@grok भैया,
Indian railway में टिकिट बुक करने पर कन्फर्म टिकिट नहीं मिलता... और वही date का टिकिट एजेंट के माध्यम से कन्फर्म मिल जाता है... ऐसा क्यूँ हो रहा है भाई 🤔
और सरकार इस ओर ध्यान क्यूँ नहीं दें रही है..???
ये भी हैं काम की बातें :~
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• FIR की कॉपी पर उस पुलिस स्टेशन की मुहर और थाना प्रमुख के हस्ताक्षर होने चाहिए।
• FIR की कॉपी आपको देने के बाद पुलिस अधिकारी अपने रजिस्टर में लिखेगा कि सूचना की कॉपी शिकायतकर्ता को दे दी गई है।
• आपकी शिकायत पर हुई प्रगति की सूचना संबंधित पुलिस आपको डाक से भेजेगी।
• आपको और पुलिस को सही घटना स्थल की जानकारी नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं। पुलिस तुरंत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर देगी। हालांकि जांच के दौरान घटना स्थल का थानाक्षेत्र पता लग जाता है तो संबंधित थाने में केस को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
• FIR दर्ज करवाने का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। अगर कोई भी एफआईआर दर्ज करवाने के नाम पर रिश्वत की मांग करे, तो उसकी शिकायत करें।
FIR लिखने का 9K फार्मूला :~
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हम सभी को क��ी न कभी FIR लिखाना ही पड़ जाता है चाहे खुद के लिये या किसी जानने वाले के लिये। अक्सर लोगो की शिकायत होती है कि उनकी FIR थाने में नहीं लिखी गई, या फिर मजिस्ट्रेट के यहाँ FIR के लिये किया गया आवेदन निरस्त हो गया। इसके तो कई कारण होते है किंतु एक कारण ये भी होता है की आपके लिखने तरीका गलत हो। FIR को कम से कम शब्दों में स्पष्ट और पूरे मामले को लिखना चाहिये क्योंकि न्यायालय में आपका केस इसी आधार पर चलता है । आसा��� भाषा में FIR को लिखने का तरीका बता रहा हूँ क्योंकि कई बार पढ़े लिखे लोग भी FIR लिखने में गलती कर देते है।
सबसे पहले आप एक सादा पेपर ले और उसपर 1 से 9 तक नंबर लिख ले, फिर उन सब के सामने K लिख ले, बस हो गया आपका FIR ।
9K का मतलब होता है आप नीचे पढ़ेंगे तो स्वतः स्पष्ट हो जायेगा।
(1) कब (तारीख और समय)- FIR में आप घटना के समय और तारीख की जानकारी ��िखे ।
(2) कहा (जगह)- घटना कहाँ पे हुई इसकी जानकारी दे।
(3) किसने - अपराध किस ब्यक्ति ने किया ( ज्ञात या अज्ञात) एक या अनेक ब्यक्ति उसका नाम पता आदि लिखे ।
(4) किसको - किस के साथ अपराध किया गया एक पीड़ित है या अनेक उनसब का नाम व पता।
(5) किसलिये - यह एक मुख्य विषय होता है इसी से यह पता चलता है की कोई कार्य अपराध है या पुरस्कार देने के लायक कार्य है, इसको निम्न प्रकार समझ सकते हैं-
(अ) क एक ब्यक्ति ख पर गोली चला देता है और ख की मृत्यु हो जाती है, क यहाँ पर दोषी होगा।
(ब) क एक ब्यक्ति ख पर अपनी पिस्तौल तान देता है और ख अपने बचाव में क पर गोली चला देता है जिससे क की मृत्यु हो जाती है। ख हत्या का दोषी नहीं है क्योंकि अपनी आत्मरक्षा करते हुए अगर आप किसी की जान भी ले लेते है तो आप दोषी नहीं होंगे ।
(स) क अपनी कार से ख तो टक्कर मार देता है और ख की मृत्यु हो जाती है, क हत्या का दोषी नहीं है बल्कि उसपर दुर्घटना का केस चलेगा और ���सके हिसाब से दण्ड मिलेगा।
(द) क एक पुलिस कर्मी है और वह आत���कवादी संगठन के मुठभेड़ में एक या कई आतंकवादीयो को मार देता है। क हत्या का दोषी नहीं होगा बल्कि उसे पुरस्कार दिया जायेगा।
इससे यह स्पष्ट होता है की कोई भी कार्य तब तक अपराध नहीं है जब तक की दुराशय से न किया गया हो।
(6) किसके सामने ( गवाह)- अगर घटना के समय कोई मौजूद हो तो उनकी जानकारी अवश्य देनी चाहिये।
(7) किससे ( हथियार) - अपराध करने के लिए किन हथियार का प्रयोग किया गया ( पिस्तौल , डंडे, रॉड, चैन , हॉकी, ईट��� अगर कोई धोखाधड़ी का मामला है तो आप ( स्टाम्प पेपर, लेटरहेड, इंटरनेट , मोबाइल, आदि,) जानकारी जरूर प्रदान करे।
(8) किस प्रकार - क्या प्रकरण अपनाया गया अपराध् करने के लिये उसको लिखे।
(9) क्या किया ( अपराध)- इनसभी को मिलकर क्या किया गया जो की अपराध होता है उसको लिखे।
इस प्रकार आप सब आसानी से FIR को लिख सकते है।
अन्य उपयोगी जानकारी :-
FIR आप जहाँ घटना हुई है उसके आलावा भी भारत के किसी भी थाने में जाकर आप FIR लिखा सकते है। FIR न लिखे जाने के कई कारण होते है, मुख्यतः क्राइम रेट अधिक न हो इस कारण नहीं लिखी जाती है ( जो की गैर कानूनी कारण है) । दूसरा कारण अपराध की सत्यता पर शक होता है जिस कारण पुलिस FIR लिखने से पहले जाँच करना चाहते है।
FIR लिखवाना आपका अधिकार है (CRPC 154), अगर थाने में आप की FIR नहीं लिखी जाती है तो आप उनके ऊपर के किसी भी अधिकारी (CO, SP, SSP,) से आप FIR लिखने के लिये बोल सकते है, और वे 1 या 2 दिन जाँच के लिये लेकर संबंधित थाने में FIR लिख दी जायेगी।
