आदरणीय बहनजी @Mayawati जी व आदरणीय भाई @AnandAkash_BSP जी पूर्वांचल से कई मंडलों के कोर्डिनेटर दिनेश चंद्रा जी को जितनी जल्दी हो सके हटा दें उन्हें प्रत्याशी चुनने न दें अन्यथा भारी नुकसान होगा। कार्यकर्ताओं में उनके व उनके गुटबाजी के खिलाफ भारी रोष है।
चंद्र शेखर आज़ाद
मायावती
अखिलेश यादव #जी
योगी आदित्यनाथ #जी। अच्छा?
@JaikyYadav16 भाई आपकी टीम ठीक से ट्वीट नहीं कर रही है। ट्वीट लिखते समय, लिखने वाले में से जातीवाद की बास आ रही है।
दिनांक 11.07.2026 : जैसाकि सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी), दूस��ी पार्टियों की तरह अपना राजनीतिक व चुनावी स्वार्थ साधने के लिये धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम, हल्लाबोल, सरकारी व प्राइवेट सम्पत्तियों के तोड़फोड़ व दूसरी हिसंक घटनाओं तथा हवाहवाई वादों-दावों एवं मिथ्या प्रचार-प्रसार आदि के माध्यम से जनता को गुमराह कर���े आदि में विश्वास नहीं करती है।
अर्थात् बी.एस.पी. ऐसी तमाम राजनीतिक व चुनावी चालबाज़ियों से पूरी तरह से पाक-साफ देश की एकमात्र ऐसी अम्बेडकरवादी पार्टी है जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त व नीति पर चलकर यहाँ सर्वसमाज में भी ख़ासकर ग़रीबों, मज़दूरों, शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों के हित व कल्याण हेतु समर्पित है, और जिसका जीता-जागता प्रमाण यहाँ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी. के नेतृत���व में चार बार रही सरकार में व्यापक जनहित, जनकल्याण व विकास का तथा अपराध-नियंत्रण व क़ानून-व्यवस्था के मामलों में ’क़ानून द्वारा क़ानून का बेहतरीन राज’ रहा है।
इससे यहाँ यूपी जैसे विशाल राज्य में एक आदर्श संवैधानिक सरकार देने के साथ-साथ यह भी सूरज की रौशनी की तरह पूरी तरह से स्पष्ट है कि बी.एस.पी., वि��ोधी पार्टियों व उनके इशारे पर चलने वाले दलित संगठनों व पार्टियोें आदि की तरह छल व छलावा की राजनीति तथा उनके लिये मगरमच्छ के आँसू नहीं बहाती और ना ही संकीर्ण स्वार्थ हेतु गिरगिट की ही तरह रंग बदलती है, बल्कि करोड़ों दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ-साथ अपरकास्ट समाज के ग़रीबों के वास्तविक हित व कल्याण के लिये ’बहुजन समाज’ में समय-समय पर जन्मे महा��� संतों, गुरुओं व महापुरुषों में भी ख़ासकर महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायणा गुरु, राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व बहुजन नायक मान्यवर श्री कांशीराम जी के बताये रास्तों पर चलकर मुख्यतः सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक उत्थान’ का महान लक्ष्य हासिल करना चाहती है।
और अब यहाँ ��़ासकर उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी आमचुनाव में बी.एस.पी के प्रभाव को तेज़ी से आगे बढ़ता हुआ देखकर विरोधी पार्टियाँ में द्वेष व बेचैनी स्वाभाविक है और इसीलिये वे अपने साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों के तहत् कुछ दलित संगठनों व पार्टियों आदि को आगे करके दलित व बहुजन समाज के अन्य विभिन्न अंगों को तरह-तरह से भटकाने व गुमराह करने में लगे हुये हैं,
जबकि शोषितों-पीड़ितों व उपेक्षितों को अच्छी तर�� से मालूम है कि ’मा. बहन कुमारी मायावती जी’ के नेतृत्व वाली सरकार ही उनकी सभी राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का उसी प्रकार से बेहतरीन निदान है जैसाकि उनकी सभी सरकारों में होता रहा है जब सत्ता की शक्ति, संसाधन व ऊर्जा तथा सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल भी हर स्तर पर सबके साथ न्याय एवं सबको न्याय दिलाने के लिये समर्पित व तत्पर रहा।
