My two cents on the baseless criticism of the Anti-Paper Leak reforms.
The Government is acting on both fronts - strengthening punishment for paper leaks with stricter legal provisions, while simultaneously working to make the examination ecosystem more secure through systemic reforms.
Student issues deserve solutions.Let’s stand for reforms, not rhetoric!
#bjym #bjp #fyp #shaktisingh #ᴇxᴘʟᴏʀᴇᴘᴀɢᴇ
अभिषेक बनर्जी तुमने, अपना काम कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं को धमकाकर कहा था कि मैं देखता हूं कि 4 तारीख को 12 बजे के बाद तुमको बचाने दिल्ली से कौन आता है पश्चिम बंगाल का एक एक कार्यकर्ता नरेंद्र मोदी और अमित शाह है सब वही हैं जिनसे मिलना है मिल लो
#bjp#westbengal#fyp #shaktisingh #explorepageًً
Tourists came to admire Kashmir’s beauty. They were met with bullets!
Lets not mince our words ,this is pure Islamic Jihadist terrorism ,targeted against Hindus!
Enough is Enough…It’s time for iron-fisted revenge.
Its time to turn every safe haven of these terrorists on both sides of the border into rubble.
No talks. Only justice!!
वोट बैंक की राजनीति के लिए आक्रांताओं का महिमामंडन और हमारे वीरों का अपमान करने वाली संकीर्ण मानसिकता से सावधान रहना आवश्यक है। ऐसे नेता समाज के लिए दीमक की भांति होते हैं, जो अपने ही राष्ट्र की जड़ों को खोखला कर, स्वार्थ की रोटियां सेंकने में लगे रहते हैं।
हाल ही में राज्यसभा में सपा सांसद द्वारा भारत के महान योद्धा महाराणा सांगा के प्रति की गई आपत्तिजनक टिप्पणी अत्यंत निंदनीय है। मैं इसकी घोर भर्त्सना करता हूँ और ऐसे विचारों का कड़ा प्रतिकार करने का संकल्प लेता हूँ।
#bjpindia #bjp4india #bjym4india
एक रहेंगे तभी सेफ रहेंगे।
-----------------------------
एक पॉडकास्ट देख रहा था जिसमें क्रिकेट कमेंटेटर जतिन सप्रू आए हुए थे उन्होंने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके दादाजी कश्मीर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे व�� संस्कृत विषय में गोल्ड मेडलिस्ट थे उनके पास एक खूबसूरत घर था पिताजी इंजीनियर थे कश्मीर की खूबसूरत वादियां ��ी और फिर आया साल 1989 उन्होंने बताया कश्मीर में गर्मी की छुट्टियों की जगह ठंडी की छुट्टियां होती है लंबी छुट्टी थी पापा के साथ मै दिल्ली में था हालात बिगड़े दादा दादी को भी दिल्ली बुला लिया गया सोचा कि जब हालात ठीक होंगे वापस अपने घर लौटेंगे थोड़े से सामान के साथ हम दिल्ली में थे पर हालत बिगड़ते गए हमनें अपने पड़ोसियों से बात कि उनकी सलाह थी कि हम दिल्ली ही रहें हालात बदतर हो गए फिर हम कभी नहीं लौटे घर,सामान,पैसे यादें, खूबसूरत वादियां, विश्वविद्यालय सब हमसे छीन लिया गया पीढ़ियों की मेहनत छोड़नी पड़ी एक रात में सब चला गया।
क्या कुछ नहीं बीता कश्मीरियों पर,सब छुपा दिया गया,भुला दिया गया कश्मीरी बहादुर थे पढ़े लिखे थे आजतक लड़ रहे पर लौट नहीं सके इससे हमें सबक लेने की जरूरत है कि हम अपने जीवन में कितना भी अच्छा कर रहे हैं,धन-दौलत, इज्ज़त पर ��गर अगर संगठित नहीं रहे तो एक दिन लाउडस्पीकर पर ऐलान होगा और सब धरा रह जायेगा इसलिए आपस में लड़ने के बजाय संगठित रहिए।एक रहेंगे तभी सेफ रहेंगे।
वीर बाल दिवस पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के साहिबज़ादों के बलिदान को कोटिश: नमन। 🙏🏻
