रिश्ते बाहर से बाद में ख़त्म होते हैं, भीतर बहुत पहले हो जाते हैं पर जाने क्यों हम खुद से यह बात कभी कह नहीं पाते. हमें लगता है कपड़ों की तरह हम रिश्तों को भी सिल लेंगे, सिलते भी हैं पर जीवन भर वे रंग-बिरंगे टाँके हमारी आत्मा को चुभते रहते हैं.
हमारा शरीर हमारा बेहतरीन ग़ुलाम है. यह वही वही प्रकट करता है जो हम इससे कहते हैं और हम इससे वही वही प्रगट करने को कहते हैं, जिनके बारे में हमको पता है. हम अपने ख़ज़ाने की बंद पेटी पर बैठे हर वक्त भीख माँगते रहते हैं. कभी दूसरे से, कभी खुद से.
वैलेंटाइन डे के दिन आज से पढ़ें जया जादवानी का नया उपन्यास 'ख़रगोश'
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यह कहानी है काया की और काया की ज़िंदगी में शामिल उन तमाम ख़ूबसूरत प्रेम संबंधों की, जिन्होंने उसे जीना सिखाया। जीने के लिए सपने देखना सिखाया।
@JayaJadwani
“बहुत वक्त साथ रहो तो दुःख से भी दोस्ती हो जाती है. वह आपका पीछा नहीं छोड़ना चाहता पर जब आप उसे स्वीकार कर लेते हो, वह शोर नहीं मचाता, वफ़ादार कुत्ते सा आपकी कुर्सी के नीचे अपनी टांगों पर मुँह धरे बैठा रहता है.”
ख़रगोश, BYNGE, HINDI
“मैं गर्भ के अंधकार में हूँ… एक गहरे सुकून में डूबी … लहरों पर तैरती …. अपनी ही लय में तरंगित … तृप्त …. मैं इच्छा नहीं हूँ, मैं कामना नहीं हूँ, मैं स्वप्न नहीं हूँ, मैं याद भी नहीं हूँ, मैं बस हूँ … अपने होने में परितृप्त… आह्लादित … संपूर्ण… और मैंने जन्म लिया …”
"प्रेम हम इसलिए नहीं करते कि किसी दूसरे की ज़रूरत है हमें, प्रेम हम इसलिए करते हैं कि हमें हमारी बहुत ज़रूरत है...जब हम प्रेम करते हैं, अपने पास वापस आ जाते हैं।"
खरगोश, जल्द
Bynge HINDI पर
@jianuragji Bynge HINDI ने पाठकों के लिए एक नया रचनात्मक द्वार खोल दिया है। कहीं भी, किसी भी वक्त आप उस संसार में प्रवेश कर सकते हैं, जिसके रास्ते आपको अपने भीतर ले जाते हैं।