देखिए, राहुल गांधी ने फिर किया राष्ट्रगान का अपमान...⬇️
जिस राष्ट्रगान पर हर भारतीय को गर्व है, जो देश की आन, बान और शान है, उसका सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।
लेकिन राहुल गांधी ने इसे अपमानित कर अपने देश-विरोधी रवैये को एक बार फिर उजागर कर दिया है…
अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीन ने हमारी सेना को पेट्रोलिंग करने से रोक दिया है - यह बेहद चिंताजनक है।
लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक है राजनाथ सिंह जी, अमित शाह जी और ��रेंद्र मोदी जी की ओर से पसरा सन्नाटा। उल्टा मोदी सरकार चीन को रोकने के बजाय इस खबर को रोकने के लिए मीडिया पर दबाव डाल रही है।
देश को आज भी गलवान के बाद प्रधानमंत्री का वह बयान याद है, जिसमें उन्होंने यह कहकर कि चीन ने हमारी जमीन का एक इंच भी नहीं लिया, भारत को भारी नुकसान पहुंचाया था।
आज भी अपनी छवि बचाने का वही ऑपरेशन जारी है - और देश की सुरक्षा से ऊपर अपनी नकली छवि को प्राथमिकता देने वाला प्रधानमंत्री देश के लिए बेहद खतरनाक है।
मैं आज तक किसी के काम नहीं आया.... मैं विकलांग हूं ना.... सब मुझे नल्ला कहते हैं क्योंकि मैं कमाता नहीं हूं...
आज मैं लोगों को दिखाना चाहता हूं क�� मैं क्या कर सकता हूं... दिल कह रहा था कि मैं जाऊंगा प्रोटेस्ट में
कह दिया था - चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी।
आज कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा। एक ही दिन में ���बसे बड़ी बढ़ोतरी। यह चुनावी बिल है।
फरवरी से अब तक: ₹1,380 की बढ़ोतरी - सिर्फ़ 3 महीनों में 81% का इज़ाफ़ा।
चायवाला, ढाबा, होटल, बेकरी, हलवाई - हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा। और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा।
पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर।
हिंदुस्तान में फैली लालच और लापरवाही की महामारी आज फिर एक युवा की जान ले गई।
एक बेटा, एक सपना, माँ-बाप की पूरी दुनिया - सब कुछ एक झटके में उजाड़ दिया गया।
यह हादसा नहीं, हत्या है - और हत्यारी है जवाबदेही से भागती सत्ता।
असली क़ातिल सड़क नहीं, गैरज़िम्मेदार सत्ता है।
क्योंकि यहां
न इस्तीफ़ा होता है,
न सज़ा मिलती है,
न किसी की अंतरात्मा जागती है।
इंदौर का जहरीला पानी
नोएडा में युवराज की जान लेने वाली सड़क
गिरते पुल, टकराती ट्रेनें, दम घोंटता प्रदूषण...
#TINA - There Is No Accountability
और जब तक जवाबदेही नहीं होगी,
तब तक कोई न कोई लालच की महामारी का अगला शिकार बनता रहेगा।
क्या एक गैंगरेप पीड़िता के साथ ऐसा व्यवहार उचित है?
क्या उसकी “गलती” ये है कि वो न्याय के लिए अपनी आवाज़ उठाने की हिम्मत कर रही है?
उसके अपराधी (पूर्व BJP MLA) को ज़मानत मिलना बेहद निराशाजनक और शर्मनाक है - खासकर तब, जब पीड़िता को बार-बार प्रताड़ि��� किया जा रहा हो, और वो डर के साए में जी रही हो।
बलात्कारियों को ज़मानत, और पीड़िताओं के साथ अपराधियों सा व्यवहार - ये कैसा न्याय है?
हम सिर्फ़ एक मृत अर्थव्यवस्था नहीं - ऐसी अमानवीय घटनाओं के साथ हम एक मृत समाज भी बनते जा रहे हैं।
लोकतंत्र में असहमति की आवाज़ उठाना अधिकार है, और उसे दबाना अपराध।
पीड़िता को सम्मान, सुरक्षा और न्याय मिलना चाहिए - न कि बेबसी, भय और अन्याय।
चोरी BJP के DNA में है।
पैसे चोरी - ज़मीन चोरी - संस्था चोरी - अधिकार चोरी - रोज़गार चोरी - जनादेश चोरी - सरकार चोरी - चुनाव चोरी - वोट चोरी
जनता से चोरी ही BJP के लिए सत्ता की सीढ़ी है।
कैसे होगा चुनाव सुधार? वैसे ही जो हम बार बार कह रहे हैं
1. चुनाव से कम से कम एक महीने पहले मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट सार्वजनिक हो
2. CCTV फुटेज मिटाने वाला काला कानून तुरंत वापस लिया जाए
3. विपक्ष को EVM तक पहुंच मिले और उसका आर्किटेक्चर सार्वजनिक किया जाए
4. चुनाव आयुक्तों को सज़ा से बचाने वाला कानून बदला जाए ताकि उनकी मनमानी पर लगाम लगाई जाए
सरकार ये सुधार नहीं चाहती - मगर हम हर हाल में ये बदलाव ला कर रहेंगे।
SIR के नाम पर देश भर में अफ़रा-तफ़री मचा रखी है - नतीजा? तीन हफ्तों में 16 BLO की जान चली गई। हार्ट अटैक, तनाव, आत्महत्या - SIR कोई सुधार नहीं, थोपा गया ज़ुल्म है।
ECI ने ऐसा सिस्टम बनाया है जिसमें नागरिकों को खुद को तलाशने के लिए 22 साल पुरानी मतदाता सूची के हज़ारों स्कैन पन्ने पलटने पड़ें। मक़सद साफ़ है - सही मतदाता थककर हार जाए, और vote chori बिना रोक-टोक जारी रहे।
भारत दुनिया के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर बनाता है, मगर भारत का चुनाव आयोग आज भी काग़ज़ों का जंगल खड़ा करने पर ही अड़ा है।
अगर नीयत साफ़ होती तो लिस्ट डिजिटल, सर्चेबल और मशीन-रीडेबल होती - और ECI 30 दिन की हड़बड़ी में अंधाधुंध काम ठेलने के बजाय उचित सम�� ले कर पारदर्शिता और जवाबदेही पर ध्यान देता।
SIR एक सोची-समझी चाल है - जहां नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और BLOs की अनावश्यक दबाव से मौतों को “कॉलैटरल डैमेज” मान कर अनदेखा कर दिया है।
यह नाकामी नहीं, षड़यंत्र है - सत्ता की रक्षा में लोकतंत्र की बलि है।
आज मध्य प्रदेश जा रहा हूं।
और जब से ये खबर देखी है कि वहां बच्चों को मिड-डे मील अख़बार पर परोसा जा रहा है, दिल टूट सा गया है।
ये वही मासूम बच्चे हैं जिनके सपनों पर देश का भविष्य टिका है, और उन्हें इज़्ज़त की थाली तक नसीब नहीं।
20 साल से ज्यादा की BJP सरकार, और बच्चों की थाली तक चुरा ली गई - ���नका 'विकास' बस छलावा है, सरकार में आने का असली राज़ तो 'व्यवस्था' है।
शर्म आनी चाहिए ऐसे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को जो देश के बच्चों, भारत के भविष्य का इस दुर्दशा से पालन-पोषण कर रहे हैं।
Video Courtesy: @Anurag_Dwary