राष्ट्र इन वीरों के शौर्य, त्याग और समर्पण का सदैव ऋणी रहेगा।
#VeerBalDiwas#वीर_बाल_दिवस
अतुल सौरभ की आत्महत्या पर
अतुल की आत्महत्��ा के बाद सोशल मीडिया में जैसे चर्चा हो रही है, हम सब को लगता है कि इससे परिवर्तन हो जाएगा। मुझे ऐसा नहीं लगता।
अतुल सौरभ जैसे दर्जनों केस हर वर्ष होते रहते हैं। अतुल एक सुलझे हुए व्यक्ति थे जिन्होंने वीडियो और पत्र के माध्यम से अपनी पीड़ा और आत्महत्या के निर्णय पर प्रकाश डाला। हर पीड़ित के पास अभिव्यक्ति के साधन नहीं होते। वो बस तंत्र से हार कर मर जाते हैं।
तंत्र से जीतना असंभव है। अतुल की ��ृत्यु से कुछ नहीं बदलेगा। मैं आश्वस्त हूँ कि वही म���िला किसी और से विवाह कर के, अपने बेटे को ग्रूम करते हुए, बाप के बारे में विषैली बातें करते हुए उसे पालेगी। संभवतः कोर्ट उसे अतुल की संपत्ति का पूरा हिस्सा भी दे देगी।
जहाँ तक जज की बात है, जजों को जज बचा लेते हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से ले कर जिला न्यायालयों के परिसर में धूल फाँकते वकील को भी पता है कि कोर्ट हर स्तर पर घुसखोरी का अड्डा है। तो, इस पर भी कोई चर्चा तक नहीं होगी।
परसों तक यह विषय समाप्त हो जाएगा और हमारे पास नया विषय आ जाएगा। यही सत्य है।
मैं अतुल से सहानुभूति भी रख कर क्या करूँगा? वो तो चले गए। अतुल को मरने से पहले एक-दो को साथ ले कर जाना चाहिए था। मुझे ‘शूल’ फिल्म का अंतिम दृश्य याद आता है जहाँ मनोज बाजपेयी के पात्र को तंत्र ने विवश कर दिया कि वो वि��ानसभा में विधायक की कनपटी पर बंदूक रख दे।
समाज ऐसा ही न्याय चाहता है। संभवतः न्याय है भी वही। परंतु, कानून की पुस्तक में वो न्याय नहीं हत्या हो जाएगी। कानून की पुस्तक में अतुल ने आत्महत्या की है, पर समाज जानता है कि अतुल की हत्या की गई है।
न्यायपालिका के हाथ कानून से बँधे हो सकते हैं, पर जो पेशकार जज के नीचे बैठ कर पैसा लेता हो, और जो जज स्पष्ट रूप पाँच लाख माँग रही हो, उसे राह चलते कल को कोई गोल�� मार दे, तो वह अन्याय नहीं होगा। क्योंकि उस जज ने केवल घूस नहीं माँगा, उसने उस व्यक्ति की हत्या में अपना योगदान दिया है।
कई लोग कह रहे हैं कि जज को पैसे दे कर सेटलमेंट कर लेता, जीवन क्यों ले लिया अपना। यह बात आप इसलिए नहीं समझ सकते क्योंकि कुछ लोग अपने आदर्शों से इस सीमा तक समझौता नहीं कर पाते। पेशकार को सौ रुपए देना भी घूस ही है, पर पेशकार से न्याय की आशा नहीं है।
वहीं, कोई जज हर बात जानते हुए भी आपको विवश करने लगे, तो आप ट्रिगर हो जाते हैं कि ये कब तक चलेगा? भगत सिंह चाहते तो असेंबली से भाग सकते थे बम फेंकने के बाद। वो नहीं भागे क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी फाँसी से आंदोलन को बल मिलेगा।
अतुल की आत्महत्या भगत सिंह के स्तर की नहीं है, पर सोच वही है कि उसकी मृत्यु से कोई परिवर्तन हो, कोई नोट करे कि यह अपवाद नहीं, उदाहरण है। अतुल को जब लगा कि पूरा सिस्टम, न केवल उसे बल्कि उसके पूरे परिवार को टा��्गेट करता रहेगा, उनके दिए पैसे ही उनकी पीड़ा का कारण बनेंगे तो उन्होंने यह कठिन निर्णय लिया।
हम स्वयं को ले कर जितनी चिंता नहीं करते, उससे अधिक अपने माँ-बाप या पत्नी-बच्चे को ले कर चिंतित रहते हैं। यदि वैसी परिस्थिति आती है, तो हम अपने लिए नहीं, उनकी पीड़ा को ध्यान में रख कर कॉम्प्रोमाइज करते हैं।
