मीडिया का मर जाना, मीडिया की पिटाई करना लोकतंत्र के ख़त्म होने की निशानी है । मतलब फासिस्ट ताकतें और अराजक तत्वों का देश में बोलबाला हो रहा है, जो खतरनाक स्थिति को दर्शाता है। किसी सभ्य समाज में मीडिया की इज्जत ह��� उसकी ताकत होती है। जिन भी परिस्थितियों में ये घटना हुई है उसके लिये जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करके, साथ ही जिन्होंने ये दुस्साहस किया है , उसे दंडित किया जाना बहुत जरूरी है। आज नहीं होगा तो फिर देश का लोकतंत्र और आंदोलन दोनों ख़त्म हो जायेगा और बचेगा तो सिर्फ फासिस्ट ताकतों का बोलबाला ! बहुत ही निंदनीय घटना है ये । सरकार और समाज को सचेत रहना होगा।
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पुलिस सिपाही लाठी वाले क्या घर जाकर तू रोया कल
हे सांसद मेरी संसद वाले क्या जाकर सो पाया कल
ये कविता जाने माने एक्टर अतुल कुलकर्णी ने छात्रों के समर्थन में गाई है.