MP वर्ग-2 और वर्ग-3 के चयनित शिक्षक अभ्यर्थी ,
जिन्होंने 2025 में सिलेक्शन Clear किया,
2026 चल रह�� है फिर भी joining का इंतजार ! .
@DrMohanYadav51 ये युवा आज क्यों सड़कों पर तड़प रहे हैं? सिर पर पट्टी बाँधे, घुटनों के बल रेंगते हुए
कितना और समय लगेगा इनके सपनों को पूरा करने में?
क्या जिम्मेदारों को इनकी पीड़ा का अंदाज़ा भी है? या सत्ता की कुर्सी पर बैठकर ये आवाज़ें अब सुनाई ही नहीं देतीं ?
#HonourKilling A 19-year-old woman, Shivani Chauhan, was allegedly stabbed to death by her father, Satya Kumar Chauhan, inside the Badausa Police Station in Uttar Pradesh's Banda district.
Shivani had married Lalit Verma, a Dalit man, against her family's wishes. During a counselling session at the police station, she reportedly reaffirmed her decision to live with her husband despite familial opposition.
Shortly thereafter, her father allegedly attacked her with a knife inside the police station premises. Shivani was rushed to a hospital for treatment but later succumbed to her injuries.
जातिवाद ने फिर एक दलित की जान ले ली। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 17 साल के दलित लड़के केतन लाल की बर्बर हत्या कर दी गई। जल्द एक ग्राउंड रिपोर्ट #JusticeForKetan
In Shivpuri, Madhya Pradesh, Rajni Dhakad and Santosh Jatav were in love and fled to Gujarat on June 7 with the intention of getting married. On June 11 the young woman's brother and other relatives arrived in Gujarat with the police and the couple was located and taken into custody.
While they were being brought back from Gujarat to Madhya Pradesh, the young woman's throat was slit, resulting in her death, and the young man's throat was also slashed, he is currently undergoing medical treatment.
The police have claimed that Santosh Jatav slit Rajni's throat and then attempted to take his own life.
We demand a CBI inquiry into this matter, this is a case of honor killing and the role of the police is suspicious. It was the woman's relatives who killed her and the young man Santosh Jatav who belongs to the Dalit community, is being framed.
राजस्थान के हजारों युवाओं की एक ही माँग
धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दो!
क्या ये सरकार युवाओं को सुन पा रही हैं? @dpradhanbjp
ये सभी लोग 20 जून को दिल्ली आ रहे हैं!
Abhijeet Deepke, founder of the Cockroach Janata Party, was reportedly slapped by manuwadi individuals during a protest in Jaipur.
We condemn this attack and demand that the government immediately provide Z+ security cover.
बिहार में मद्य निषेध सिपाही कि 4200 से ज्यादा पदों की भर्ती परीक्षा के दौरान पाटलीपुत्र स्टेशन पर जो अव्यवस्था और हाहाकार देखने को मिला, वह बेहद शर्मनाक है। जब सरकार और प्रशासन को पहले से पता होता है कि लाखों अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा है
तो लॉजिस्टिक्स और पर्याप्त ट्रेनों की व्यवस्था किए बिना, जब आप अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्रों को उनके गृह जनपदो से सैकड़ों किलोमीटर दूर (38 जिलों में) फेंकेंगे, तो स्टेशनों पर ऐसा जनसैलाब और अराजकता होना लाज़मी है। ट्रेनों की लेटलतीफ़ी और इस कुप्रबंधन के कारण हज़ारों विद्यार्थियों की परीक्षा लेट हो गई या पूरी तरह से छूट गई। उनके सालों की मेहनत और पैसों की बर्बादी का ज़िम्मेदार आखिर कौन है,
लाखों युवाओं को उनके नसीब पर छोड़कर, ट्रेनों के इंजनों पर चढ़ने को मजबूर कर के क्या हम ऐसे 'विश्व गुरु' बनेंगे साहब? परीक्षा कराने का मतलब सिर्फ टेंडर निकालना नहीं, बच्चों को सुरक्षित सेंटर तक पहुँचाने की जवाबदेही लेना भी होता है।
#BiharPoliceExam #SystemFailure #PatnaRailwayStation
प्रीमियम लेते समय सब कुछ कवर होता है।
क्लेम के समय कुछ भी कवर नहीं होता।
मैं इस विषय को गंभीरता से उठाता रहा हूँ और अब समय आ गया है कि अदालतें भी देखें कि बीमा कंपनियाँ उपभोक्ताओं के साथ कितना न्याय कर रही हैं।
हम इस मामले में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की दिशा में आ��े बढ़ेंगे।
#Horrific A shocking incident of caste-based humiliation has emerged from Champawat, Uttarakhand, where a Dalit taxi driver was publicly disgraced by a group of upper(ed)-caste men, who forced him to wear a garland of shoes.