अतुल की आत्महत्या उसके परिजनों के लिए कॉम्प्रोमाइज है। उसे लगा कि वह यदि इस समीकरण से हट जाता ह���, तो बाकी हर व्यक्ति चैन से रह लेंगे। पुत्र का चेहरा भ��� उसे याद नहीं था, वह छोटा है, बड़ा हो कर उसे कदाचित् पिता का पक्ष समझ में आ जाए, ऐसा अतुल ने सोचा।
पुलिस, न्यायपालिका आदि जितनी भ्रष्ट हो सकती है, हो जाएगी। इनके लिए अतुल उन सैकड़ों नामों में से एक नाम है, जिसे ये हर सप्ताह वसूली का वॉलेट समझते हैं। उन तक ये वीडियो पहुँचा भी होगा तो ‘चू#% साला’ बोल कर समोसे खा लेंगे।
यही सत्य है। यही दुर्भाग्य है।
#AtulSubhash #JusticeIsDue
दुनिया में हजारों तरह के संगीन अपराध हैं मेरी नजर में इन सभी अपराधों में पेपर को आउट करवाना किसी भी तरह के अनुचित साधनों का प्रयोग कर परीक्षा देना सबसे बड़ा अपराध है,आप रात 2 बजे भी किसी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में चले जाइये आपको सैकड़ों छात्र पढ़ते हुए मिल जायेंगे जो इस उम्मीद में तपस्यारत है कि अच्छी पढ़ाई पढेंगे अच्छे विश्ववि���्यालय में एडमिशन होगा अच्छी नौकरियां मिलेंगी देश की सेवा के साथ साथ उस मां-बाप,बहन-��ाई के उम्मीदों को पूरा कर सकेंगे जिनकी आखिरी उम्मीद वही हैं पर एक पेपर लीक इन हजारों छात्रों और इनके परिवारों के उम्मीदों को जलाकर रख देता है,जो भी लोग इसमें शामिल हैं उनके लिए कठोर से कठोर सजा भी कम है स्थितियां बदल रही हैं पहले पेपर आउट होते थे लाख प्रदर्शनों,आन्दोलनों के बाद भी सरकारें स्वीकार तक नही करती थीं कि पेपर लीक हुआ अब सरकार न सिर्फ स्वीकार कर रही बल्कि पेपर कैंसल भी कर रही है अपरा���ियों पर कार्यावाही भी हो रहे पर सबकुछ होते हुए भी अभी पेपर लीक पर काबू नहीं पाया जा सका है UGC-NET पेपर लीक का बिना किसी शिकायत के स्वतः संज्ञान लेकर पेपर कैंसिल करना और जाँच सीबीआई को देना बहुत ही साहसिक कदम है पर सरकार से अनुरोध है कि बिना किसी सरकारी अधिकारी के मदद के इस तरह से पेपर लीक सम्भव नहीं है सरकार से अनुरोध है कि जाँच करके ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्यवाही करें पेपर लीक जो कैंसर पूरी परी���्षा व्यवस्था को निग�� रहा था सरकार ने इसका गंभीर इलाज शुरू कर दिया है और हमारे देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जी के नेतृत्व में इस कैंसर को हराने में हम सभी सफल होंगे ऐसा यकीन हमें बनाकर रखना है मेरे सामाजिक जीवन की मेरी पहली पहचान छात्रनेता की है मैं हर स्थिति में अपने छात्र-छात्रा,भाई-बहनों के साथ खड़ा हूँ मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ किसी तरह की पेपर लीक की सूचना आप NTA के नंबर पर दीजिए या मुझे भी आप बता सकते हैं।
पेपर लीक रोकने को सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए पेपर लीक में पकड़े जाने पर गंभीर सजा का प्राविधान किया है जो लोग इस तरह की गतिविधि में शमिल हैं उनको गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
People have placed their faith in NDA, for a third consecutive time! This is a historical feat in India’s history.
I bow to the Janata Janardan for this affection and assure them that we will continue the good work done in the last decade to keep fulfilling the aspirations of people.
I also salute all our Karyakartas for their hard work. Words will never do justice to their exceptional efforts.