साथ ही, चुनाव नज़दीक आता देख विरोधी पार्टियाँ अपने हथकण्डों आदि के साथ-साथ दलित संगठनों व गुलाम मानसिकता रखने वाले लोगों के कंधे पर बंदूक रखकर बी.एस.पी. �� बाबा साहेब के मूवमेन्ट-विरोधी राजनीतिक स्वार्थ का अपना खेल आगे बढ़ाना चाहती हैं, जिससे सर्वसमाज के लोगों को व विशेषकर दलित एवं ’बहुजन समाज’ के सभी लोगों को बहुत ही ज़्यादा सचेत व सतर्क रहने की ज़रूरत है ताकि विरोधियों केे नापाक इरादे सफल ना हों सकें।
इसको लेकर बी.एस.पी. की असली चिन्ता यही है कि सर्वसमाज के ग़रीब, मज़दूर व बेरोज़गार नौजवान आदि के साथ-साथ समाज के शोषित-पीड़ित व अन्य उपेक्षित ��ोग, अपनी समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरने के क्रम में सरकारी द्वेष, उत्पीड़न व आतंक आदि का शिकार ना बनने पायें,
क्योंकि नौजवान अगर सरकारी ज्यादती के कारण यदि मुकदमा व जेल आदि में उलझ जायेंगे तो इससे उनका भविष्य ख़तरे में पड़ जाने की आशंका है तथा अगर परिवार का मुखिया इन चक्कर में पड़ जायेगा तो उनका घरबार तबाह हो जायेगा और उनके पूरे परिवार के इस प्रकार से अंधकार में डूब जाने का खतरा है, जो बी.एस.पी. कतई भी नहीं चाहती है, क्योंकि बी.एस.पी. का अम्बेडकरवादी मिशन प्रभावित हो सक���ा है जो कि विरोधियों की असल चाल है।
इसके साथ ही, सर्वविदित है कि दलित-विरोधी सहारनपुर काण्ड में जातिवादी, सामंती व सरकारी आतंक के विरुद्ध बी.एस.पी. व उसके नेतृत्व ने सड़क से लेकर संसद तक में जबरदस्त लड़ाई लड़ी, किन्तु संसद में भी इसका सही से निदान नहीं मिलने के विरोध में तब बी.एस.पी. नेतृत्व ने, दलितों व अन्य पिछड़ों आदि के हक की अनदेखी करने पर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा देश के पहले कानून मंत्री पद से इस्तीफा देने का अनुसरण करते हुये, राज्यसभा से ही इस्तीफा दे दिया था कि जब संसद में भी हमारी बात नहीं सुनी जाती है तो ऐसी संसद में रहने का फायदा ही क्या?
इस प्रकार यह उन जबरदस्त उदाहरणों में एक है जो बी.एस.पी. नेतृत्व ने अपने संघर्ष के क्रम में दिया है अर्थात् स्पष्ट है कि बी.एस.पी. को अपनी तरह ही मगरमच्छ के आँसू बहाने की सलाह देेने वाले संकीर्ण स्वार्थी लोग विरोधी पार्ट��यों के जातिवादी व विशैले षडयंत्र का शिकार ना बनें तो यह बेहतर होगा।
वैसे भी सभी जानते हैं कि मान्यवर श्री कांशीराम जी ने बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) का गठन देश में जाति के आधार पर सदियों से सताये, तोड़े व पछा��़े गये उन लोगों को ’बहुजन समाज’ को आपसी भाईचारा के आधार पर एकता में जोड़कर राजनीतिक शक्ति अर्थात् ’’हुकमरान जमात’’ बनाने के लिये इसलिये किया था ताकि इन वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सत्ता की मास्टर चाबी के माध्यम से आत्म-सम्मान व स्वाभिमान मूवमेन्ट को मंज़िल तक पहुँचाया जा सके, और यह क्रम लगातार जारी है, जिसकी राह में रोड़ा बनकर खड़ा होना बी.एस.पी के मिशन 2027 को प्रभावित करने का घोर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर-विरोधी अनुचित कृत्य होगा। जय भीम, जय भारत।
साथियों बहुत महत्���ूर्ण विषय पर आप का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ
आज हमें यह आत्मचिंतन करना होगा कि गरीब, शोषित और वंचित समाज की बस्तियां इन चुने हुए नुमाइंदों के लिए हमेशा अंतिम प्राथमिकता क्यों होती हैं?