His only "offence" was offering rides at lower fares, which angered some rival taxi operators. #DalitLivesMatter
SSC, DoPT (Department of Personnel & Training) के अधीन आता है और वर्तमान में केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में Jitendra Singh इस विभाग को देखते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह जी @DrJitendraSingh SSC के लाखों अभ्यर्थी न्याय चाहते हैं।
कैंडिडेट"- किसी का बेटा है, किसी की बेटी है, किसी परिवार की उम्मीद है।
व्यवस्था से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं। 💔
एक बार इनकी भी सुन लीजिए।
दिल❤️ की आवाज़ है - Must read ||
अच्छा सोचेगा भारत, तभी तो अच्छा करेगा भारत।
लेकिन सोच अच्छी कैसे होगी?
जब हम अधिकांश मिलावटी खाना खा रहे है ।
शरीर को पोषण मिलेगा कैसे ?
दिमाग कैसे विकसित होगा ? Fresh feel होगा ?
उसके बाद स्कूल में सालो से वही किताबें रटवा दी जा रही है।
संस्कार, नागरिकता की समझ, व्यवहार, संविधान की बुनियादी जानकारी, वित्तीय साक्षरता, तकनीक, व्यावहारिक कौशल- जिन चीज़ों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है,
वो है ही न्ही - जीवन जीना कहाँ से सीखेगा ?
फिर बच्चा मेहनत करके पढ़ ले तो अच्छे कॉलेज की दौड़ में हार जाता है ।
कॉलेज मिल जाए तो डिग्री की चिंता,डिग्री मिल जाए तो नौकरी की चिंता,
नौकरी मिल जाए तो stability की चिंता।
एक इंसान अपनी पूरी जवानी सिर्फ़ खुद को साबित करने में लगा दे रहा है।जिस ecosystem को उसे आगे बढ़ाने के लिए बनना चाहिए था- वो देश बना ही नहीं पाया |
इस विफलता के लिए केवल एक सरकार जिम्मेदार नहीं है।
इसमें दशकों की राजनीति, सुस्त नौकरशाही, दूरदृष्टि की कमी,
और उन तमाम प्रभावशाली लोगों , मीडिया की भी जिम्मेदारी है जो समस्याओं को हल करने से ज्यादा उन्हें छिपाने में लगे रहे ।
सबसे दुखद बात ये है कि लोग पहले निराश हुए और अब हताश हो चुके हैं।इतने ढल चुके है कि उन्हें समस्याएँ अब समस्याएँ लगती ही नहीं।
पेपर लीक? चलता है।
बेरोज़गा���ी? चलता है।
खराब स्कूल? चलता है।
अस्पतालों की बदहाली? चलता है।
प्रदूषण? चलता है।
यही “चलता है” ने पूरे समाज को रोक दिया ।
सब यही कहने सुनने लगे है कि
“इस देश का कुछ नहीं हो सकता।”
मैं पूछता हूँ…क्यों नहीं हो सकता?
क्या इस देश में talent की कमी है?
क्या इस देश में मेहनत करने वालों की कमी है?
क्या इस देश में सपने देखने वालों की कमी है?
