UP PCS 2026: यूपी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा में आवेदन करने की लास्ट डेट एक्सटेंड, अब 3 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन करने का मौका
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'गोरखपुर ही नहीं, पूरे UP को कंट्रोल कर रहे हैं योगी'
गोरखपुर के इस नागरिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, कानून व्यवस्था और उत्तर प्रदेश में हुए सकारात्मक बदलाव पर खुलकर अपनी राय रखी। वीडियो में बताया गया है कि कैसे अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' और सख्त पुलिसिंग की गूंज सिर्फ गोरखपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में मजबूती से दिखाई दे रही है। योगी सरकार द्वारा अपराध और अपराधियों के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों के कारण आज प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है, जिससे आम जनता खुद को पूरी तरह सुरक्षित और निडर महसूस कर रही है। मजबूत प्रशासन और बिना रुके चल रहे विकास कार्यों के दम पर आज बदलते उत्तर प्रदेश की सराहना हर वर्ग कर रहा है।
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#BreakingNews: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि देश भर में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन एक स्वाभाविक हिस्सा हैं और देश भर में सार्वजनिक प्रदर्शनों और विरोध-प्रदर्शनों पर पुलिस की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल की आवश्यकता है।
'कानून को अपने हाथों में लेने वालों पर होनी चाहिए कार्रवाई'
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर कहा कि जिन लोगों ने भी ज्यादती की या कानून अपने हाथ में लिया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
अदालत ने कहा कि नीट परीक्षा का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच जरूरी है। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तय नियमों का उल्लंघन होता है तो कानून को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन तो होते ही हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब विरोध-प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई के लिए एक समान नियम लागू हो जाएंगे तो जिस किसी ने भी ज्यादती की है, कानून को अपने हाथ में लिया है या अत्याचार किया है उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कोर्ट पुलिस हिंसा के आरोपों की जांच कर रही है, जिसमें गंभीर चोट, महिलाओं, वकीलों और मीडियाकर्मियों पर हमले के दावे शामिल हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन आरोपों से प्रथम दृष्टया अपराध होने का मामला बनता है।
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