से 31 जुलाई, 2026 तक राजस्थान पुलिस अकादमी में किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उप महानिरीक्षक पुलिस एवं अतिरिक्त निदेशक, राजस्थान पुलिस अकादमी श्री शंकर दत्त शर्मा रहे। इस अवसर पर राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के प्रो-वाईस चांसलर श्री कल्पेश वांड्रा तथा डीन (एक्रेडिटेशन) श्री अविनाश खरेल ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और पुलिस प्रशिक्षण के बदलते स्वरूप, आधुनिक आवश्यकताओं तथा प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सतत सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
अपने संबोधन में श्री शंकर दत्त शर्मा ने कहा कि सिस्टमैटिक ट्रेनिंग अप्रोच (Systematic Training Approach) का सबसे महत्वपूर्ण आधार ट्रेनिंग नीड एनालिसिस है। प्रशिक्षण आवश्यकताओं की वैज्ञानिक पहचान के बिना प्रभावी प्रशिक्षण की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि राजस्थान पुलिस अकादमी देश के अग्रणी पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों में अपना विशिष्ट स्थान रखती है और ऐसे नवाचारपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पुलिसिंग की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार लाएंगे।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने राजस्थान पुलिस अकादमी के 42 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण आवश्यकताओं के विश्लेषण, प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास, आधुनिक शिक्षण तकनीकों, मूल्यांकन प्रणाली तथा क्षमता निर्माण से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक एवं सहभागितापूर्ण प्रशिक्षण प्रदान किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श एवं अनुभव साझा किए गए, जिससे प्रशिक्षण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं परिणाम-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
उल्लेखनीय है कि महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के मार्गदर्शन तथा राजस्थान पुलिस अकादमी के निदेशक श्री संजीव कुमार नार्जारी के निर्देशन में राजस्थान पुलिस अकादमी एवं राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के मध्य पिछले कुछ समय से प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं क्षमता निर्माण से संबंधित अनेक संयुक्त गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं।
इसी क्रम में राजस्थान पुलिस अकादमी के प्रशिक्षक पुलिस निरीक्षक श्री धीरज वर्मा को मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आयोजित पुलिस महानिदेशकों के सम्मेलन में अपने 100 घंटे के सामुदायिक सहभागिता अनुभव एवं सुरक्षा संबंधी विभिन्न आयामों को प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय भेजा गया था। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों द्वारा राजस्थान पुलिस अकादमी के विभिन्न प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के अद्यतन एवं आधुनिकीकरण का कार्य भी किया गया है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर दोनों संस्थानों ने भविष्य में भी पुलिस प्रशिक्षण, अनुसंधान, क्षमता निर्माण तथा आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संयुक्त रूप से कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह सहयोग राजस्थान पुलिस के प्रशिक्षण तंत्र को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी
• RPSC भर्ती पोर्टल प्रकरण के बाद साइबर क्राइम शाखा ने शैक्षणिक संस्थानों और संगठनों को किया सतर्क, वेब पोर्टल की सुरक्षा मजबूत करने की अपील
