अबे चूतिए, हरामखोर, दोगले...
सुन। बिहार में तो ये बिल्कुल ही नहीं होना था। तू जो अपने मालिकों के फेंके टुकड़े पर पल रहा है न, दोगले...बिहार ने पिछले पांच वर्षों में इतनी सरकारी नौकरियां दी हैं, जितनी केजरीवाल ने सपने में भी नहीं देखी होगी। भाग यहां से...
नेपाल में आई बाढ़ की विभीषिका अत्यंत दु:खद है। जिन परिवारों ने इस आपदा में अपने प्रियजनों को खोया है, मेरी संवेदनाएँ उनके साथ हैं। संकट की इस घड़ी में भारत सरकार नेपाल के साथ खड़ी है।
नेपाल में आई इस आपदा के संबंध में बिहार व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात की। इसका प्रभाव जिन सीमावर्ती क्षेत्रों पर पड़ सकता है, वहाँ के स्थानीय प्रशासन और राहत-बचाव की टीमों के साथ NDRF को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है।
25 जनवरी 1998 की रात आतंकियों ने चार कश्मीरी पंडित परिवारों के 23 सदस्यों की निर्मम हत्या कर दी थी। मृतकों में 9 महिलाएं और 4 बच्चे शामिल थे। नरसंहार के 28 वर्ष बाद जम्मू-कश्मीर की राज्य जांच एजेंसी यानी SIA ने इस मामले की जांच दोबारा शुरू कर दी है। एजेंसी का उद्देश्य नए साक्ष्य जुटाना तथा हमले में शामिल आतंकियों, उनके सहयोगियों और षड्यंत्र के सूत्रधारों की पहचान करना है।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुआ था। सैन्य वर्दी जैसे कपड़े पहने हथियारबंद आतंकी गांव में दाखिल हुए और उन कश्मीरी पंडित परिवारों को निशाना बनाया, जिन्होंने घाटी में लगातार हिंसा और भय के बावजूद अपनी पैतृक भूमि नहीं छोड़ी थी।
उल्लेखनीय है कि, जम्मू-कश्मीर पुलिस की 2008 की रिपोर्ट के अनुसार, कश्मीरी पंडितों की हत्याओं के कुल 140 मामले दर्ज हुए थे। इनमें केवल 24 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए और 31 स्थानीय आतंकियों को आरोपी बनाया गया। शेष 115 मामलों में अपराधियों की पहचान या तलाश नहीं हो सकी।
हृदयनाथ वांचू की 1992 में हुई हत्या ऐसा प्रमुख मामला है, जिसमें दोषसिद्धि की स्पष्ट पुष्टि होती है। CBI ने 12 लोगों के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया था। इनमें 4 की मृत्यु हो गई और 5 फरार रहे। शेष 3 आरोपियों—आशिक हुसैन फक्तू, मोहम्मद शफीक खान और गुलाम कादिर—को TADA अदालत ने 2001 में बरी कर दिया था। लेकिन CBI की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी 2003 को तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
हे दलित-पीड़ित-शोषित और अनपढ़, ये सब लिख कर तुम्हारा केस स्ट्रॉंग नहीं हो रहा। एक-एक स्क्रीनशॉट, हैंडल का IP एड्रेस नोट हो रहा है, सब ऑन रिकॉर्ड रखा जाएगा और तुम ट्वीट डिलीट करके भागोगे।
फिर भी, रणवीर सेना का नाम एक बार पढ़ लेना।
आज खेत मे बैठे ध्यान आया की पीछे के खेतों से जो बारिशों मे पानी आता है वो एक ही रास्ता पकड़ता है।
हमारे पूर्वज बताते थे ये एक छोटी सी पानी की स्ट्रीम का रास्ता था जो अब खेत है, मगर पानी अभी वही रास्ता पकड़ता है।
तभी गुरुग्राम याद आया वहाँ की समस्या को समझकर कुछ लिखा, आप पढ़ें।
बुजुर्ग महिलाओं का यूपी की रोडवेज बसों में नहीं लगेगा टिकट।
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 60 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त बस यात्रा को अनुमति दी है। इस योजना पर हर महीने 22 करोड़ खर्च होंगे।
60+ आयु की 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को रोडवेज बसों में 'आजीवन मुफ्त यात्रा' की सौगात सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान का नया अध्याय लिखेगी।
विवाद ये कतई नहीं है कि महिला क्या पहनें... दिक्कत दोगलेपन से है और हिंदू त्योहारों पर लोगों को उनकी परंपराओं से प्रभावित करने वाले हथकंडों से है।
क्योंकि ऐसा नहीं है कि कृति सेनन ने कोई पहली बार कुछ ऐसा पहना है और विवाद हो गया।
कब क्या पहनना चाहिए इसका एक सलीका होता है। उदाहरण के लिए गुरुद्वारे में जाने से सिर ढंकने की परंपरा है, मंदिर में आप भरे-पूरे कपड़े पहनते हैं। बहुत से मंदिरों में पुरुषों के हॉफपैंट पहनने तक पर रोक है, लेकिन वहां तो कोई कपड़ा पहनने की आजादी का तबला नही बजा रहा है।
इसलिए विक्टिम कार्ड खेलने की जगह लोकतांत्रिक देश में हिंदुओं की आस्था पर कुठाराघात करना बंद करें। हिंदू सहनशील है इसका यह अर्थ नहीं है कि आप बार-बार उसके संयम की परीक्षा लेते रहें।
GIVA ने ये एड हटा दिया है, इस हेतु धन्यवाद।
बड़ी खबर GIVA कंपनी ने रक्षा बंधन पर आप कृति सेनन का विवादित विज्ञापन वापस लिया।
लेकिन देखिए हिंदुओं के खिलाफ कितना जहर भरा है भारत के विपक्षी नेताओं में।
यह पूरा विवाद महिला क्या कपड़े पहने, क्या नहीं इसका है ही नहीं। कृति सेनन हों या कोई और महिला वो ब्रालेट पहन कर घूमें फिरें किसी को कोई तकलीफ नहीं। लेकिन रक्षा बंधन भाई बहन का पवित्र पर्व है, उस दिन कौन लड़की ब्रालेट पहन कर भाई को राखी बांधती है ? हमने तो आज तक नहीं देखा ! पर जब इसका विरोध हुआ तो राहुल गांधी, सुप्रिया श्रीनेत और वोक फेमिनिस्ट इसमें कूद पड़े इस बेहूदापंती का समर्थन करने।
जो लोग इसका समर्थन कर रहे हैं वो क्या ईद का विज्ञापन बिकनी में होगा तो इसका समर्थन करेंगे ? यहां विरोध बिकनी का नहीं, किस मौके पर बिकनी पहनी गई इसका है। कृति सेनन कुछ भी पहनें किसी को फर्क नहीं पड़ता, लेकिन फेमिनिज्म का ज्ञान सिर्फ रक्षा बंधन पर ही आता है, ईद पर नहीं।
#BREAKING
After backlash, Jewellery brand GIVA withdraws its Raksha Bandhan ad featuring Kriti Sanon
Kriti Sanon तो बस एक चेहरा, हिन्दू विरोधी ईको सिस्टम को हिन्दू ही दे रहे पानी | Global Harsh
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