किसी के जाने का दर्द, उसके जाने से नहीं होता
दर्द तो तब होता है, जब उसके हर वादे, हर कसमें एक-एक करके झूठ साबित होने लगती हैं।
उस दिन से मैंने लोगों को खोना नहीं सीखा, बस उनसे उम्मीद रखना छोड़ दिया।
~ वांगडु
मुलाकातें कम थीं, मगर इतनी भी नहीं कि हम एक-दूसरे को समझ न पाते। बस अफ़सोस इतना रहा कि, हमने रिश्ते को निभाने से ज़्यादा, उसे पाने की ज़िद की और उसी 'अहम' में अपना 'हम' कहीं खो दिया।
~ वांगडु
जब अगली बार आऊंगा,
तुम्हारा नाम अपनी हथेलियों की लकीरों में लिखवाकर आऊंगा ताकि किस्मत भी मुझे तुमसे अलग करने की हिम्मत न कर सके।
अब हर बार तुम्हारी याद में रोना, मंदिरों में गिड़गिड़ाना मुझसे नहीं होगा। या ऐसा सम्भव न हो तो खुदा से बस यही दुआ है कि अगला जनम ही न मिले।
~ वांगडु
एक पुरुष पूरी ज़िंदगी रिश्तों को निभाने में लगा देता है, कभी बेटा बनकर, कभी भाई, कभी पति, कभी पिता बनकर। सबकी खुशियों के लिए मुस्कुराता रहता है, पर उसकी थकान और खामोशी अक्सर अनसुनी रह जाती है। वो खुद को पीछे छोड़ देता है, सिर्फ इसलिए कि उसका परिवार आगे बढ़ता रहे।
~ वांगडु
हर प्रेम अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँचता, क्यूंकि किसी को पाने के लिए केवल दिल में मोहब्बत होना काफी नहीं होता, उसके लिए नसीब का साथ भी उतना ही जरूरी है।
नसीब वह अदृश्य डोर है, जो दो लोगों को मिलाती भी है और अलग भी कर देती है।
~ वांगडु
पुरुष का दुः�� अक्सर मौन होता है, पर उसका प्रेम हमेशा उसकी आँखों से बोलता है। इसीलिए तो श्मशान से भी अक्सर बिना आँसू लौट आती है, पर प्रेमिका के विरह में वही आँखें चुपचाप भीग जाती है।
~ वांगडु
डिप्रेशन कोई कुदरती बीमारी नहीं होता, यह अक्सर यह उन हालातों और लोगों का दिया हुआ जख्म होता है जो हमारी जिंदगी में आकर हमें तोड़ देते हैं। कुछ घटिया सोच वाले लोग हमारे मन पर ऐसे घाव कर देते हैं, जो बाहर से दिखाई नहीं देते लेकिन भीतर ही भीतर आत्मा को खोखला कर देते हैं।
~ वांगडु
निहारना, मिल पाना या खुलकर बातें कर पाना हर समय संभव नहीं होता। शायद इसी कमी को भरने के लिए लोग तस्वीरें संजोकर रखते हैं, ताकि दूरियों के बीच भी यादों का चेहरा कभी धुंधला न प��़े।
~ वांगडु
संगत का सदैव ध्यान रखिए, क्योंकि यदि संगत बिगड़ जाए तो बदनामी केवल आपकी नहीं होती, उसकी आंच सबसे पहले माता-पिता के सम्मान पर आती है।
इसलिए ऐसा कोई भी कदम न उठाइए, जिससे आपके माता-पिता को कभी शर्मिंदा होना पड़े।
~ वांगडु
कलह से भरा घर शरीर को नहीं, मन को कैद करता है। यहाँ कोई पहरेदार नहीं होता, फिर भी ���र सदस्य अदृश्य बेड़ियों में बँधा महसूस करता है। बच्चे चुप रहना सीख जाते हैं, बड़े मुस्कुराना भूल जाते हैं और घर, घर कम, एक भारी खामोशी का कैदखाना ज़्यादा लगने लगता है।
दुनिया का सबसे कष्टदायक जेल कोई ऊँची दीवारों या लोहे की सलाखों से ��हीं बनता, वह बनता है एक ऐसे घर से, जहाँ हर दिन कलह की आवाज़ गूंजती हो।
जहां भीतर रहने वालों के मन में एक अनकही घुटन पलती रहती है, बातों में अपनापन खो जाता है और रिश्ते धीरे-धीरे बोझ लगने लगते हैं।
~ वांगडु
तुम्हारे करीब होकर भी तुम्हारा न हो पाना, ये मेरी सबसे बड़ी विफलताओं में से एक है। शायद कुछ रिश्ते चाहत से नहीं, किस्मत से पूरे होते हैं! और मेरी चाहत बस चाहत बनकर ही रह गई।
~ वांगडु
कहाँ सिर झुकाएँ, किस दर पे गुहार करें
नसीब के मारे लोगों का कोई घर नहीं होता
हमने अपनी ज़िंदगी से, ज़िंदगी को जाते देखा है
अब सांसों के थम ��ाने का भी डर नही होता।
~ वांगडु
शहर से गांव की दूरी, है हमने नापकर देखा
जो अंतर अपनेपन का है, उसे है भांपकर देखा
बिना बोले ही दुःख में गांव पूरा है दौड़कर आता
शहर में गुम है अपनापन, हमने अलापकर देखा।
~ वांगडु
कहते हैं दुःख के बाद सुख है चला आता
पर मेरे हिस्से दुःख के बाद दुःख ही है आता
थोड़ी भी ग़र मैं कर दूं खुश रहने की ख़्वाहिश
क़िस्मत मिला है ऐसा मुझको दुगना रुलाता।
~ वांगडु