सिस्टम से भरोसा उठता जा रहा है! पुलिस हो या लोअर ज्यूडिशियरी—हर जगह ढिलाई और करप्शन। आम आदमी के लिए इंसाफ अब मज़ाक बन गया है। क्या यही ��्याय है? 😡 #Justice #Corruption #SystemFailure
महीने पहले जो खबरें 'अफवाह' कही जा रही थीं, आज वही 'रणनीति' बन गई हैं। साहेब, यहाँ कोई किसी का सगा नहीं है; यहाँ तो बस ये देखा जाता है कि किस तरफ पलड़ा भारी है और किधर जाने से फाइलें बंद हो सकती हैं।
#ragavchaddaq
अभिनव कुमार, तुम कहना चाहते हो कि मनुस्मृति सही है?
अरे वो कोई महान ग्रंथ नहीं, इंसानों को दबाने का टूल थी।
और सुन लो—ये पुराना भारत नहीं है बाबू… अब लोग जाग चुके हैं, सवाल करते हैं, बराबरी की बात करते हैं।
अब किसी की औकात कोई किताब तय नहीं करेगी।”