निगम चुनाव को 3 साल 2 और विधानसभा चुनाव को 4 साल 4 महीने हो गए। इस पूरे कार्यकाल में हमें साफ पानी, पक्की सड़कें और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसाया गया। और आज वही जनप्रतिनिधि अपनी राजनीति चमकाने के लिए चाहते हैं कि जिन आवश्यकता के लिय इतना लाचार बनाया गया अब उनके लिय हम भीड़ बनकर आएं, तालियां बजाएं और उनका स्वागत करें।
बहुजन समाज पार्टी ( #BSP ) के एक-एक निष्ठावान कार्यकर्ता एवं सर्व समाज के सभी गरीब शोषित वंचितों को यह जमीनी हकीकत समझनी होगी। जो नेता अब तक हमें सिर्फ एक 'वोट बैंक' समझते रहे, वो अब गिड़गिड़ाते हुए आपके पास बार-बार आएंगे।
उन्होंने सत्ता के अहंकार में बुनियादी समस्याओं तक के लिय आपको लाचार बनाए रखा, लेकिन अब वक्त हमारा है—इन्हें भाव देना, इन��े पीछे घूमना बंद करो। शोषितों के हक की लड़ाई तालियां बजाने से नहीं, अपने सम्मान को पहचानने से जीती जाएगी।"
इस संदेश को आप आगे बढ़ा पाएंगे तो निसंदेह जागरुकता और वर्तमान परिस्थितियों को समझने में सहायक होगा ऐसा मेरा विश्वास है
कॉपी कीजिए अपने सोशल मीडिया पर अपने नाम से पोस्ट करें ये मेरा निवेदन है
@bspindia
@BSPUPofficial
उत्तरप्रदेश के लखीमपुर खीरी के नीमगांव में महबूब नाम का व्यक्ति घर में घुस कर जबरन दलित नाबालिग बच्ची का बलात्कार किया चीख पुकार सुनकर घरवालों ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया. और कल ही सिंगही में 7th क्लास की 14 वर्षीय दलित बच्ची का शाकिब और लखन ने घर से 500 मीटर केले के खेत में बलात्कार किया. यह दोनों जगहन्य अपराध करने वालों को मौत की सजा सरकार देने का काम करे. ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाया जा सके.उत्तरप्रदेश में अपराधियों में कानून का कोई खौफ नहीं है लॉ एंड आर्डर बनाये रखने में सरकार फेल नजर आ रही है. @Uppolice ,@myogiadityanath
हेलो कैसे हैं आप मैं सगीरुद्दिन उत्तराखंड रामनगर से आपका दर्शक हूं आपके वीडियो रामनगर बीएसपी के पेज पर भी लगाता हूं ।
दिल्ली मेट्रो में बैठने के बाद सामने बैठे सगीर अपनी सीट छोड़ कर आ गए ।
ऊपर वाला कैसे मिलाता है अपनों से इतना प्यार और सम्मान उस मालिक का जितना शुक्र अदा करूं कम है ।
विश्व को शांति व सद्भावना का संदेश देने वाले विख्यात आध्यात्मिक गुरु एवं य��वाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन।
उनके सिद्धान्त व अलौकिक विचार आज भी हमारे लिए अनुकरण���य हैं, जिनसे युवाओं को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
#SwamiVivekananda
बहुजन समाज पार्टी, अयोध्या के जिलाध्यक्ष श्री कृष्ण कुमार पासी जी के भतीजे के असामयिक निधन का समाचार सुनकर हृदय को गहरी पीड़ा पहुँची है।
इतनी छोटी उम्र में यूँ अचानक साथ छूट जाना, ये वह दुख है जिसके लिए कोई शब्द पूरा नहीं पड़ता। एक परिवार अपने बच्चों क��� लिए जो सपने देखता है, जो कल की उम्मीदें बुनता है, वह सब एक पल में रुक जाता है। ऐसे समय में सांत्वना देना आसान नहीं है।
लेकिन इतना ज़रूर कहना चाहूँगा कि श्री कृष्ण कुमार पासी जी को जो लोग जानते हैं, और उनके संघर्ष के साथी रहे हैं, सब आज इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।
भावभीनी श्रद्धांजलि।
पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती राबड़ी देवी के नाम पर बिहार सरकार की हथौड़ी चल रही है, जिसको देखकर rjd के समर्थक काफी नाराज है --
बिहार की भाजपा सरकार चाहती तो रात के अंधेरे में भी यह नाम हटवा देती या कोई दूसरा तरकीब सोचती पर , ये जो काम करने का तरीके है rjd समर्थकों को अच्छा नहीं लग रहा है
पर आवास सरकारी है तो खाली करवाना पड़ रहा भाजपा को
जनपद चित्रकूट की मऊ-मानिकपुर विधानसभा निवासी बहुजन समाज पार्टी के अत्यंत समर्पित एवं कर्मठ कार्यकर्ता श्री राम अभिलाष पाल जी का पिछले दिनों हापुड़ में हुई सड़क दुर्घटना में दुखद निधन होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है।
कुदरत से कामना है कि शोकाकुल परिवार एवं उनके समस्त शुभचिंतकों को ��स अपार दुःख को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करें।
भावभीनी एवं विनम्र श्रद्धांजलि। 💐🙏
बहन जी AC में क्यों बैठी हैं?