नहीं।
कमी इतनी है कि हमने सवाल पूछना कम करते च���े गए।
हमने अपने अधिकारों को मांगना छोड़ दिया ।
हमने व्यवस्था से जवाब लेना छोड़ दिया ।
देशभक्ति केवल झंडा लगाने का नाम नहीं है।
देशभक्ति ये भी तो है कि
जब शिक्षा कमजोर हो रही हो तो आप आवाज़ उठाएँ।
जब अस्पतालों की हालत खराब हो तो आप सवाल पूछें।
जब युवाओं का भविष्य खतरे में हो तो आप चुप न रहें।
जब व्यवस्था गलती करे तो उसकी आलोचना की जाये
क्योंकि अंधा समर्थन देश प्रेम नहीं होता।
सुधार की मां��� करना राष्ट्रप्रेम है।
मुझे उस देशभक्ति पर भरोसा है
जो देश को बेहतर बनाना चाहती है,
न कि हर कमी पर पर्दा डालने वाली।
क्योंकि "मेरा देश" कोई नारा नहीं है।
यह करोड़ों बच्चों के सपने हैं , उम्मीदें हैं।
यह उन माता-पिता की आँखों का विश्वास है
जो अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य चाहते हैं।
और जब तक यह विश्वास जिंदा है, तब तक मेरा दिल कभी यह मानने को तैयार नहीं होगा
“इस देश का कुछ नहीं हो सकता।”
नहीं।
इस देश का बहुत कुछ हो सकता है।
बस हम समस्याओं को normal मानन��� बंद करें,
और समाधान मांगना शुरू करें।
क्योंकि देशभक्ति देश को बेहतर बनाने की जिद से पैदा होनी चाहिए । 🇮🇳❤️
छुट्टी का अर्थ क्या है?
विदेश यात्राएँ भी, मंदिर दर्शन भी, लक्षद्वीप के समुद्र तट भी देखे गए, समुद्र के भीतर की तस्वीरें भी आईं।
अगर विदेश यात्रा, धार्मिक यात्रा, समुद्र तट पर जाना, प्रकृति के बीच समय बिताना, अच्छा भोजन करना और आराम करना भी छुट्टी नहीं है,
तो फिर मुझे लगता है इस देश में कोई भी छुट्टी नहीं ले रहा।
हर आदमी काम ही ��र रहा है - कोई मनाली में काम कर रहा है, कोई गोवा में, कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के साथ।
2014 से 2026 के बीच प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हुए। असली बहस यह है कि इन दौरों से भारत को कितना निवेश मिला, कितने रोजगार बने और व्यापार हितों को कितना लाभ हुआ?
देश का आम आदमी नहीं देखता कि नेता ने कितने घंटे काम किया, वह देखता है कि उसके जीवन में क्या बदला।
जिस युवा का पेपर लीक हो गया, जिस किसान को फसल का दाम नहीं मिला, जिस मरीज को अस्पताल में बेड नहीं मिला, जिस परिवार की नौकरी चली गई - उसे 18 घंटे और 20 घंटे के से क्या फर्क पड़ता है?
18 घंटे काम कर��े का काम का परिणाम क्या निकला? शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, न्याय और नागरिक सुरक्षा के मोर्चे पर देश कहाँ पहुँचा।
युवा पूछ रहा है कि डिग्री के बाद नौकरी कब मिलेगी?
आम आदमी भी अपनी नौकरी में भी 12-14 घंटे खटता है, मजदूर धूप में पूरा दिन काम करता है, किसान बिना रविवार के खेत में उतरता है।
सवाल यह नहीं कि किसने कितने घंटे काम किया। सवाल यह है कि उस काम का परिणाम क्या निकला।
अगर काम का पैमाना सिर्फ घंटे हैं, तो इस देश का सबसे बड़ा कर���मयोगी शायद वह मजदूर है जो रोज़ दो वक्त की रोटी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देता है।
मनु के बच्चों को चेलेंज, 🔥🔥🔥
BN Rao के नाम पर इससे आधी भीड़ भी इकठ्ठा कर दी तो हमेशा के लिए सोशल मीडिया छोड़ देंगे,
बाबासाहेब अंबेडकर राष्ट्रनायक है उनके नाम से जनसैलाब उमड़ता है, जय भीम 🔥🔥
पुणे में काकरोचो ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ�� मांगने के लिए एकजुट होकर आंदोलन किया।