जयपुर, 31 जुलाई। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने संस्थागत वेब पोर्टल्स की सुरक्षा को लेकर विस्तृत साइबर एडवाइजरी जारी करते हुए शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी एवं निजी संगठनों को अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने की सलाह दी है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि हाल ही में आरपीएससी भर्ती पोर्टल से जुड़े प्रकरण में पोर्टल में अनधिकृत प्रवेश कर राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षा के परिणाम, अभ्यर्थियों की वरीयता सूची एवं आवेदन संबंधी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का मामला सामने आया, जिसमें अजमेर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस घटना के मद्देनज़र संस्थागत वेब पोर्टलों की सुरक्षा को और मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है।
पोर्टल्स में पाई जाने वाली 4 मुख्य तकनीकी कमजोरियां :
° यूजर द्वारा URL या Request में मौजूद ID (जैसे id = 1001) बदलकर दूसरे यूजर का डेटा देखना, जब सर्वर पर अनुमति की जांच नहीं होती।
° लॉगिन फॉर्म या सर्च बॉक्स में गलत SQL कमांड डालकर डेटाबेस को सीधे प्रभावित करना, जिससे साइबर अपराधी डेटाबेस से जानकारी पढ़, बदल या मिटा सकते हैं।
° संवेदनशील कार्य (जैसे पासवर्ड बदलना/रीसेट करना) करते समय वर्तमान पासवर्ड या सेशन की पुष्टि न होना।
° लॉगिन, ओटीपी या पासवर्ड रीसेट पर सीमित प्रयासों की पाबंदी न होना, जिससे ऑटोमेटेड टूल्स के जरिए लाखों बार पासवर्ड का अनुमान लगाया जा सकता है।
साइबर अपराधियों के काम करने का तरीका:
° साइबर अपराधी सबसे पहले HTTP रिक्वेस्ट और URL में कमजोरियों (जैसे recordID=501) की पहचान करते हैं।
° इसके बाद बॉट्स/स्क्रिप्ट्स के जरिए अलग-अलग IDs भेजकर सिस्टम की परमिशन चेकिंग का परीक्षण करते हैं।
° सुरक्षा में चूक मिलते ही अनधिकृत कमांड चलाकर संवेदनशील डेटा चुरा लेते हैं या रिकॉर्ड बदल देते हैं।
बचाव एवं सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय:
° प्रत्येक रिक्वेस्ट पर सर्वर-साइड ऑथराइजेशन जांचें। क्रमिक IDs (Sequential IDs) के स्थान पर UUID / GUID (रैंडम आइडेंटिफायर्स) का उपयोग करें
° Prepared Statements, Parameterized Queries या ORM Framework का उपयोग करें। फॉर्म, URL, XML व JSON आदि सभी इनपुट की सर्वर-साइड वैलिडेसन (Validation & Sanitization) करें।
° पासवर्ड बदलने से पूर्व वर्तमान पासवर्ड की री-वेरिफिकेशन mandatory करें तथा संवेदनशील कार्यों के लिए Multi-Factor Authentication (MFA) लागू करें।
° लॉगिन, ओटीपी और पासवर्ड रीसेट पर सीमित प्रयासों की सीमा तय करें तथा बार-बार असफल प्रयासों पर अकाउंट को अस्थायी रूप से लॉक करें।
साइबर आपातकाल में यहाँ करें संपर्क:
किसी भी प्रकार की साइबर सुरक्षा सेंधमारी या धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल निकटतम पुलिस स्टेशन / साइबर पुलिस स्टेशन या साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल https://t.co/y8cYaY5Rrg पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर तुरंत सूचित करें।
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हर जीवन का सम्मान, शोषण मुक्त राजस्थान!
मानव तस्करी—इंसानी स्वतंत्रता और गरिमा पर सीधा प्रहार है।
राजस्थान पुलिस प्रतिबद्ध है हर पीड़ित को न्याय दिलाने और शोषण मुक्त समाज के निर्माण के लिए।
आपकी एक सजग दृष्टि किसी मासूम की जिंदगी बचा सकती है। संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।
सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। आपात स्थिति में 112 या 1098 (चाइल्ड लाइन) पर संपर्क करें।
जागरूक नागरिक, सुरक्षित राजस्थान। आइए, मिलकर मानव तस्करी के विरुद्ध आवाज़ उठाएं।
मानव तस्करी समाज पर एक कलंक है। आइए, विश्व मानव तस्करी निषेध दिवस (30 जुलाई) पर हर इंसान की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा का संकल्प लें।
#WorldDayAgainstTraffickingInPersons #AntiHumanTrafficking #RajasthanPolice
🫶 ऑपरेशन स्माइल | संवेदनशील पुलिसिंग की ओर एक सार्थक पहल 🤝
उदयपुर रेंज पुलिस द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से ऑपरेशन स्माइल के अंतर्गत “ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार, समानता एवं संवेदनशील पुलिसिंग” विषय पर रेंज स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, आधुनिक और जन-उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल!
