स्वतंत्र भारद्वाज की गुंडागर्दी को लेकर ABP न्यूज की महिला पत्रकार प्रतिमा मिश्रा की ज़बरदस्त रिपोर्टिंग ,
चित्रा त्रिपाठी भी ABP न्यूज की एंकर है और प्रतिमा मिश्रा भी ABP न्यूज की एंकर है , फर्क इतना है कि प्रतिमा मिश्रा ईमानदारी से रिपोर्टिंग करती है ,
25yo MURDER SUSPECT BEATEN with MASSIVE STICK by cops in public
HE REPEATEDLY KICKED his PARTNER — SHE DIED after SEVERE KIDNEY INJURIES
COPS: ‘We beat him to set an example that crime against women will be taken SERIOUSLY’
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 115 साल पुरानी मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा की, वे सिर्फ यह चुनाव जीतने के लिए मस्जिदें गिरा रहे हैं, दरगाहों और कब्रिस्तानों को नष्ट कर रहे हैं। वे सिर्फ मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं।
कलेक्टर ऑफिस बनने से बहुत पहले से ही वहां मस्जिद मौजूद थी। BJP, RSS, प्रधानमंत्री ��र इस मुख्यमंत्री के मन में मस्जिदों के प्रति नफरत है। इसीलिए आज कानून का उल्लंघन करते हुए और संविधान का मजाक उड़ाते हुए यह कार्रवाई की गई है।
जिस गुजराती 'न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी' को 290 करोड़ का चंदा मिला है
उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित चतुर्वेदी का गुजरात CM के साथ फोटो वायरल, BJP की जीत पर लड्डू बांटते हुए दिखाई दिया !
Around 50 US military officials have taken polygraph (lie detector) tests over leaked information about declining US ammunition stocks during the war with Iran.
Trump warned that those who leaked information about US ammunition stocks could face long prison sentences.
IRGC struck 3 tankers off the coast of Oman in retaliation for the US attack on 3 Iranian vessels.
Tanker war is escalating rapidly across the Persian Gulf and Gulf of Oman.
Neither side appears willing to back down, and the tanker war is continuing to escalate.
⚡️BREAKING: The IRGC announced the Targeting of Three Oil Tankers linked to the United States in the Strait of Hormuz
This came as Retaliation after the U.S. struck Three Iranian Oil Tankers earlier in the Day
BBC की पड़ताल ने ₹620 करोड़ के कथित चंदे पर गंभीर ���वाल खड़े किए हैं। पैसा किसने दिया, क्यों दिया और गया कहाँ?
विपक्ष के पीछे ED-IT-CBI छोड़ने वाली भाजपा बताए कि यहाँ एजेंसियां खामोश क्यों हैं? @BBCHindi की इस खोजी पत्रकारिता ने वह काम किया, जो करोड़ों का दाना खाकर गाना गाने वाले चैनल नहीं कर पाए।
क्या राजनीतिक चंदा काले धन को सफेद करने की नई ‘वॉशिंग मशीन’ बन गया है? अगर सब पाक-साफ़ है तो जांच कराइए और ₹620 करोड़ की पाई-पाई का ��िसाब देश को दीजिए।
अभी तो कुछ ही दिन हुए हैं जब मोहन भागवत जी ने भारत में धार्मिक सद्भाव की बातें की थीं । हमें तो तब भी विश्वास नहीं हुआ था अै���र अब तो जो हो रहा है वो देश अैार दुनिया देख ही रही है ।
Breaking News
अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन जहाज़ों को तबाह कर उसका वीडियो जारी किया। कहा हमारे दो जहाज़ों पर गोली चलाने का नतीजा। चेतावनी दी कि आगे हमला किया तो और पड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।
गुजरात में कुछ ऐसी अनाम पार्टियां हैं जिनका नाम किसी ने नहीं सुना - लेकिन 4300 करोड़ का चंदा मिला!
इन पार्टियों ने बहुत ही कम मौकों पर चुनाव लड़ा है, या उनपर खर्च किया है।
ये हजारों करोड़ आए कहां से? चला कौन रहा है इन्हें? और पैसा गया कहां?
क्या चुनाव आयोग जांच करेगा - या फिर यहां भी पहले एफिडेविट मांगेगा? या फिर कानून ही बदल देगा, ताकि ये डेटा भी छिपाया जा सके?
#VoteChori
अच्छा मान लीजिए जो हरकत स्वतंत्र भारद्वाज ने की है वही किसी मुस्लिम लड़के ने की होती तो ये चैनल उसे कार्यकर्ता कहते या जिहादी?
फिर इन चैनलों को दलाल मीडिया कहने पर बुरा क्यों लगता है?
नमाज़ पढ़ना इतना बड़ा गुनाह हो गया ? अगर सर्किट हाउस परिसर में एक सड़क पर 3-4 मिनट नमाज़ पढ़ लिया तो FIR ?
अभी अभी सावन बीता है . हुड़दंग से लेकर मारपीट और हंगामा सब हमने देखा है . पुलिस वालों को औक़ात दिखाते कांवड़ियों को भी देखा है .
सहारनपुर कलेक्ट्रेट में स्थित प्राचीन मस्जिद का ध्वस्तीकरण अत्यंत अफसोसजनक है। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं तो उनके लागू करने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है? आज बुलडोजर न्याय की निशानी कम और बदले, भेदभाव और नफरत की राजनीति का हथियार बनता जा रहा है।
यह मामला केवल एक मस्जिद का नहीं, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता, नागरिक समानता और राज्य की निष्पक्ष भूमिका का सवाल है।
1991 का Places of Worship Act आज भी मौजूद है। इसी तरह नए वक्फ कानून में भी “वक्फ बाई यूजर” की धारा मौजूद है। यह मस्जिद वक्फ बोर्ड में दर्ज है जिसका नंबर 451 है। जबकि जमीन के पुराने रिकॉर्ड में याकूब खान और वहीद खान के से जमीन दर्ज हैं। मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 से संबंधित दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करके यह पक्ष रखा था। ऐसे ऐतिहासिक और कानूनी साक्ष्यों को नजरअंदाज करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई न्याय की उसूलों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अगर अवैध कब्जा या अतिक्रमण ही कार्रवाई का मापदंड है तो यही मापदंड हर धर्म और हर वर्ग के लिए समान होना चाहिए। देश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी जमीनों, सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर दशकों से मौजूद दूसरी धार्मिक निर्माणों के खिलाफ भी क्या प्रशासन इसी जल्दबाजी, सख्ती और मापदंड से कार्रवाई करता है? अगर नहीं, तो किसी एक धार्मिक स्थल के खिल���फ असाधारण सख्ती समान न्याय के सिद्धांत के विपरीत महसूस होती है।
भारत किसी एक धर्म या वर्ग का नहीं, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी धर्मों को मानने वालों का साझा वतन है। संविधान ने किसी को पहले और किसी को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं बनाया है।
हम किसी विशेष रियायत के इच्छुक नहीं हैं, केवल समान न्याय चाहते हैं। हमारा सवाल सीधा है: जो कानून मस्जिद के लिए है, वही हर ध��र्मिक स्थल के लिए क्यों नहीं? जो मापदंड मुसलमान के लिए है, वही दूसरे नागरिक के लिए क्यों नहीं? संविधान और कानून अगर सभी के लिए हैं तो उनका संरक्षण और लागू करना भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
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