दिल्ली पुलिस ने कुछ बताया नहीं सादे कपड़ों में ये #लोग कौन हैं? किसके भरोसे लाठी लेकर #पुलिस के साथ चल रहे थे ? इनमें से
कई लोग #लाठी चलाते दिखे हैं।जहाँ पर हज़ारों जवान वर्दी में थे
वहाँ बिना वर्दी वाले ये कौन लोग हैं ? क्या इस पर किसी अख़बार
के क्राइम रिपोर्टर ने कुछ लिखा,
छत्तीसगढ़ के अमेरा, सरगुजा में जो संघर्ष चल रहा है, वह सिर्फ़ कोयला खदान के खिलाफ़ नहीं अस्तित्व, सम्मान और वंशजों के भविष्य की रक्षा का आंदोलन है। आदिवासी समुदाय जिन पहाड़ियों, जंगलों और नदियों को सदियों से अपनी माँ की तरह बचाते आए हैं, आज उन्हीं पर खदान थोपकर उन्हें उजाड़ने की कोशिश की जा रही है। मोदी सरकार के संरक्षण में अडानी कंपनी जबरन जमीन हड़पना चाहती है, और विरोध में खड़े लोगों पर पुलिस की लाठियाँ बरसाई जा रही हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आंदोलन अब खूनी संघर्ष के कगार पर पहुंच गया है, लेकिन आदिवासी पीछे हटने को तैयार नहीं क्योंकि घर, जल और जंगल बेचने की चीज़ नहीं, जीने की बुनियाद हैं।
ये वीडियो लद्दाख का नहीं, असम का है। जहां असम की 6 चाय आदिवासी जनजातियो ने आज ST स्टेट्स की मांग को लेकर BJP सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। पीएम मोदी ने इन्हें ST स्टेट्स देने का वादा किया था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। लेकिन मीडिया यह कभी नहीं दिखाएगा
कुर्सी की पेटी बांधकर रखिए 25 नवम्बर कश्मीर से कन्याकुमारी अटक से कटक लाखों कर्मचारी आ रहे राजधानी दिल्ली
OPS बहाली के लिए दिल्ली चलो 🏃
निजीकरण समाप्ति के लिए दिल्ली चलो🏃
RTE से पूर्व नियुक्त श���क्षकों को TET अनिवार्यता से मुक्त कराने दिल्ली चलो🏃
@vijaykbandhu @Sthitaprajna_G
असम में मटक समुदाय समेत कई आदिवासी समुदाय सड़कों पर है। यह सिर्फ़ एक समुदाय का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे असम के हाशिये पर खड़े लोगों का संघर्ष है, जो सरकार की नीतियों और ढुलमुल रवैये के खिलाफ खुला विद्रोह बन चुका है।
भजनलाल शर्मा द्वारा झालावाड़ स्कूल हादसे के पीड़ित आदिवासी परिजनों को मुआवज़े के नाम पर मात्र पाँच बकरियां देना न केवल अमानवीय है, बल्कि आदिवासियों की पीड़ा और गरिमा का घोर अपमान है। यह निर्णय यह दर्शाता है कि सरकार आदिवासी समाज को आज भी वोट बैंक से आगे देखने को तैयार नहीं है और उनकी त्रासदी को मज़ाक समझती है। बच्चों की मौत जैसी गंभीर घटना के बाद संवेदना और न्याय की जगह बकरियों का “मुआवज़ा” देना सत्ता की संवेदनहीनता और तुच्छ मानसिकता को उजागर करता है। ऐसे निर्णय न केवल आदिवासी समाज का अपमान हैं, बल्कि पूरे राजस्थान की अंतरात्मा को झकझोरते हैं।
@BhajanlalBjp@RajGovOfficial@NareshMeena__@RajCMO
महाराष्ट्र के बीड़ ज़िले में बच्चे रोज़ जलभराव और कीचड़ से होकर स्कूल जाते हैं। ये सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि देशभर में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर है। बीजेपी की डबल इंजन सरकारें टीवी पर अमृतकाल दिखाती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत में बच्चों को सुरक्षित रास्ता तक नहीं दे पातीं। बिहारवासियों सावधान रहें, जो सरकार बच्चों को किताब की बजाय कीचड़ दे, उससे क्या उम्मीद?
गुजरात के नसवाडी तालुका के खेन्दा गांव में सड़क न होने के कारण गर्भवती महिला को झोली में उठाकर ले जाना पड़ा। बीजेपी सरकार "गुजरात मॉडल" का ढोल पीटती है, लेकिन आदिवासी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। यह अमृत महोत्सव नहीं, अंधी व्यवस्था का मातम है