2000 के आसपास की बात है। उस समय मैं अपने गांव के प्राइमरी स्कूल में पढ़ता था। उस समय जब भी कहीं चुनाव होता था, तो साथ पढ़ने वाले यादव बच्चे बहन जी को "चमारिन", काली *&#, जैसी कई जातिसूचक गालियां देते थे।
बहन जी के पोस्टरों पर गंदे-गंदे इशारे किए जाते, उनका नाम मुलायम सिंह के साथ जोड़कर अश्लील और जातिसूचक गालियां दी जातीं। मेरा गांव में कई जाति के लोग रहते हैं। गांव में चाय की दूकान पर राजनीतिक चर्चा के नाम पर सभी गैर दलित समुदाय के सभ्य से सभ्य लोग चाय की चुस्कीयां लेते हुए बहन जी पर अपमानजनक टिप्पणियां करते और खूब ठहाके लगाते। ये वही लोग थे, जिन्हें हम सम्मान से चाचा, बाबा.. कहकर बुलाते थे। देश में PM इंदिरा गांधी सहित कई महिलाएं CM एवं बड़ी नेता रही हैं लेकिन को��� उन्हें गाली नहीं देता था। सिर्फ बहन जी से ही इतनी नफरत क्यों थी? सिर्फ इसलिए क्योंकि वह दलित हैं।
बुरा तो लगता था, लेकिन तब हम छोटे थे। उस समय मुझमें इतना भावबोध नहीं था, लेकिन इतना जरूर पता था कि वह हमारे समाज की नेता हैं। हमारे बाबा एक पुराना नीला झंडा लेकर बसपा की सभी मीटिंगों और रैलियों में जाते थे। गांव के कुछ बड़े लोग मान्यवर साहब और ��हन जी के संघर्षों के बारे में बताते थे। बाबा अपने मिट्टी के घर पर बड़े गर्व से बसपा का झंडा लगाते थे। छोटी उम्र से ही हम सब उनका नाम सुनते ही एक खास अपनापन महसूस करते थे। जब गांव में बसपा का कोई नेता आने वाला होता, तो हम सब खुशी से नाचते हुए बहन जी के पोस्टर लगाया करते थे। रास्ते से साइकिल पर जाते हुए इन पोस्टरों को देखकर बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी ठहाके लगाकर मसखरी करते थे।
एक बार यादव समाज के लोगों ने गांव में होली मिलन समारोह रखा था। उसमें तूफानी सरोज भी आए थे। उनके सामने गायक ने मुलायम सिंह और बहन जी का नाम जोड़कर मंच से एक अभद्र गीत गाया, लेकिन तूफानी सरोज सुनकर मुस्कुराते रहे, जबकि वह स्वयं दलित हैं। आज उनकी बेटी प्रिया सरोज हमारे लोकसभा क्षेत्र मछलीशहर से सांसद हैं। गांव के दलितों ने जब इसका विरोध किया तो आयोजकों ने माफी मांगी और गायक से माइक बंद करवा दिया।
वहीं, 2007 में जब बसप��� की सरकार बनी, तो लोगों के बोल बदल गए। प्रेम से न��ीं, डर से। अब दलितों में स्वाभिमान आ गया था। गांव में जो लोग हमारे बुजुर्गों को "रे, बे, ते" कहकर और नाम बिगाड़कर बुलाते थे, वही लोग सम्मान से नाम लेने लगे। अब वही यादव समुदाय के लोग बात-बात पर हंसते हुए तंज कसते थे कि, "अरे भाई, अब तो आप लोगों की सरकार है।" हालांकि अब ऐसा सुनकर बहुत गर्व महसूस होता था। यह सिर्फ मेरे बचपन की कुछ बातें हैं जो मुझे याद हैं। छात्रजीवन और आज का अनुभव बताने के लिए पूरी कित���ब लिखनी होगी।
