Gen Z को भाषा की मर्यादा पर ये भी ज्ञान दे रहे हैं-
“कंहवा लुकवा के जइबू
चोली के ई रसगुल्ला?”
क्या हमारी संसद सच ऐसे सांसदों को डिज़र्व करती है?
बिल्कुल नहीं!
@ManojTiwariMP
After a youth's murder in Saharanpur, UP, Family members, along with local residents, staged a highway protest by placing the teenager's body on the road, demanding the arrest of all the accused. The protest turned violent and police resorted to a lathi charge and beat women protesters.
There can be no filthier type of man than one who defends rapists.
Pralhad Joshi is an insult to our education system and an insult to every student in it. Crores of young women study in the institutions he now oversees.
India’s women will never accept PM Modi’s new Education Minister.
धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और भारत की बर्बाद education system के प्रतीक हैं और हमेशा रहेंगे।
उसी system ने 26 बच्चों की जान ली, और लाखों युवाओं को सड़कों पर उतरने को मजबूर किया।
इस्तीफ़ा भी नैतिकता से नहीं - युवाओं के आक्रोश से डरकर देना पड़ा।
और आज उसी व्यक्ति को संसद में BJP माला पहना रही है। यह कोई सम्मान नहीं - लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न है।
देश का हर छात्र ये देख रहा है। और इसमें शामिल हर चेहरा याद रखेगा।
IMPORTANT: The policeman seen firing an AK-47 during the July 25 Bihar bandh over NEET leaks has been suspended. But suspension isn’t enough. The real questions remain: Why was an AK-47 deployed against protesters? Who authorised its use? And who will be held accountable for this shocking lapse? https://t.co/h3whMwirgq
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा ��िला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही स��ान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
२०१५ - दीपक, उपदेश
२०१८ - राजीव त्यागी
२०२१ - पिंकी डार्लिंग
२०२६ - यह नया कबूतर।
सबकी फ़ितरत सालो से जानते है, यह कबूतर ही सरकार को ले डूबेंगे, इस कबूतर के २०१४ मैं एक मूछ का बाल नहीं था।
सनातन और समाज पर कलंक है यह लोग, इनकी ही वजह से हिंदत्व को हिंदुत्��� आतंकवाद कहा जाने लगा है।