जिस्म को उस दर्द का इंतज़ार था,
वो आज मेरे करीब था, पास था,
सांसों की लहर बढ़ती रही,
मैं कुछ ऐसे एहसास में, उसी में डूबती रही,
वक़्त ना सुबह का था, ना शाम थी,
बेसब्र दिलो की वो बात थी, हाए! वो क्या रात थी।
-दिशा खंडेलवाल 🌸(2nd May 2024) (18:32)
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@RealisticPoetry इश्क़ न जन्नत से उतरा,
न घने बादल बन बरसा है;
वो तो ग़ैर-फ़ानी आग की तरह
कभी दीया, तो कभी ज्वाला है;
आ! इस आग को पानी करदे,
मेरे इश्क़ को इसी रोज़ रूहानी करदे।
दिशा खंडेलवाल 🌸
(10th July 2023) (21:03)
"ae hawa, tu kaha chala,
yun murjhaye,
pile patton ko saath lekar?
kuch mere khwaabon ki
taazi pankhudiyaan bhi,
tere saath ho chali,
baadlon ke sang behne."
- Dish Khandelwal 🌸
(9th January 2023) (21:03)
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