लेकिन यह सब मैं आपको क्यों बता रहा हूं? इसलिए कि आप समझ सकें कि बहन जी और बसपा ने समाज को दिया क्या है। जिस रीलबाजी और हवाबाजी को आप संघर्ष समझते हैं, अपने बाप-दादाओं का नहीं तो कम से कम अपने बचपन का दौर याद करो और सोचो कि बहन जी ने उस समय कितना संघर्ष किया होगा। नफरत का आलम यह था कि नन्हे-नन्हे बच्चे तक उन्हें जातिगत गालियां देते थे। यह वह दौर था, जब सोशल मीडिया छोड़िए, समाज के अधिका���� घरों में पुराना हैंडसेट भी नहीं था। तुम्हें बहन जी के AC से दिक्कत है, तो जरा ईमान से बताओ, क्या अखिलेश यादव और राहुल गांधी छप्पर और घास-फूस की झोपड़ी में रहते हैं? या फिर अमित शाह ने चंद्रशेखर आजाद के टाइप-8 बंगले में AC की जगह फर्राटा पंखा लगवाया है?
ऐसा नहीं है कि बसपा में कमियां नहीं हैं। बसपा में अनेक कमियां हैं। इन कमियों के बारे में हम खुलकर लिखते भी हैं। इसलिए कई बार बसपा समर्थक भी मेरे बारे में बहुत अभद्र भाषा लिखते हैं, लेकिन हम इग्नोर करते हैं। हालांकि मैं बसपा का सदस्य भी नहीं हूं, लेकिन बसपा हमारी पार्टी है। हमारा घर है। अतः इन कमियों को लेकर मैंने कई बार बसपा के कोऑर्डिनेटरों को आगाह भी किया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप बहन जी के त्याग को गाली दें और उनका अपमान करें। वह हमारी आदर्श हैं, गुरूर हैं, हिम्मत हैं और स्वाभिमान हैं।
बसपा की गलती बस इतनी है कि उसकी कोई IT सेल नहीं ���ै��� पदाधिकारियों का मानो सोशल मीडिया से छत्तीस का आंकड़ा है। बसपा आज AI के युग में भी 90 के दशक में जी रही है। जिस दिन पार्टी और उसके पदाधिकारी सोशल मीडिया का महत्व समझ जाएंगे और युवाओं से डायरेक्ट संपर्क बना लेंगे, उस दिन सारा पासा पलट जाएगा। उम्मीद है कि बहन जी एक दिन इस पर संज्ञान अवश्य लेंगी। बाकी बहन जी पर अनर्गल टिप्पणी करने वाले लोग या तो अबोध हैं या फिर मूर्ख। जिस दिन कभी शांति से बैठकर आत्मचिंतन करेंगे, उनका सारा भ्रम दूर हो जाएगा।
- सूरज कुमार बौद्ध
आज विधान सभा क्षेत्र 04 #सहारनपुर देहात में आयोजित @bspindia के विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन में बहन कु० @Mayawati जी के आदेशानुसार भाई फिरोज आफताब जी को प्रभारी/प्रत्याशी घोषित किया गया।
अब #मुस्लिम समाज जाग चुका है! उसे समझ आ गया है कि समाजवादी पार्टी न तो सत्ता परिवर्तन करने में सक्षम है और न ही मुस्लिमों की आवाज़ उठाने में।
सर्व समाज ने ठाना है बहन जी को 5वीं बार मुख्यमंत्री बनाना है।
#BSP #Mayawati
@satishmisrabsp@AnandAkash_BSP@AliMunqad
#UPPolitics #Saharanpur
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।