केन्द्र सरकार स्पष्ट करें कि दिल्ली पुलिस के साथ सिविल कपड़ों में लाठी लेकर मौजूद लोग कौन थे? उन्हें किसके आदेश पर कार्रवाई करने और लाठीचार्ज में शामिल होने की अनुमति दी गई?
लोकतांत्रिक देश में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने वाले युवाओं और छात्रों पर लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का प्रयोग अत्यंत चिंताजनक है। लोकतंत्र में असहमति को बल प्रयोग से नहीं, संवाद से सुना और सुलझाया जाना चाहिए।
देश के युवाओं की आवाज़ लाठियों और आंसू गैस से दबाई नहीं जा सकती।
So @DelhiPolice can you come clean on Honey Dagar? Who is he? Where does he live? How was he beating up our kids alongside uniformed cops yesterday. Let’s track this man down I say.
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करक��� पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
Unacceptable abuse of power.
Additional DCP Sandeep Lamba must be suspended immediately for hitting a female protester. High-ranking officers should be held to higher standards, not given impunity.
राहुल ने जंतर-मंतर में छात्रों पर हुए ज़ुल्म के मुद्दे पर पारा बढ़ाया! PM निवास स्थान के बाहर इस्तीफा दो के नारों के साथ प्रदर्शन! उम्मीद कीजिए आज शाम तक गोदी मीडिया इसे देश के साथ गद्दारी और पाकिस्तानी लिंक बता देगी!
छात्रों की माँग को लेकर धरने पर बैठे राहुल गांधी जी, सांसदों और विपक्ष के नेताओं को जिस प्रकार से प्रधानमंत्री आवास के सामने से गिरफ्तार किया गया है, उसकी मैं कड़े शब्दों में निं��ा करता हूँ।
छात्रों और युवाओं के कदम अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। पिछले एक महीने से लाखों छात्र और युवा NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज़ सुनने के बजाय उनकी आवाज़ दबाने और दमनकारी रवैया अपनाने में लगी हुई है।
पेपर लीक का मुद्दा घर-घर की चर्चा बन चुका है। पूरा देश चाहता है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर जवाबदेही तय हो, सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को कठोर सज़ा मिले। लेकिन इस भावना के ठीक विपरीत प्रधानमंत्री मोदी और सरकार अपने मंत्री को बचाने में लगी हुई है।
छात्रों और युवाओं के साथ हो रहे इस अ��्याय का जवाब भाजपा को ज़रूर मिलेगा।