दिनांक 29-30 जुलाई 2026 को श्री रूपिंदर सिंघ, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, आर्म्ड बटालियनस एवं S.D.R.F. ने अजमेर रेंज का विस्तृत दौरा किया। इस दौरान डॉ. रवि, आई.जी.पी., अजमेर रेंज एवं श्री हर्षवर्धन अग्रवाला, पुलिस अधीक्षक, अजमेर सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
दौरे की प्रमुख गतिविधियां आयोजित की गई जिनमें:
कानून-व्यवस्था समीक्षा: क्राइम मीटिंग लेकर अपराध नियंत्रण व त्वरित न्याय के निर्देश दिए।
साइबर एवं महिला सुरक्षा: साइबर थाना तथा हाड़ी रानी महिला बटालियन का निरीक्षण कर संपर्क सभा आयोजित की।
उत्कृष्ट सेवा का सम्मान: सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
पर्यावरण संरक्षण: श्री रूपिंदर सिंघ, अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, आर्म्ड बटालियनस एवं S.D.R.F. द्वारा गोद लिए थाना गांधीनगर परिसर में पौधारोपण कर 'हरित एवं सुरक्षित राजस्थान' का संदेश दिया एवं निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, श्री सिंघ ने थाना परिसर का निरीक्षण करने के बाद अनुसंधान अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों की बैठक लेकर विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान और प्रत्येक पीड़ित को न्याय दिलाना ही हमारी प्राथमिकता और जिम्मेदारी है।
पुलिस और जनता के आपसी सहयोग से ही एक सुरक्षित एवं अपराध-मुक्त राजस्थान का निर्माण संभव है।
राजस्थान पुलिस — सुरक्षा, सेवा और जन-विश्वास के प्रति निरंतर समर्पित।
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एसआई परीक्षा-2025: ई-प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में आ रही समस्या? पुलिस भर्ती बोर्ड ने जारी किए विशेष हेल्पलाइन नंबर
• 3 से 13 अगस्त तक 7 रेंज मुख्यालयों पर आयोजित होगी शारीरिक दक्षता परीक्षा; अभ्यर्थियों की सहायता के लिए फोन नंबर व ईमेल जारी
जयपुर 29 जुलाई। राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर द्वारा आयोजित उप निरीक्षक/प्लाटून कमाण्डर संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा-2025 की शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के ई-प्रवेश पत्र जारी कर दिए गए हैं। प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के दौरान अभ्यर्थियों को आ रही किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या के त्वरित समाधान के लिए पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड ने हेल्पलाइन व संपर्क नंबर जारी किए हैं।
उप महानिरीक्षक पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड श्री मनोज कुमार ने बताया कि ई-प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में समस्या होने पर अभ्यर्थी निम्नलिखित नंबरों और ईमेल पर तुरंत संपर्क कर सकते हैं:
1. राजकॉम हेल्पलाइन नंबर: 7340557555 / 9352323625
2. विभाग के संपर्क नंबर: 0141-2821595
3. मोबाइल नंबर: 9413800328
4. ईमेल आईडी: [email protected]
उल्लेखनीय है कि लिखित परीक्षा में सफल रहे अभ्यर्थियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा 03 अगस्त से 13 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन प्रातः 05:00 बजे से राज्य के 7 रेंज मुख्यालयों जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, बीकानेर एवं उदयपुर पर आयोजित की जा रही है।
अभ्यर्थी आधिकारिक वेब पोर्टल https://t.co/NR41OjTVC2 पर अपनी एसएसओ आईडी से लॉग-इन कर 'रिक्रूटमेंट पोर्टल' से प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
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कृषि कारोबार के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, उत्तर प्रदेश का आरोपी गिरफ्तार
• फर्जी एग्रीकल्चर कंपनी बनाकर किसानों को बनाते थे शिकार, दर्जनभर से अधिक थानों में दर्ज हैं प्रकरण
जयपुर, 29 जुलाई। बारां जिले की छबड़ा थाना पुलिस ने किसानों से कृषि परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए गिरोह के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार था और उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों के दर्जनभर से अधिक थानों में प्रकरण दर्ज हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने बताया कि वर्ष 2023 में छबड़ा क्षेत्र के चार किसानों ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कुछ लोगों ने 'फार्मर एग्रो सॉल्यूशन' नाम से फर्जी कंपनी बनाकर फलदार पौधों के बगीचे, पॉलीहाउस स्थापित करने तथा जैविक खाद की एजेंसी दिलाने का झांसा दिया। आरोपी उन्हें विश्वास में लेकर नगद एवं चेक के माध्यम से करीब ₹12.50 लाख की ठगी कर फरार हो गए।
फर्जी नाम-पते और मोबाइल नंबरों का किया इस्तेमाल:
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सौरभ तिवाड़ी के सुपरविजन तथा वृत्ताधिकारी ताराचंद के निर्देशन में थानाधिकारी राजेश खटाना के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान सामने आया कि एफआईआर में दर्ज नाम, पते और मोबाइल नंबर पूरी तरह फर्जी थे। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान, खुफिया सूचना और लगातार निगरानी के आधार पर गिरोह के वास्तविक सदस्यों की पहचान की।
पंजाब से दबोचा गया आरोपी:
विशेष टीम ने गिरोह के सदस्य रघुनाथ पुत्र रामगणेश गुप्ता निवासी बस्ती उत्तर प्रदेश हाल निवासी लुधियाना पंजाब को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
किसानों को कृषि योजनाओं का लालच देकर करते थे ठगी:
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी कृषि कंपनियां बनाकर किसानों को आधुनिक खेती, पॉलीहाउस, फलदार पौधों के बगीचे तथा जैविक खाद की एजेंसी दिलाने का झांसा देता था। इसके लिए फर्जी बैंक खाते, फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान का उपयोग किया जाता था। विश्वास जीतने के बाद किसानों से बड़ी रकम वसूल कर आरोपी फरार हो जाते थे।
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