#Bundi : टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आज शिक्षक करेंगे आक्रोश प्रदर्शन
18 जून को दोपहर 3 बजे आजाद पार्क से कलेक्ट्रेट तक निकाली जाएगी रैली, प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षामंत्री के नाम जिला कलक्टर को सौंपा जाएगा ज्ञापन, वर्ष 2010 से पूर्व निय��क्त शिक्षकों के सेवा अधिकारों की रक्षा की उठाई जाएगी मांग, टीईटी अनिवार्यता से सेवा, वरिष्ठता एवं पदोन्नति अधिकार प्रभावित होने का शिक्षकों का आरोप, शैक्षिक महासंघ ने जिले के शिक्षकों से अधिकाधिक संख्या में शामिल होने की अपील की
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आशाशाह देवपुरा ने बालक उदयसिंह को प्रश्रय देकर अपना राणा माना। महाराणा उदय सिंह का विवाह कुंभलगढ़ में ही अखेराज सोनीगरा की लड़की जयवनता बाई से हुई। जयवंता बाई की कोख से यह पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम प्रताप रखा गया।
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दिवेर स्मारक: मेवाड़ के गौरव का प्रतीक
1582 के दिवेर युद्ध में महाराणा प्रताप की मेवाड़ी सेना ने अकबर की मुगल सेना को हराया।अजमेर तक भागी मुगल सेना के 36000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया।
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महाराणा प्रताप केवल इतिहास के पात्र नहीं, बल्कि भारतीय पीढीयों के लिए एक आदर्श है, जो उन्हे आपने पूर्वजो एवं इतिहास के प्रति आत्मबोध की अनुभूति करवाते है।#HaldighatiVijay450
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लोहासिंह एवं भादराजून अभिलेख (१५७६-१५७७ ई.) के अनुसार युद्ध के अगले महीनों, वर्षों के भीतर महाराणा प्रताप द्वारा आसपास के गांवों में ताम्रपत्र और भूमि सुधार संबंधी प्रशासनिक आदेश जारी किए,जो उनके हल्दीघाटी विजय को दर्शाता है।
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राणा पुंजा ने भी तीन कमान धारी भीलों को साथ लेकर महाराणा प्रताप को वचन दिया कि वह भी मेवाड़ की रक्षा के लिए उनके साथ है। राणा पूजा के नेतृत्व में हल्दीघाटी युद्ध के दौरान छापामार युद्ध नीति से मुगल सेना क��� परास्त किया। #HaldighatiVijay450
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वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने न केवल अपने शौर्य से, बल्कि कुशल नेतृत्व से भी मेवाड़ को दो दशक तक शांतिपूर्ण रखा।"
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महाराणा प्रताप ने प्रभु श्री राम के आदर्शों को अपनाते हुए महल छोड़ वनवास को चुना और समाज को एकजुट कर मेवाड़ की अस्मिता के लिए संग्राम चुना।#HaldighatiVijay450
इतिहासकारो की खोज के अनुसार #हल्दीघाटी_युद्ध के बाद अगले 1 साल तक महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी के आसपास के गांव की जमीनों के पट्टों के रूप में ताम्रपत्र जारी किए थे जिन पर एकलिंग नाथ दीवान महाराणा प्रताप द्वारा प्रमाणित हस्ताक्षर भी थे। #HaldighatiVijay450
जब मुगल सेना #मेवाड़ पर चढ़ आई, तब सरदार राणा पुंजा ने हजारों भील योद्धाओं के साथ #महाराणाप्रताप का साथ निभाया। यह मेवाड़ के नगर-ग्राम के वन-पहाड़ निवासियों में अटूट संबंध का प्रतीक है। #HaldighatiVijay450
रावत कृष्ण दास चुंडावत और जयमल राठौड़ ने प्रताप को शस्त्र विद्या सिखाई। मेवाड़ मुगल संघर्ष में महाराणा प्रताप के साथ साथ जनजाति समाज भी बलिदान देने में कहीं पीछे नहीं रहा।
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हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर उदयपुर में आयोजित राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
📍 चेतक सर्किल, उदयपुर
🎙 मुख्य वक्ता: डॉ मोहन भागवत जी
🏛 आयोजक: प्रताप गौरव केन्द्र
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