FIR सम्बन्धित किसी भी ज��नकारी / सहायता या NCIB में सदस्यता हेतु हमारे अधिकारिक वेब्सायट https://t.co/N6YBHM4Lh5 पर लॉगिन करें। किसी असुविधा होने पर हमारे व्हाट्सएप हेल्प्लायन नम्बर +919792580000 पर सुबह 10 बजे से शाम 5:30 बजे के बीच सम्पर्क करे।
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आवश्यक जानकारी :~
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अगर पुलिस FIR (First Information Report) दर्ज करने से इनकार करती है, तो आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
1. उच्च अधिकारी से शिकायत करें,
एफआईआर दर्ज करने हेतु सबसे पहले संबंधित पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) से संपर्क करें। यदि SHO भी FIR दर्ज नहीं करता या FIR दर्ज करने में आनाकानी करता है तो अपने जिला/ शहर के पुलिस अधीक्षक (SP)/ पुलिस आयुक्त (CP) या डीआईजी/आईजी को लिखित शिकायत दें।
2. ऑनलाइन FIR दर्ज करें
कई राज्यों में ऑनलाइन FIR दर्ज करने की सुविधा होती है। इसलिए संबंधित राज्य की पुलिस वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत करें। साथ ही कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा भी शिकायत पंजीकृत करने हेतु पो���्टल बनाया गया है (जैसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनसुनवाई पोर्टल) आप उपरोक्त पोर्टल पर भी पुलिस द्वारा FIR दर्ज न करने की शिकायत कर सकते है।
3. न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दें,
यदि पुलिस FIR दर्ज नहीं कर रही, तो अपने वकील के माध्यम से न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास आवेदन देकर मा० न्यायालय से FIR दर्ज करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं। ध्यान रहे कि मजिस्ट्रेट पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच का आदेश दे सकता है।
4. मानवाधिकार आयोग या लोकायुक्त से शिकायत,
यदि मामला गंभीर है और पुलिस पक्षपातपूर्ण रवैया अपना ��ही है, तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) या लोकायुक्त में भी आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
5. हाई कोर्ट में याचिका दायर करें,
अगर कोई भी उपाय काम न करे, तो हाई कोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition) दायर कर सकते हैं, जिससे पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया जा सकता है।
6. मीडिया और सोशल मीडिया का सहारा लें,
कई बार मीडिया और सोशल मीडिया पर मामला उठाने से पुलिस हरकत में आ जाती है और FIR दर्ज कर लेती है।
~ सादर : @NCIBHQ
आवश्यक जानकारी :~
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अगर कोई व्यक्ति आपके गांव/ गली या मोहल्ला के सार्वजनिक रास्ते पर सीढ़ी/ चबूतरा जैसा कोई निर्माण या अन्य किसी तरीके से रास्ते को अवरुद्ध कर रहा है, तो आप निम्नलिखित कदम उठाके उपरोक्त समस्या का निस्तारण कर सकते हैं:
1. संबंधित व्यक्ति से बात करें,
सबसे पहले, उस व्यक्ति या संस्था से सीधे बात करें और उन्हें समझाने की कोशिश करें कि यह अवैध है और आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
2. ग्राम पंचायत/नगर निगम में शिकायत करें,
• ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव से संपर्क करें और अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराएं।
• शहरी क्षेत्रों में नगर निगम, नगर पालिका, या विकास प्राधिकरण के कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
3. लोकल प्रशासन (SDM/DM) को सूचित करें,
अगर स्थानीय प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है, तो आप उप जिला अधिकारी (SDM) या जिला अधिकारी (DM) को शिकायत कर सकते हैं।
4. पुलिस में शिकायत दर्ज करें,
अगर रास्ता पूर�� तरह अवरुद्ध हो गया है और लोग प्रभावित हो रहे हैं, तो आप पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। पुलिस इस मामले में अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई कर सकती है।
5. अदालत में याचिका दायर करें,
अगर प्रशासन कोई कदम नहीं उठाता है, तो न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकते हैं।
6. RTI (सूचना का अधिकार) का उपयोग करें,
आप अपने क्षेत्रीय SDM/ DM या कलेक्टर कार्यालय में RTI डालकर पूछ सकते हैं कि क्या उस निर्माण के लिए ���ोई वैध अनुमति दी गई है। अगर अनुमति नहीं है, तो आप इसे हटवाने के लिए कार्यवाही की मांग कर सकते हैं।
7. तुरंत सहायता हेतु,
अगर आपको तुरंत राहत चाहिए तो SDM/DM या पुलिस को लिखित शिकायत देकर उचित कार्रवाई की मांग करें।
~ सादर : @NCIBHQ